NORTH KOREANORTH KOREA

4 जनवरी 2026, North Korea की बैलिस्टिक मिसाइल प्रशिक्षण– पूर्वी एशिया में तनाव एक बार फिर चरम पर पहुंच गया है। North Korea ने रविवार सुबह अपनी राजधानी प्योंगयांग से कम से कम दो बैलिस्टिक मिसाइलें दागीं, जो जापान सागर (जिसे कोरिया में पूर्वी सागर कहा जाता है) में गिरीं। यह 2026 का पहला ऐसा परीक्षण है, जो नवंबर 2025 के बाद का पहला मामला है। संयोग से, यह दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति ली जे-म्युंग की चार दिवसीय चीन यात्रा से ठीक पहले हुआ, जहां वे चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ कोरियाई प्रायद्वीप पर शांति की चर्चा करने वाले हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम अमेरिका के वेनेजुएला पर हालिया हमले के खिलाफ North Korea की चेतावनी का हिस्सा हो सकता है, जिसे किम जोंग-उन ने ‘साम्राज्यवादी आक्रमण’ बताया था।

North Korea की यह कार्रवाई क्षेत्रीय स्थिरता के लिए खतरा बन गई है। दक्षिण कोरिया के संयुक्त चीफ्स ऑफ स्टाफ (JSC) के अनुसार, मिसाइलें सुबह करीब 7:50 बजे स्थानीय समय पर लॉन्च की गईं, जो प्योंगयांग के पास से पूर्वी तट की ओर दागी गईं। जापान के रक्षा मंत्रालय ने भी दो मिसाइलों का पता लगाया, जो सुबह 7:54 और 8:05 बजे पश्चिमी तट से छोड़ी गईं। दोनों मिसाइलें जापान की विशेष आर्थिक क्षेत्र (EEZ) से बाहर समुद्र में गिरीं, जिससे कोई क्षति नहीं हुई। लेकिन जापानी रक्षा मंत्री शिंजिरो कोइजुमी ने इसे ‘क्षेत्रीय शांति के लिए गंभीर खतरा’ करार दिया।

यह लॉन्च North Korea की ‘नई साल की सलामी’ का हिस्सा लगता है, जो किम जोंग-उन के परमाणु कार्यक्रम को मजबूत करने का संकेत देता है। राज्य मीडिया केसीएनए ने इसे ‘रक्षात्मक परीक्षण’ बताया, लेकिन पृष्ठभूमि में अमेरिका के वेनेजुएला में निकोलस मादुरो को कैद करने का मामला है। किम ने ट्रंप को चेतावनी दी थी कि यदि वेनेजुएला पर हमला हुआ तो ‘जवाबी कार्रवाई’ होगी, क्योंकि उत्तर कोरिया और रूस वहां तेल हितों में साझेदार हैं। सीएनएन की रिपोर्ट के मुताबिक, यह परीक्षण संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रतिबंधों का उल्लंघन है, जो उत्तर कोरिया को बैलिस्टिक मिसाइल परीक्षण से रोकता है।

दक्षिण कोरियाई राष्ट्रपति की चीन यात्रा: शांति की उम्मीदों पर साया

North Korea के इस कदम ने दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति ली जे-म्युंग की बीजिंग यात्रा को और जटिल बना दिया है। ली, जो 2025 के चुनावों में राष्ट्रपति बने, आज (4 जनवरी) बीजिंग पहुंचे, जहां वे 7 जनवरी तक रहेंगे। यह 2019 के बाद किसी दक्षिण कोरियाई राष्ट्रपति का पहला ऐसा दौरा है। चीनी विदेश मंत्रालय के अनुसार, ली और शी की द्विपक्षीय बैठक कोरियाई प्रायद्वीप पर शांति को बढ़ावा देने पर केंद्रित होगी। ली उत्तर कोरिया से ‘फ्रे टाईज’ बहाल करने के लिए चीन की भूमिका की अपील करेंगे, खासकर ताइवान तनावों से बचते हुए।

