10 दिसंबर 2025: दक्षिण एशिया में शांति की उम्मीदों पर एक और करारा प्रहार—पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच व्यापार युद्ध ने हिंसक रूप धारण कर लिया है। हाल के सीमा संघर्षों के बाद दोनों देशों ने प्रमुख व्यापारिक मार्ग बंद कर दिए हैं, जिससे लाखों किसानों, व्यापारियों और सीमावर्ती समुदायों की आजीविका दांव पर लग गई है। संयुक्त राष्ट्र की अपील के बावजूद बातचीत विफल हो चुकी है, और अनुमानित आर्थिक नुकसान 200 मिलियन डॉलर से अधिक हो चुका है। तालिबान शासन के बाद से बढ़ते तनाव अब पूर्ण युद्ध की आशंका पैदा कर रहे हैं।
इस विवाद की जड़ें ऐतिहासिक हैं। डुरंड लाइन—2,600 किलोमीटर लंबी विवादित सीमा—पर दोनों देश दशकों से दावा ठोंकते आ रहे हैं। तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (टीटीपी) के पाकिस्तान में हमलों को अफगानिस्तान से समर्थन का आरोप लगाकर इस्लामाबाद ने नवंबर 2025 में कंधार-पेशावर राजमार्ग बंद कर दिया। काबुल ने जवाबी कार्रवाई में अफगान ट्रकों पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया, जिससे दैनिक व्यापार ठप हो गया। न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, यह निलंबन अफगानिस्तान और पाकिस्तान के लाखों किसानों को प्रभावित कर रहा है, जहां ट्रक भर-भरकर फल-सब्जियां सड़ रही हैं। 5 दिसंबर को सीमा पर भारी गोलीबारी में कम से कम 5 लोग मारे गए, जो तनाव को नई ऊंचाई दे गई।
वर्तमान स्थिति भयावह है। अफगानिस्तान का व्यापार घाटा FY2025 की शुरुआत में चौड़ा हो गया, जहां आयात बढ़े लेकिन निर्यात रुके। पाकिस्तान को तीन महीने के निलंबन से 150-169 मिलियन डॉलर का नुकसान हो सकता है, जबकि 24 दिनों में ही 200 मिलियन डॉलर का घाटा दर्ज हो चुका। द्विपक्षीय व्यापार जुलाई-सितंबर तिमाही में 6% गिरकर 475 मिलियन डॉलर रह गया। लाखों अफगान शरणार्थी, जो पाकिस्तान में रहते थे, अब वापस लौटने को मजबूर हैं, जिससे काबुल में मानवीय संकट बढ़ गया। व्यापारियों का कहना है कि फल, अनाज और कपड़ों का कारोबार ठप होने से परिवार भुखमरी के कगार पर हैं। डिप्लोमैट के अनुसार, तालिबान ने व्यापार रोककर पाकिस्तान को दबाव में लाने की कोशिश की, लेकिन इससे अफगान अर्थव्यवस्था भी चरमरा रही है।
अंतरराष्ट्रीय समुदाय चिंतित है। कतर और तुर्की की मध्यस्थता में नवंबर 2025 में तीन दौर की वार्ताएं विफल रहीं। संयुक्त राष्ट्र ने युद्धविराम और मानवीय सहायता की अपील की, जबकि विश्व बैंक ने 2025-2027 के लिए अफगानिस्तान के व्यापार पर चेतावनी जारी की। ईस्ट एशिया फोरम ने इसे पाकिस्तान के लिए ‘दो-मोर्चे का संकट’ बताया, जहां भारत के साथ तनाव भी जोड़ रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि प्रमुख क्रॉसिंग्स के बंद होने से दैनिक लाखों डॉलर का नुकसान हो रहा, जो मानवीय संकट को बढ़ावा दे रहा।
यह व्यापार युद्ध न केवल आर्थिक बल्कि सामाजिक ताने-बाने को तोड़ रहा है। दोनों देशों के करीबी समुदाय अब अलग-थलग पड़ गए हैं। यदि तत्काल संवाद नहीं हुआ, तो दक्षिण एशिया में अस्थिरता फैल सकती है। पाकिस्तान और तालिबान को कूटनीति अपनानी होगी—केवल तभी लाखों प्रभावितों को राहत मिलेगी। दुनिया को अब हस्तक्षेप करना चाहिए, वरना यह संघर्ष अनियंत्रित हो जाएगा।