18 दिसंबर 2025, Airspace Restriction– भारत और पाकिस्तान के बीच लंबे समय से चले आ रहे तनावपूर्ण संबंधों को एक नया झटका लगा है। पाकिस्तान ने भारतीय विमानों के लिए अपने हवाई क्षेत्र (एयरस्पेस) पर लगाए गए प्रतिबंध को एक महीने और बढ़ा दिया है। यह विस्तार 23 जनवरी 2026 तक प्रभावी होगा, जो पहले 24 दिसंबर 2025 को समाप्त होने वाला था। पाकिस्तान एयरपोर्ट्स अथॉरिटी (पीएए) द्वारा जारी नोटिस टू एयरमेन (नोटाम) के अनुसार, यह प्रतिबंध सभी भारतीय पंजीकृत, संचालित या पट्टे पर लिए गए विमानों—व्यावसायिक और सैन्य दोनों—पर लागू होगा। यह कदम कराची और लाहौर फ्लाइट इंफॉर्मेशन रीजन (एफआईआर) पर पूरी तरह से प्रभाव डालेगा।
यह घटना न केवल विमानन उद्योग को प्रभावित कर रही है, बल्कि दोनों देशों के बीच सामान्यीकरण की किसी भी संभावना को भी धूमिल कर रही है। अप्रैल 2025 में पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद से चले आ रहे इस प्रतिबंध ने द्विपक्षीय संबंधों को गहरी खाई डाल दी है। इस रिपोर्ट में हम इस विकास की पृष्ठभूमि, कारणों, प्रभावों और संभावित परिणामों पर विस्तार से चर्चा करेंगे।
पहलगाम हमला: तनाव का प्रारंभिक बिंदु
सब कुछ 22 अप्रैल 2025 को पहलगाम, जम्मू-कश्मीर में एक खूबसूरत पर्यटन स्थल बैसरन वैली में शुरू हुआ। यहां सशस्त्र आतंकवादियों ने पर्यटकों पर हमला किया, जिसमें 26 निर्दोष लोगों की जान चली गई—25 भारतीय और एक नेपाली नागरिक। हमलावरों ने पीड़ितों से उनकी धार्मिक पहचान पूछी और गैर-मुस्लिमों को निशाना बनाया। यह हमला ‘पहलगाम नरसंहार’ के नाम से जाना जाता है, जो 2019 के पुलवामा हमले के बाद कश्मीर में सबसे बड़ा नागरिक हताहत वाला घटना था।
प्रारंभ में, द रेसिस्टेंस फ्रंट (टीआरएफ)—जो लश्कर-ए-तैयबा (एलईटी) का एक प्रॉक्सी संगठन माना जाता है—ने टेलीग्राम पर हमले की जिम्मेदारी ली। हालांकि, कुछ दिनों बाद टीआरएफ ने दावा वापस ले लिया, इसे साइबर घुसपैठ का परिणाम बताते हुए। भारत ने पाकिस्तान पर हमले को समर्थन देने का आरोप लगाया, जबकि इस्लामाबाद ने इनकार किया और तटस्थ जांच की पेशकश की।
इस हमले ने भारत को कड़ी प्रतिक्रिया लेने पर मजबूर कर दिया। 23 अप्रैल को भारत ने पाकिस्तान के साथ सीमा बंद कर दी, द्विपक्षीय व्यापार रोक दिया और 1960 के सिंधु जल संधि को निलंबित करने की घोषणा की—जो दोनों देशों के लिए जल संसाधनों का महत्वपूर्ण स्रोत है। पाकिस्तान ने जवाब में 1972 के शिमला समझौते को निलंबित कर दिया, जो संघर्ष समाधान का कानूनी ढांचा प्रदान करता है।