ली के पूर्ववर्ती यून सुक-योल के कार्यकाल में सियोल ने वाशिंगटन और टोक्यो की ओर झुकाव दिखाया था, जिससे चीन के साथ संबंध खराब हुए। अब ली ‘चीन के साथ सहयोग’ पर जोर दे रहे हैं, लेकिन मिसाइल लॉन्च ने उनकी यात्रा को चुनौतीपूर्ण बना दिया। रॉयटर्स के अनुसार, ली ने बीजिंग पहुंचते ही कहा, “क्षेत्रीय शांति के लिए सभी पक्षों को संयम बरतना चाहिए।” चीनी राष्ट्रपति शी ने यात्रा का स्वागत किया, लेकिन उत्तर कोरिया पर कोई टिप्पणी नहीं की। विशेषज्ञों का कहना है कि चीन, जो North Korea का प्रमुख सहयोगी है, ली को ‘मध्यस्थ’ बनाने की कोशिश कर सकता है।

अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रियाएं: निंदा और सतर्कता

मिसाइल दागने पर जापान, दक्षिण कोरिया और अमेरिका ने तीखी निंदा की। जापान, अमेरिका और दक्षिण कोरिया के अधिकारियों ने फोन पर परामर्श किया, जहां संयुक्त राष्ट्र प्रस्तावों के उल्लंघन की पुष्टि हुई। दक्षिण कोरिया के राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद ने कहा, “यह उकसावा अंतरराष्ट्रीय शांति के लिए खतरा है।” अमेरिकी विदेश विभाग ने इसे ‘अविरल उकसावा’ बताया, जबकि जापानी प्रधानमंत्री ने ‘कड़ा विरोध’ जताया।

एक्स (पूर्व ट्विटर) पर प्रतिक्रियाएं तेज हैं। @World_At_War_6 ने वीडियो शेयर कर कहा, “North Korea ने बैलिस्टिक मिसाइल दागी, ली-शी शिखर सम्मेलन से ठीक पहले।” अन्य यूजर्स ने इसे वेनेजुएला घटना से जोड़ा, जहां रूस-उत्तर कोरिया के तेल हित प्रभावित हुए। चीन ने चुप्पी साधी, लेकिन ग्लोबल टाइम्स ने ‘क्षेत्रीय स्थिरता’ पर जोर दिया।

भविष्य की चुनौतियां: शांति या युद्ध का खतरा?

यह घटना पूर्वी एशिया की जटिल भू-राजनीति को उजागर करती है। उत्तर कोरिया के 70 से अधिक मिसाइल परीक्षण 2025 में हुए, जो परमाणु क्षमता बढ़ाने का संकेत हैं। ली की यात्रा से यदि चीन North Korea पर दबाव डाले, तो बातचीत की गुंजाइश है, लेकिन अमेरिका-चीन व्यापार युद्ध के बीच यह मुश्किल है। ब्लूमबर्ग के अनुसार, यह लॉन्च ली-शी शिखर को प्रभावित कर सकता है, जहां ताइवान और दक्षिण चीन सागर मुद्दे भी उठ सकते हैं।

विश्लेषकों का कहना है कि North Korea अमेरिकी ‘ट्रंप युग’ में दबाव महसूस कर रहा है, खासकर वेनेजुएला के बाद। यदि ली चीन से समर्थन हासिल करें, तो क्वाड (अमेरिका-जापान-भारत-ऑस्ट्रेलिया) गठबंधन मजबूत हो सकता है। लेकिन असफलता से प्रायद्वीप पर युद्ध का खतरा बढ़ेगा। भारत ने भी निंदा की, क्योंकि उत्तर कोरिया-पाकिस्तान मिसाइल सहयोग चिंता का विषय है।

संक्षेप में, North Korea का मिसाइल परीक्षण ली की चीन यात्रा पर साया बन गया है। क्या यह शांति वार्ता को बढ़ावा देगा या तनाव को नई ऊंचाई? दुनिया सतर्क नजर रख रही है।

Sources: Reuters, Al Jazeera, Bloomberg, CNN

By Mohd Abdush Shahid

Mohd Abdush Shahid is Founder and content creator at www.views24.in, specializing in news analysis, feature reporting, and in-depth storytelling. With a keen eye for detail and a passion for uncovering impactful narratives, Mohd Abdush Shahid delivers trusted, engaging content that keeps readers informed and inspired.

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