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19 दिसंबर 2025, Thakurganj: बिहार के किशनगंज जिले के Thakurganj नगर पंचायत में लंबे समय से चली आ रही ट्रैफिक जाम की समस्या को अब सख्त कदमों से दूर करने की कवायद तेज हो गई है। मुख्य बाजार और हाट क्षेत्र में भारी वाहनों की मनमानी आवाजाही से परेशान स्थानीय निवासियों की सुनवाई करते हुए नगर पंचायत ने भारी मालवाहक वाहनों पर नो-इंट्री व्यवस्था को सख्ती से लागू करने का फैसला लिया है। पुलिस अधीक्षक (एसपी) ने स्थानीय थानों को सक्रिय सहयोग देने का स्पष्ट निर्देश जारी किया है, जिससे उम्मीद जगी है कि व्यावसायिक हृदय स्थल अब जाम मुक्त हो सकेगा। यह कदम न केवल यातायात को सुगम बनाएगा, बल्कि दुर्घटनाओं को कम करने और व्यापार को बढ़ावा देने में भी महत्वपूर्ण साबित होगा। लेकिन सवाल यह है कि क्या यह व्यवस्था कागजों से आगे निकल पाएगी, या फिर पुरानी कहानी दोहराई जाएगी?

ट्रैफिक जाम का काला अध्याय: ठाकुरगंज की दर्दभरी सच्चाई

Thakurganj, किशनगंज जिले का एक प्रमुख व्यावसायिक केंद्र, जहां सिलिगुड़ी और अन्य पूर्वोत्तर राज्यों से जुड़ाव के कारण रोजाना सैकड़ों भारी वाहन दौड़ते हैं। लेकिन इन वाहनों की बेलगाम दौड़ ने शहर को जाम का अड्डा बना दिया है। विशेष रूप से शुक्रवार को हाट बाजार के दिन स्थिति और भी भयावह हो जाती है। मुख्य बाजार से होते हुए डंपर, ट्रक और अन्य मालवाहक वाहन घंटों तक फंसे रहते हैं, जिससे पैदल यात्री से लेकर छोटे वाहनों तक सब परेशान हो जाते हैं। हाल के एक वीडियो में दिखा कि बाजार में दिन के उजाले में ही बड़े वाहन घुस आते हैं, और लोग घंटों जाम में कैद रह जाते हैं।

स्थानीय निवासी रामेश्वर सिंह बताते हैं, “हर शुक्रवार को बाजार जाना मुश्किल हो जाता है। ट्रक सड़क कब्जा लेते हैं, एम्बुलेंस तक नहीं गुजर पाती। बच्चे स्कूल लेट पहुंचते हैं, और व्यापारियों का नुकसान तो अरबों में है।” आंकड़ों की बात करें तो ठाकुरगंज में पिछले एक वर्ष में ट्रैफिक जाम से जुड़ी 150 से अधिक शिकायतें दर्ज हुई हैं, जिनमें 20 दुर्घटनाएं भी शामिल हैं। सिलिगुड़ी-गोरखपुर एक्सप्रेसवे के एलाइनमेंट बदलाव से कुछ राहत मिली है, लेकिन शहर के आंतरिक मार्गों पर दबाव कम नहीं हुआ। विशेषज्ञों का मानना है कि बढ़ती शहरीकरण और बिना नियोजन के वाहन पार्किंग की कमी मुख्य कारण हैं।

इस समस्या ने न केवल दैनिक जीवन को प्रभावित किया है, बल्कि आर्थिक हानि भी पहुंचाई है। Thakurganj का बाजार, जो कपड़ा, अनाज और सब्जी व्यापार का केंद्र है, जाम के कारण ग्राहक खो रहा है। एक सर्वे के अनुसार, जाम से प्रतिदिन 2-3 घंटे का समय बर्बाद होता है, जिसका आर्थिक नुकसान 50 लाख रुपये प्रतिदिन से अधिक है।