तनाव चरम पर पहुंचा जब 6-7 मई 2025 को भारत ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ शुरू किया। इस ऑपरेशन में पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर और अंतरराष्ट्रीय रूप से मान्यता प्राप्त पाकिस्तानी क्षेत्र में आतंकी ठिकानों पर हवाई हमले किए गए। भारत ने इसे ‘आतंकी बुनियादी ढांचे’ पर निशाना बताया, जबकि पाकिस्तान ने इसे नागरिकों पर हमला करार दिया। दोनों पक्षों ने जवाबी कार्रवाई की, और 10 मई को युद्धविराम घोषित हुआ। बाद में, जुलाई 2025 में ‘ऑपरेशन महादेव’ में सेना, सीआरपीएफ और जम्मू-कश्मीर पुलिस ने संयुक्त रूप से हमले में शामिल तीन आतंकवादियों—सुलेमान उर्फ फैजल जट, हामजा अफगानी और जिब्रान—को मार गिराया।
Airspace Restriction का इतिहास: पारस्परिक बहिष्कार
पहलगाम हमले के तुरंत बाद, अप्रैल 2025 में दोनों देशों ने एक-दूसरे के विमानों के लिए हवाई क्षेत्र बंद कर दिया। यह कदम 2019 के बालाकोट हमले के बाद लगाए गए प्रतिबंध की याद दिलाता है, लेकिन इस बार यह अधिक लंबा खिंच गया। पाकिस्तान ने कई बार विस्तार किया—जून, सितंबर, नवंबर और अब दिसंबर में। प्रत्येक विस्तार एक महीने का होता है, जो द्विपक्षीय संबंधों की खराब स्थिति को दर्शाता है।
भारत ने भी पाकिस्तानी विमानों पर समान प्रतिबंध लगाया है, जो अब तक बरकरार है। यह पारस्परिक बहिष्कार न केवल व्यावसायिक उड़ानों को प्रभावित करता है, बल्कि सैन्य और कूटनीतिक उड़ानों को भी। संयुक्त राष्ट्र द्वारा नामित आतंकी संगठनों के साथ पाकिस्तान के कथित संबंधों को भारत का मुख्य आरोप बनाया गया है। जुलाई 2025 में अमेरिका ने टीआरएफ को ‘विदेशी आतंकी संगठन’ घोषित किया, जो भारत के दावों को मजबूती प्रदान करता है।
वर्तमान विस्तार: क्या है नोटाम का सार?
17 दिसंबर 2025 को जारी नोटाम के अनुसार, पाकिस्तान का हवाई क्षेत्र भारतीय विमानों के लिए पूरी तरह बंद रहेगा। पीएए ने स्पष्ट कहा, “यह प्रतिबंध पहले से लागू है और निर्दिष्ट समय के अनुसार 23 जनवरी 2026 तक जारी रहेगा।” यह विस्तार पिछले विस्तार से एक सप्ताह पहले आया, जो तनाव की निरंतरता को इंगित करता है। कुछ स्रोतों में तारीख में मामूली भिन्नता (जैसे 24 या 27 जनवरी) दिखाई दी, लेकिन आधिकारिक सहमति 23 जनवरी पर है।
पाकिस्तान का यह कदम पहलगाम हमले के बाद की ‘फ्रीज’ को बनाए रखने का प्रयास लगता है। इस्लामाबाद का तर्क है कि भारत की ‘आक्रामक’ नीतियां—जैसे सिंधु जल संधि का निलंबन—शांति प्रक्रिया को बाधित कर रही हैं। हालांकि, कोई आधिकारिक बयान नहीं आया कि यह विस्तार किसी विशिष्ट घटना से प्रेरित है।
प्रभाव: विमानन उद्योग पर गहरा आघात
यह प्रतिबंध भारतीय एयरलाइंस के लिए सबसे बड़ा सिरदर्द साबित हो रहा है। यूरोप, मध्य पूर्व और पश्चिम एशिया जाने वाली उड़ानों को अब लंबा रास्ता अपनाना पड़ता है—अफगानिस्तान, ईरान या अरब सागर के ऊपर से। उदाहरण के लिए, दिल्ली से लंदन की उड़ान में 1-2 घंटे अतिरिक्त लगते हैं, जिससे ईंधन खर्च 20-30% बढ़ जाता है। एयर इंडिया और इंडिगो जैसी कंपनियां सबसे अधिक प्रभावित हैं।
