2 जनवरी 2026, Bihar– Bihar सरकार ने नए साल की शुरुआत के साथ एक ऐतिहासिक कदम उठाया है। 1 जनवरी 2026 से राज्य में सभी भूमि अभिलेखों की डिजिटल प्रतियां पूर्ण कानूनी मान्यता प्राप्त कर लेंगी। राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के इस फैसले से अब जमीन के दस्तावेजों की सत्यापित नकल केवल ऑनलाइन जारी की जाएगी, और डिजिटल हस्ताक्षर वाली ये प्रतियां अदालतों, बैंकों तथा अन्य संस्थानों में वैध होंगी। इससे न केवल कागजी कार्रवाई खत्म होगी, बल्कि भ्रष्टाचार, देरी और विवादों में भी कमी आएगी। उपमुख्यमंत्री विजय कुमार सिन्हा ने इसे ‘डिजिटल बिहार’ की दिशा में मील का पत्थर बताया है। लाखों रैयतों को अब सरकारी दफ्तरों के चक्कर काटने की जरूरत नहीं पड़ेगी, जो ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने का बड़ा माध्यम बनेगा।
नई व्यवस्था का ऐलान: 1 जनवरी से लागू
Bihar सरकार ने 24 दिसंबर 2025 को इसकी अधिसूचना जारी की, जो तत्काल प्रभाव से लागू हो गई। विभाग के अनुसार, भू-अभिलेख पोर्टल पर अब सभी राजस्व अभिलेख – जैसे खाता-खेसरा, खतौनी, जमाबंदी, वंशावली और अन्य – स्कैन होकर उपलब्ध हैं। आवेदक ऑनलाइन आवेदन कर शुल्क जमा करने के बाद डिजिटल साइन वाली प्रति डाउनलोड कर सकेंगे। पहले ये दस्तावेज केवल कागजी रूप में मिलते थे, लेकिन अब केवल डिजिटल संस्करण ही मान्य होगा। मैजिकब्रिक्स की रिपोर्ट के मुताबिक, यह कदम भूमि डिजिटलीकरण प्रक्रिया का अंतिम चरण है, जो 2010 से चल रही थी।
पोर्टल पर प्रक्रिया: सरल और तेज
ऑनलाइन प्रक्रिया बेहद आसान है। उपयोगकर्ता को पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन करना होगा, फिर खाता संख्या या खेसरा नंबर डालकर आवेदन भरना है। शुल्क (10-50 रुपये प्रति पृष्ठ) का भुगतान नेट बैंकिंग या UPI से हो सकेगा। सत्यापन के बाद, 24-48 घंटों में डिजिटल हस्ताक्षरित PDF मिल जाएगी। TV9 हिंदी ने बताया कि यह सुविधा मोबाइल ऐप के माध्यम से भी उपलब्ध होगी, जिससे गांव-गांव तक पहुंच बनेगी। विभाग ने 38 जिलों में 500 से अधिक साइबर कैफे को अधिकृत किया है, ताकि डिजिटल साक्षरता न होने वाले रैयत मदद ले सकें।
लाभ: विवादों में कमी और पारदर्शिता का बढ़ावा
यह व्यवस्था Bihar के लिए वरदान साबित होगी, जहां भूमि विवाद 70% से अधिक मुकदमों का कारण हैं। डिजिटल रिकॉर्ड से नकली दस्तावेजों का अंत होगा, क्योंकि हर प्रति ट्रेसेबल होगी। नवभारत टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, पहले चिरकुट (मध्यस्थ) दस्तावेजों में हेरफेर करते थे, लेकिन अब सीधा ऑनलाइन एक्सेस से यह समस्या हल हो जाएगी। विशेषज्ञों का अनुमान है कि भूमि विवाद 40% कम हो जाएंगे, और संपत्ति बिक्री में तेजी आएगी। ग्रामीण महिलाओं को विशेष लाभ मिलेगा, क्योंकि अब वे घर बैठे दस्तावेज प्राप्त कर लोन या उत्तराधिकार के लिए इस्तेमाल कर सकेंगी।