नई व्यवस्था का खाका: समयबद्ध प्रतिबंध और सख्त प्रवर्तन

Thakurganj नगर पंचायत की बैठक में लिए गए फैसले के तहत भारी वाहनों (10 टन से अधिक क्षमता वाले ट्रक, डंपर आदि) पर स्पष्ट प्रतिबंध लगाया गया है। सोमवार और शुक्रवार को सुबह 9 बजे से शाम 7 बजे तक पूर्ण नो-इंट्री रहेगी, जबकि अन्य दिनों में दोपहर 1 बजे से 3 बजे तक केवल दो घंटे की छूट दी जाएगी। यह नियम बाजार क्षेत्र, हाट रोड और मुख्य सड़कों पर लागू होगा। उल्लंघन करने वाले वाहनों पर 5,000 रुपये का जुर्माना और वाहन जब्ती का प्रावधान है।

नगर पंचायत अध्यक्ष मोहम्मद नईम ने कहा, “हमने कई बार चेतावनी दी थी, लेकिन अब सख्ती बरतेंगे। वैकल्पिक मार्ग जैसे बाईपास रोड का उपयोग अनिवार्य होगा।” एसपी उमेश कुमार ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में स्पष्ट किया, “ट्रैफिक पुलिस को 24×7 निगरानी के निर्देश दिए हैं। चेकपोस्ट सशक्त होंगे, और ड्रोन सर्विलांस भी शुरू होगा। हमारा लक्ष्य शून्य जाम है।” यह निर्देश 18 दिसंबर को जारी हुआ, और पहला चेकपोस्ट आज से सक्रिय हो गया।

इसके अलावा, नगर पंचायत ने पार्किंग जोन विकसित करने की योजना बनाई है। बाजार के बाहरी हिस्से में 500 वाहनों की क्षमता वाला पार्किंग लॉट बनेगा, जिसके लिए 2 करोड़ रुपये का बजट आवंटित किया गया है। साइनबोर्ड लगाने और जागरूकता अभियान भी चलाया जाएगा। विधायक हजारी प्रसाद साह ने भी मांग की थी कि इस नियम को कड़ाई से लागू किया जाए, अन्यथा स्थानीय स्तर पर विरोध होगा।

स्थानीय प्रतिक्रियाएं: राहत की सांस या संदेह की नजर?

नई व्यवस्था से स्थानीय व्यापारियों और निवासियों में उत्साह है। बाजार संघ के अध्यक्ष अजय कुमार ने कहा, “अब ग्राहक समय पर पहुंचेंगे, बिक्री बढ़ेगी। जाम से हमारा 30 प्रतिशत कारोबार प्रभावित था।” महिलाएं और बुजुर्ग, जो पैदल चलने में असुविधा महसूस करते थे, अब सुरक्षित महसूस कर रहे हैं। एक स्कूल शिक्षिका ने बताया, “बच्चों को स्कूल ड्रॉप करने में अब घंटा लगेगा, पहले दो घंटे।”

लेकिन सभी खुश नहीं हैं। ट्रक चालक संघ ने विरोध जताया है। संघ अध्यक्ष राकेश यादव बोले, “यह नियम हमारे रोजगार पर असर डालेगा। वैकल्पिक मार्ग संकुचित हैं, क्या वहां सुविधा होगी?” कुछ चालकों ने कहा कि बिना पूर्व सूचना के यह फैसला एकतरफा है। फिर भी, अधिकांश सहमत हैं कि जाम से निजात जरूरी है। सोशल मीडिया पर #ThakurganjNoJam ट्रेंड कर रहा है, जहां लोग अपनी पुरानी जाम की तस्वीरें शेयर कर रहे हैं।