पिछले महीने, पटना के जयप्रकाश नारायण एयरपोर्ट पर सैकड़ों यात्री फंस गए थे, जब इंडिगो की उड़ानें विलंबित हो गईं। कुल मिलाकर, इस प्रतिबंध से भारतीय विमानन उद्योग को करोड़ों रुपये का नुकसान हो रहा है। यात्रियों को महंगे टिकट और असुविधा का सामना करना पड़ रहा है। एयर इंडिया ने चीन के शिनजियांग क्षेत्र के ऊपर वैकल्पिक कॉरिडोर के लिए लॉबिंग की है, लेकिन अभी तक सफलता नहीं मिली।
अर्थव्यवस्था पर व्यापक प्रभाव पड़ रहा है। पर्यटन, व्यापार और प्रवासी श्रमिकों की आवाजाही बाधित हो रही है। पाकिस्तानी पक्ष पर भी असर है—उनकी एयरलाइंस को भारतीय मार्गों से वंचित रहना पड़ रहा है, लेकिन उनका प्रभाव कम है क्योंकि उनके अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क सीमित है।
भारत की प्रतिक्रिया: संभावित जवाबी कदम
भारतीय विदेश मंत्रालय ने इस विस्तार को ‘दुर्भाग्यपूर्ण’ बताया है, लेकिन कोई तत्काल जवाबी कार्रवाई की घोषणा नहीं की। स्रोतों के अनुसार, भारत पाकिस्तानी विमानों पर अपने प्रतिबंध को भी बढ़ा सकता है। गृह मंत्री अमित शाह ने संसद में कहा कि पहलगाम हमले के बाद की कार्रवाइयां आतंकवाद के खिलाफ भारत की दृढ़ता दर्शाती हैं।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार ने कूटनीतिक स्तर पर प्रयास तेज कर दिए हैं। अमेरिका और यूरोपीय संघ से समर्थन मांगा जा रहा है, जो पहले से ही पाकिस्तान पर आतंकवाद रोकने का दबाव डाल रहे हैं।
अंतरराष्ट्रीय दृष्टिकोण: चिंता और मध्यस्थता की मांग
अंतरराष्ट्रीय समुदाय इस तनाव से चिंतित है। यूके ने पहलगाम हमले की निंदा की और युद्धविराम का स्वागत किया था। अमेरिका ने मई 2025 के संघर्ष में मध्यस्थता का दावा किया, हालांकि भारत ने इसे खारिज किया। जुलाई में टीआरएफ को आतंकी संगठन घोषित करना एक बड़ा कदम था।
संयुक्त राष्ट्र और आईसीएओ (अंतरराष्ट्रीय नागरिक उड्डयन संगठन) ने दोनों देशों से हवाई क्षेत्र खोलने की अपील की है, ताकि नागरिक उड्डयन प्रभावित न हो। लेकिन परमाणु हथियार संपन्न पड़ोसियों के बीच यह तनाव वैश्विक शांति के लिए खतरा है।
निष्कर्ष: शांति की राह में बाधाएं
पाकिस्तान का यह विस्तार भारत-पाक संबंधों में एक और कदम पीछे की ओर इशारा करता है। पहलगाम हमले के आठ महीने बाद भी घाव ताजा हैं, और एयरस्पेस प्रतिबंध जैसे कदम तनाव को बढ़ावा दे रहे हैं। दोनों देशों को कूटनीति और संवाद की जरूरत है—शायद तीसरे पक्ष की मध्यस्थता से। अन्यथा, आर्थिक नुकसान और मानवीय कष्ट बढ़ते जाएंगे।
जब तक आतंकवाद का मुद्दा हल नहीं होता, सामान्यीकरण दूर की कौड़ी लगता है। भारत को अपनी विमानन क्षमता मजबूत करनी होगी, जबकि पाकिस्तान को आतंकी समर्थन बंद करने का संदेश देना होगा। भविष्य में, क्या यह प्रतिबंध स्थायी हो जाएगा? समय ही बताएगा।