No-confidence motion against Om BirlaNo-confidence motion against Om Birla

10 फरवरी 2026, Om Birla के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव: लोकसभा स्पीकर ओम बिरला के खिलाफ विपक्ष द्वारा लाया गया अविश्वास प्रस्ताव संसद के बजट सत्र में बड़ा राजनीतिक संकट बन गया है। कांग्रेस के नेतृत्व में जमा किए गए इस प्रस्ताव को तृणमूल कांग्रेस (TMC) के समर्थन न मिलने से विपक्षी एकता पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। प्रस्ताव में 118 सांसदों के हस्ताक्षर हैं, लेकिन TMC का अलग रुख इसकी ताकत को कमजोर कर रहा है।

संसदीय गतिरोध की पृष्ठभूमि

बजट सत्र में लगातार हंगामा

बजट सत्र 2026 की शुरुआत से ही लोकसभा में विपक्ष और सत्तापक्ष के बीच तीखा टकराव देखने को मिल रहा है। राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव की चर्चा के दौरान विपक्ष विभिन्न राष्ट्रीय मुद्दों पर बहस की मांग कर रहा है। विपक्षी नेताओं का आरोप है कि स्पीकर ओम बिरला पक्षपातपूर्ण रवैया अपना रहे हैं। वे विपक्षी सदस्यों को बोलने का पर्याप्त अवसर नहीं दे रहे और सदन की कार्यवाही बार-बार स्थगित कर रहे हैं।

इस गतिरोध के कारण कई दिन सदन की कार्यवाही बाधित रही। विपक्षी सांसद प्लेकार्ड्स लेकर वेल में उतर आए, नारे लगाए और स्पीकर के आसन के सामने प्रदर्शन किया। राहुल गांधी सहित कई प्रमुख विपक्षी नेताओं को बोलने से रोके जाने की घटनाएं सामने आईं, जिससे आक्रोश और बढ़ गया।

अविश्वास प्रस्ताव दाखिल

नियमों के तहत जमा नोटिस

कांग्रेस सांसदों के. सुरेश और गौरव गोगोई ने दोपहर में लोकसभा महासचिव को अविश्वास प्रस्ताव का नोटिस सौंपा। नियम 94सी के तहत यह प्रस्ताव जमा किया गया। इसमें कांग्रेस, समाजवादी पार्टी (सपा), डीएमके और अन्य विपक्षी दलों के सांसदों के हस्ताक्षर शामिल हैं।

विपक्ष का मुख्य आरोप है कि स्पीकर सरकार के इशारे पर काम कर रहे हैं और संसदीय लोकतंत्र की गरिमा को ठेस पहुंचा रहे हैं। राहुल गांधी ने स्पीकर से व्यक्तिगत मुलाकात कर गतिरोध खत्म करने की कोशिश की, लेकिन कोई समाधान नहीं निकला।

TMC का अलग रुख और कांग्रेस को झटका

अभिषेक बनर्जी का बयान

सबसे बड़ा झटका तृणमूल कांग्रेस की ओर से आया। TMC ने प्रस्ताव पर हस्ताक्षर करने से स्पष्ट इनकार कर दिया। पार्टी के महासचिव अभिषेक बनर्जी ने मीडिया से कहा कि अविश्वास प्रस्ताव जैसा “ब्रह्मास्त्र” आखिरी विकल्प के लिए होता है। पहले स्पीकर को पत्र लिखकर मांगें रखी जाएं, एकजुट होकर अन्य रास्ते अपनाए जाएं, उसके बाद ही इतना बड़ा कदम उठाना चाहिए।

TMC के 29 सांसदों का समर्थन न मिलने से INDIA गठबंधन में दरार स्पष्ट हो गई है। कांग्रेस सूत्रों का कहना है कि पर्याप्त हस्ताक्षर होने से प्रस्ताव वैध है और 14 दिन की नोटिस पीरियड के बाद यह चर्चा के लिए आएगा।

राजनीतिक प्रभाव और विश्लेषण

INDIA गठबंधन पर संकट

राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, TMC का यह रुख ममता बनर्जी की रणनीति का हिस्सा है। पश्चिम बंगाल में कांग्रेस से दूरी बनाए रखने वाली TMC राष्ट्रीय स्तर पर भी स्वतंत्र छवि बनाना चाहती है। यह घटना 2024 लोकसभा चुनाव के बाद से चले आ रहे गठबंधन के मतभेदों को फिर उजागर करती है।

दूसरी ओर, भाजपा ने इसे विपक्ष की हताशा करार दिया है। सत्ताधारी दल का कहना है कि विपक्ष सदन चलने नहीं देना चाहता और बहस से भाग रहा है। स्पीकर ओम बिरला पूरी तरह निष्पक्ष हैं।

आगे की राह

यह अविश्वास प्रस्ताव भारतीय संसदीय इतिहास में दुर्लभ है। पिछले कई दशकों में स्पीकर के खिलाफ ऐसा कदम बहुत कम उठाया गया। बजट सत्र का पहला चरण 13 फरवरी को समाप्त हो रहा है, ऐसे में मार्च में शुरू होने वाले दूसरे चरण में इस पर चर्चा संभव है।

कुल मिलाकर, यह घटनाक्रम संसद में नई राजनीतिक लड़ाई की शुरुआत है। विपक्षी एकता की परीक्षा जारी है और आने वाले दिन बताएंगे कि प्रस्ताव सदन तक पहुंच पाता है या गतिरोध और गहराता है।

Sources: डेक्कन हेराल्ड

By Mohd Abdush Shahid

Mohd Abdush Shahid is Founder and content creator at www.views24.in, specializing in news analysis, feature reporting, and in-depth storytelling. With a keen eye for detail and a passion for uncovering impactful narratives, Mohd Abdush Shahid delivers trusted, engaging content that keeps readers informed and inspired.

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