व्यापक संदर्भ: किशनगंज में ट्रैफिक का बढ़ता संकट

Thakurganj की समस्या किशनगंज जिले की व्यापक तस्वीर का हिस्सा है। जिले में एनएच-31 और सिलिगुड़ी कनेक्टिविटी के कारण भारी यातायात है, लेकिन इंफ्रास्ट्रक्चर पिछड़ा है। हाल ही में पूजा-छठ जैसे त्योहारों पर बड़े वाहनों पर बैन लगाया गया था, जो सफल रहा। बहादुरगंज और अन्य क्षेत्रों में भी इसी मॉडल को अपनाया जा रहा है। बिहार सरकार की ‘स्मार्ट सिटी’ योजना के तहत किशनगंज को 100 करोड़ का ग्रांट मिला है, जिसमें ट्रैफिक मैनेजमेंट शामिल है।

राष्ट्रीय स्तर पर देखें तो मोटर व्हीकल एक्ट 2019 के तहत ऐसे प्रतिबंध आम हैं। उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल में भी बाजार क्षेत्रों में नो-हेवी व्हीकल जोन बने हैं। लेकिन सफलता का राज प्रवर्तन में है। किशनगंज में पिछले साल 500 ट्रैफिक उल्लंघनों पर कार्रवाई हुई, लेकिन जाम शिकायतें 40 प्रतिशत बढ़ीं। विशेषज्ञ सुझाव देते हैं कि आईआईटी पटना के साथ मिलकर ट्रैफिक मॉडल विकसित किया जाए।

नीचे दी गई तालिका में Thakurganj ट्रैफिक नियमों की मुख्य विशेषताएं दी गई हैं:

नियम का प्रकारसमयावधिजुर्माना/कार्रवाई
भारी वाहन नो-इंट्री (सो/शु)सुबह 9 बजे से शाम 7 बजे तक₹5,000 + वाहन जब्ती
अन्य दिनों की छूटदोपहर 1 से 3 बजे तकचेतावनी, दोबारा ₹10,000
पार्किंग उल्लंघनपूरे बाजार क्षेत्र में प्रतिबंध₹500 + टोइंग
ओवरलोडिंगसभी सड़कों पर₹2,000 + लाइसेंस सस्पेंड

चुनौतियां और समाधान की राह: क्या बनेगा मॉडल?

नई व्यवस्था की सफलता कई चुनौतियों पर निर्भर है। संकुचित बाईपास रोड पर दबाव बढ़ सकता है, जिसके लिए चौड़ीकरण जरूरी है। ट्रक चालकों के लिए रेस्ट एरिया और ई-चालान सिस्टम मजबूत करने की मांग है। नगर पंचायत ने 20 दिसंबर से जागरूकता रैली का ऐलान किया है। एसपी ने कहा, “हम लोक अदालतों के जरिए पुराने चालान निपटाएंगे, ताकि सहयोग बढ़े।”

यदि यह मॉडल सफल हुआ, तो ठाकुरगंज अन्य छोटे शहरों के लिए उदाहरण बनेगा। पर्यावरणीय लाभ भी होगा- कम वाहन से प्रदूषण 15 प्रतिशत घटेगा। लेकिन असफलता का डर है, यदि प्रवर्तन ढीला पड़ा। स्थानीय पत्रकारों का मानना है कि जनभागीदारी जरूरी है।

निष्कर्ष: जाम मुक्त ठाकुरगंज का सपना साकार हो

Thakurganj में भारी वाहनों पर नो-इंट्री एक सकारात्मक कदम है, जो एसपी के सहयोग से मजबूत बनेगा। जाम की मार से त्रस्त शहर अब राहत की सांस ले सकता है। लेकिन यह केवल शुरुआत है- इंफ्रास्ट्रक्चर, जागरूकता और सख्ती का संतुलन जरूरी। ठाकुरगंजवासी उम्मीद कर रहे हैं कि यह बदलाव स्थायी हो, और उनका बाजार फिर से जीवंत हो उठे। सरकार को अब अमल पर नजर रखनी चाहिए, ताकि वादे हकीकत बनें।

By SHAHID

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