2 मार्च 2026, तेल बाजार में उथल-पुथल, सऊदी Ras Tanura रिफाइनरी प्रभावित: मिडिल ईस्ट में अमेरिका-इज़रायल और ईरान के बीच चल रहे संघर्ष ने वैश्विक तेल बाजार को हिला कर रख दिया है। ईरान के जवाबी हमलों में सऊदी अरब की सबसे बड़ी रिफाइनरी – रास तनूरा – पर ड्रोन हमला हुआ, जिससे उत्पादन प्रभावित हुआ। इस घटना के बाद ब्रेंट क्रूड की कीमतें 9-13% उछलकर $79-82 प्रति बैरल के स्तर पर पहुंच गईं, जो पिछले 14 महीनों का उच्चतम स्तर है। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में शिपिंग बाधित होने से तेल सप्लाई चेन खतरे में पड़ गई है, जिसका सीधा असर भारत जैसे बड़े आयातक देशों पर पड़ रहा है।
रास तनूरा पर हमला: सऊदी अरामको का सबसे बड़ा झटका
सऊदी अरामको की रास तनूरा रिफाइनरी दुनिया की सबसे बड़ी तेल रिफाइनरी है, जो प्रतिदिन 5.5 लाख बैरल से ज्यादा क्रूड प्रोसेस करती है। ईरान के IRGC (इस्लामिक रिवॉल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स) ने रविवार रात ड्रोन हमले में रिफाइनरी के स्टोरेज टैंक और प्रोसेसिंग यूनिट्स को निशाना बनाया। सऊदी अरामको ने पुष्टि की कि हमले से “कुछ सुविधाएं प्रभावित” हुई हैं और उत्पादन में अस्थायी कमी आई है।
- हमले के बाद रिफाइनरी में आग लग गई, जो कई घंटों तक चली।
- सऊदी रक्षा मंत्रालय ने कहा कि हमले को “आंशिक रूप से” रोका गया, लेकिन कुछ ड्रोन टारगेट तक पहुंच गए।
- रास तनूरा से निकलने वाली 70% से ज्यादा तेल निर्यात क्षमता प्रभावित हुई।
सऊदी अधिकारियों ने कहा कि रिफाइनरी को 48-72 घंटों में आंशिक रूप से बहाल करने की कोशिश की जा रही है, लेकिन पूर्ण उत्पादन में 1-2 सप्ताह लग सकते हैं।
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में खतरा: शिपिंग ट्रैफिक 70% कम
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज – जहां से दुनिया का 20-21% तेल गुजरता है – अब युद्ध क्षेत्र बन चुका है। ईरान ने “शत्रु देशों” के जहाजों को निशाना बनाने की धमकी दी है। पिछले 48 घंटों में:
- तीन टैंकर डैमेज हुए, जिसमें एक भारतीय क्रू सदस्य की मौत हो गई।
- दैनिक शिपिंग ट्रैफिक 60-70 जहाजों से घटकर 15-20 रह गया।
- कई शिपिंग कंपनियों ने स्ट्रेट से जहाजों को रोक दिया।
लॉयड्स लिस्ट और शिपिंग इंटेलिजेंस रिपोर्ट्स के अनुसार, इंश्योरेंस प्रीमियम 300-500% बढ़ गए हैं। कई टैंकर अब लाल सागर या अफ्रीका के रास्ते लंबा चक्कर काट रहे हैं, जिससे डिलीवरी में 10-15 दिन की देरी हो रही है।
तेल कीमतों में उछाल: ब्रेंट $82 तक पहुंचा
- ब्रेंट क्रूड: 9-13% उछाल के साथ $79-82 प्रति बैरल (14 महीने का उच्चतम स्तर)।
- WTI क्रूड: 8-11% बढ़कर $74-77 प्रति बैरल।
- एशियाई बाजारों में सुबह 2-3% की अतिरिक्त तेजी।
OPEC+ ने कहा कि वह उत्पादन बढ़ाने पर विचार कर रहा है, लेकिन सऊदी अरामको के प्रभाव से उत्पादन कटौती की आशंका बढ़ गई है। गोल्डमैन सैक्स और JPMorgan ने चेतावनी दी कि अगर संघर्ष लंबा चला तो ब्रेंट $100-120 तक जा सकता है।
भारत पर असर: पेट्रोल-डीजल में 5-8 रुपये की बढ़ोतरी संभावित
भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा तेल आयातक है और 85% से ज्यादा तेल आयात करता है। इस उछाल का असर:
- पेट्रोल-डीजल कीमतें 5-8 रुपये प्रति लीटर बढ़ सकती हैं (कुछ राज्यों में पहले ही बढ़ोतरी शुरू)।
- महंगाई दर (CPI) पर 0.4-0.7% अतिरिक्त दबाव।
- ऑटो, ट्रांसपोर्ट, FMCG और एविएशन सेक्टर प्रभावित।
- स्टॉक मार्केट में गिरावट: Sensex-Nifty में 1-1.5% की गिरावट, तेल-गैस कंपनियां मिक्स्ड।
सरकार ने पेट्रोलियम मंत्रालय और RBI के साथ बैठक की है। कई विशेषज्ञों का कहना है कि अगर कीमतें $100 पार कर गईं तो केंद्र को सब्सिडी या टैक्स कटौती पर विचार करना पड़ सकता है।
वैश्विक अर्थव्यवस्था पर खतरा
- अमेरिका: इन्फ्लेशन बढ़ने का खतरा, फेड की ब्याज दर नीति प्रभावित।
- यूरोप: ऊर्जा संकट की आशंका, गैस और तेल कीमतें पहले से ही ऊंची।
- एशिया: चीन, भारत, जापान, कोरिया में इंपोर्ट बिल बढ़ेगा।
UN और G7 ने डी-एस्केलेशन की मांग की है, लेकिन ट्रंप और ईरान के नेतृत्व से कोई सकारात्मक संकेत नहीं मिला।
यह संकट अब सिर्फ क्षेत्रीय नहीं, बल्कि वैश्विक ऊर्जा संकट में बदल चुका है। तेल कीमतें और शिपिंग रूट्स की स्थिरता अगले 48-72 घंटों में तय करेगी कि क्या दुनिया $100+ क्रूड का दौर देखेगी।
Sources: द हिन्दू