10 दिसंबर 2025: बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री और राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) के संरक्षक लालू प्रसाद यादव से जुड़े बहुचर्चित चारा घोटाले में नया मोड़ आ गया है। केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) की विशेष अदालत ने एक महत्वपूर्ण मामले में रोजाना सुनवाई का फैसला सुनाया है। यह निर्णय घोटाले के एक प्रमुख केस—देवघर ट्रेजरी से 89 लाख रुपये के गबन से जुड़े—में लिया गया है, जिसमें लालू प्रसाद सहित कई तत्कालीन मंत्री, विधायक और आईएएस अधिकारी आरोपी हैं। कोर्ट ने सभी आरोपियों को निर्देश दिया है कि वे तय तारीखों पर व्यक्तिगत रूप से पेश हों। यह फैसला न्यायिक प्रक्रिया को तेज करने की दिशा में एक सकारात्मक कदम माना जा रहा है, लेकिन राजनीतिक हलकों में यह लालू परिवार के लिए नई चुनौती के रूप में देखा जा रहा है।
चारा घोटाला, जिसे ‘फॉडर स्कैम’ के नाम से जाना जाता है, 1990 के दशक की बिहार की राजनीति का सबसे बड़ा कांड है। इसमें पशुपालन विभाग के नाम पर सरकारी खजाने से करीब 940 करोड़ रुपये का गबन किया गया था। लालू प्रसाद, जो उस समय बिहार के मुख्यमंत्री थे, इस घोटाले के मुख्य आरोपी बने। जांच एजेंसी सीबीआई ने 1996 में प्राथमिकी दर्ज की, जिसके बाद लालू को मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देना पड़ा। इस घोटाले ने न केवल बिहार की प्रशासनिक व्यवस्था को झकझोर दिया, बल्कि लालू की राजनीतिक यात्रा को भी लंबे समय तक प्रभावित किया। विकिपीडिया के अनुसार, यह घोटाला बिहार के पशु चारा, दवाओं और उपकरणों की खरीद के नाम पर फर्जी बिलों के जरिए धन हड़पने का मामला था। लालू को अब तक कई मामलों में दोषी ठहराया गया है, जिनमें दुमरांव ट्रेजरी, चाईबासा ट्रेजरी और डोरंडा ट्रेजरी केस शामिल हैं। 2013 में उन्हें पहली सजा मिली, जब विशेष सीबीआई कोर्ट ने पांच साल की कैद और 60 लाख रुपये का जुर्माना लगाया।
हाल के वर्षों में लालू को स्वास्थ्य आधार पर जमानत मिली हुई है। 2022 में सुप्रीम कोर्ट ने डोरंडा ट्रेजरी केस में उनकी जमानत याचिका को लंबित रखा, जबकि सीबीआई ने सख्त सजा की मांग की। जुलाई 2025 में झारखंड हाईकोर्ट ने सीबीआई की याचिका स्वीकार की, जिसमें लालू की सजा को तीन साल से बढ़ाकर सात साल करने की मांग की गई। 2018 में देवघर केस में उन्हें साढ़े तीन साल की सजा हुई थी, लेकिन सीबीआई अब अधिक कठोर दंड चाहती है। अगस्त 2023 में रांची की विशेष अदालत ने एक अन्य केस में 89 आरोपियों को दोषी ठहराया, जबकि 35 को बरी किया। कुल 124 आरोपी थे, जिनमें पूर्व विधायक गुलशन लाल आजमानी जैसे नाम शामिल थे।
अब इस नए फैसले से सुनवाई में तेजी आएगी। विशेष न्यायाधीश ने कहा कि लंबित मामलों को निपटाने के लिए दैनिक सुनवाई आवश्यक है। लालू के अलावा पूर्व मंत्री जगन्नाथ मिश्रा (जो बाद में बरी हो चुके हैं), सुधीर कुमार भट्टाचार्य और बेक जूलियस जैसे सह-आरोपी भी प्रभावित होंगे। आरजेडी के प्रवक्ता मनीष यादव ने इसे ‘राजनीतिक साजिश’ करार दिया, जबकि भाजपा ने इसे न्याय की जीत बताया। बिहार विधानसभा चुनाव से पहले यह विकास लालू के बेटे तेजस्वी यादव की राजनीतिक महत्वाकांक्षाओं पर असर डाल सकता है।
चारा घोटाले ने न केवल आर्थिक हानि पहुंचाई, बल्कि भ्रष्टाचार के खिलाफ जन जागरूकता भी बढ़ाई। सीबीआई की दृढ़ता से साबित होता है कि कानून सबके लिए बराबर है। हालांकि, लालू की उम्र (77 वर्ष) और स्वास्थ्य समस्याओं को देखते हुए, यह प्रक्रिया मानवीय दृष्टि से भी चुनौतीपूर्ण होगी। कुल मिलाकर, यह फैसला न्याय व्यवस्था की दक्षता को मजबूत करने वाला है, लेकिन राजनीतिक परिदृश्य में नई बहस छेड़ सकता है।