आर्थिक प्रभाव: भ्रष्टाचार मुक्त और समय की बचत
पत्रिका की खबरों के मुताबिक, सालाना 10 लाख से अधिक आवेदन आते हैं, जिनमें औसतन 15-20 दिन लगते थे। अब यह प्रक्रिया कुछ घंटों में पूरी हो जाएगी, जिससे रैयतों को 50 करोड़ रुपये से अधिक की बचत होगी। बैंक और वित्तीय संस्थान डिजिटल रिकॉर्ड को ही स्वीकार करेंगे, जिससे कृषि लोन वितरण में पारदर्शिता बढ़ेगी। जगरण ने उल्लेख किया कि यह ‘ई-गवर्नेंस’ मॉडल अन्य राज्यों के लिए उदाहरण बनेगा।
चुनौतियां और समाधान: डिजिटल डिवाइड को दूर करने की कोशिश
हालांकि, ग्रामीण क्षेत्रों में इंटरनेट और साक्षरता की कमी चुनौती है। विभाग ने ‘डिजिटल गांव’ अभियान के तहत 10,000 पंचायतों में वाई-फाई हॉटस्पॉट लगाने का लक्ष्य रखा है। फेसबुक पोस्ट के अनुसार, रोहतास जिले जैसे क्षेत्रों में जागरूकता शिविर चल रहे हैं। विशेषज्ञ रवि शंकर प्रसाद (पूर्व केंद्रीय मंत्री) ने कहा, “यह कदम बिहार को डिजिटल इंडिया का सच्चा चेहरा बनाएगा, लेकिन ट्रेनिंग जरूरी है।” यदि इंटरनेट कनेक्टिविटी सुधरेगी, तो 2026 तक 90% रैयत इसका लाभ उठा सकेंगे।
कानूनी आधार: आईटी एक्ट के तहत मान्यता
डिजिटल हस्ताक्षर सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 की धारा 5 के तहत वैध हैं। अब ये दस्तावेज अदालती कार्यवाही में भी सबूत के रूप में इस्तेमाल होंगे। प्रभात खबर ने रिपोर्ट किया कि पायलट प्रोजेक्ट में पटना और मुजफ्फरपुर में 95% सफलता मिली। कोई आपत्ति होने पर 30 दिनों में सुधार की सुविधा होगी।
राजनीतिक प्रतिक्रियाएं: विपक्ष का समर्थन
उपमुख्यमंत्री विजय सिन्हा ने फेसबुक पर वीडियो जारी कर कहा, “अब न दफ्तरों के चक्कर, न देरी – सिर्फ पारदर्शी सेवा।” विपक्षी दल आरजेडी ने भी सराहना की, हालांकि तेजस्वी यादव ने ‘पूर्ण कार्यान्वयन’ की मांग की। यह फैसला नीतीश कुमार सरकार की डिजिटल एजेंडा को मजबूत करता है।
निष्कर्ष: बिहार की नई जमीन, नई उम्मीदें
Bihar में ऑनलाइन लैंड रिकॉर्ड की कानूनी मान्यता एक क्रांतिकारी कदम है, जो पारदर्शिता, सुविधा और न्याय सुनिश्चित करेगा। इससे न केवल विवाद कम होंगे, बल्कि आर्थिक विकास को गति मिलेगी। सरकार को अब डिजिटल साक्षरता पर फोकस करना चाहिए, ताकि हर रैयत इसका लाभ उठा सके। यह बदलाव बिहार को आधुनिक भारत का हिस्सा बनाने की दिशा में बड़ा योगदान देगा। आने वाले महीनों में इसकी सफलता पर नजर रहेगी।
Sources: मैजिकब्रिक्स, नवभारत टाइम्स, TV9