8 जनवरी 2026, नेशनल मेडिकल कमिशन (NMC) ने वैष्णो देवी मेडिकल इंस्टीट्यूट से MBBS कोर्स की परमिशन वापस ली: नेशनल मेडिकल कमिशन (NMC) ने हाल ही में जम्मू-कश्मीर के रियासी जिले में स्थित श्री माता वैष्णो देवी इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल एक्सीलेंस (SMVDIME) से एमबीबीएस कोर्स चलाने की अनुमति वापस ले ली है। यह फैसला 6 जनवरी 2026 को लिया गया, जो कि कॉलेज में प्रवेशित छात्रों के धार्मिक पृष्ठभूमि को लेकर उठे विवाद के ठीक बाद आया। इस घटना ने एनएमसी की प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं, क्योंकि अनुमति की वापसी को कुछ लोग राजनीतिक दबाव का नतीजा मान रहे हैं, जबकि एनएमसी ने इसे सरप्राइज इंस्पेक्शन में पाई गई कमियों पर आधारित बताया है। इस रिपोर्ट में हम इस पूरे मामले की जांच करेंगे, जिसमें कॉलेज का बैकग्राउंड, विवाद, एनएमसी का फैसला और इससे उठे सवाल शामिल हैं।
इंस्टीट्यूट का बैकग्राउंड
श्री माता वैष्णो देवी इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल एक्सीलेंस कटरा के पास काक्रयाल में स्थित है और यह श्री माता वैष्णो देवी श्राइन बोर्ड (SMVDSB) द्वारा संचालित है। यह बोर्ड प्रसिद्ध वैष्णो देवी मंदिर के प्रबंधन के लिए जाना जाता है और कॉलेज का फंडिंग मुख्य रूप से मंदिर के दान से आता है।
स्थापना और फंडिंग
कॉलेज की स्थापना 2025 में हुई थी, जिसका उद्देश्य जम्मू-कश्मीर क्षेत्र में मेडिकल शिक्षा को बढ़ावा देना था। एसएमवीडीएसबी, जो एक सरकारी संस्था है, ने इस इंस्टीट्यूट को हिंदू धार्मिक भावनाओं से जोड़कर विकसित किया। फंडिंग का मुख्य स्रोत मंदिर के चढ़ावे हैं, जो करोड़ों रुपये में हैं। कॉलेज को 50 एमबीबीएस सीटों के लिए सितंबर 2025 में एनएमसी से सशर्त अनुमति मिली थी। हालांकि, इसकी स्थापना से ही कुछ विवाद रहे हैं, क्योंकि यह एक धार्मिक बोर्ड द्वारा संचालित है, जो सेकुलर शिक्षा के सिद्धांतों से टकरा सकता है।
प्रारंभिक अनुमति और विकास
एनएमसी ने सितंबर 2025 में लेटर ऑफ परमिशन (LOP) जारी किया, जिसके तहत कॉलेज ने 2025-26 सेशन के लिए 50 छात्रों को प्रवेश दिया। प्रवेश नीट रैंकिंग के आधार पर हुए, जो राष्ट्रीय स्तर पर मान्य हैं। कॉलेज का इंफ्रास्ट्रक्चर आधुनिक होने का दावा किया गया, लेकिन बाद में इंस्पेक्शन में कमियां पाई गईं। इस चरण में कोई बड़ा विवाद नहीं था, लेकिन प्रवेश के बाद धार्मिक आधार पर विरोध शुरू हो गया।
विवाद की शुरुआत
कॉलेज में प्रवेशित छात्रों की सूची जारी होने के बाद विवाद भड़क उठा। 50 छात्रों में से 47 मुस्लिम, एक सिख और केवल दो हिंदू थे। इससे कुछ हिंदू संगठनों ने विरोध जताया, दावा करते हुए कि कॉलेज हिंदू दान से चलता है, इसलिए गैर-हिंदू छात्रों का प्रवेश अनुचित है।
हिंदू संगठनों के विरोध प्रदर्शन
6 जनवरी 2026 को SMVD संघर्ष समिति, जो भाजपा और अन्य हिंदू संगठनों से समर्थित है, ने जम्मू में सिविल सेक्रेटेरिएट के बाहर प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों का तर्क था कि गैर-हिंदू छात्रों के खान-पान और पूजा-पद्धति से हिंदू भावनाएं आहत होंगी, जिससे क्षेत्र में शांति भंग हो सकती है। समिति के संयोजक कर्नल सुखवीर सिंह मनकोटिया ने बड़े प्रदर्शनों की चेतावनी दी। यह विरोध भाजपा सांसद सत शर्मा द्वारा भी समर्थित था, जिन्होंने एनएमसी के फैसले की घोषणा की।
प्रवेश की डेमोग्राफी
प्रवेश नीट स्कोर पर आधारित थे, लेकिन जम्मू-कश्मीर में आरक्षण व्यवस्था के कारण अधिकांश सीटें मुस्लिम छात्रों को मिलीं। विरोधकर्ताओं ने इसे ‘सनातनीयों के साथ भेदभाव’ बताया, जबकि समर्थकों ने इसे मेरिट-बेस्ड बताया। इसने शिक्षा में धर्म के हस्तक्षेप पर बहस छेड़ दी।
एनएमसी का फैसला
विवाद के ठीक बाद NMC ने अनुमति वापस ले ली। मेडिकल असेसमेंट एंड रेटिंग बोर्ड (एमएआरबी) ने सरप्राइज इंस्पेक्शन का हवाला दिया।
उद्धृत कारण
NMC के आदेश में फैकल्टी की कमी, इंफ्रास्ट्रक्चर में कमियां और न्यूनतम मानकों का उल्लंघन बताया गया। इंस्पेक्शन में ‘गंभीर गैर-अनुपालन’ पाया गया। कॉलेज को अगले साल के लिए दोबारा आवेदन करने की सलाह दी गई है।
छात्रों पर प्रभाव
50 छात्रों को अन्य सरकारी मेडिकल कॉलेजों में सुपरन्यूमररी सीटों पर शिफ्ट किया जाएगा, उनके घर के पास। कॉलेज ने फीस रिफंड की प्रक्रिया शुरू कर दी है। जेके बोपीईई को यह जिम्मेदारी सौंपी गई है। छात्रों के लिए यह एक बड़ा झटका है, लेकिन NMC ने उनके भविष्य को सुरक्षित रखने का प्रयास किया है।
एनएमसी प्रक्रिया पर उठे सवाल
NMC का फैसला विवाद के तुरंत बाद आया, जिससे इसकी निष्पक्षता पर सवाल उठे हैं। क्या यह वास्तविक कमियों पर आधारित है या राजनीतिक दबाव का नतीजा?
समयबद्धता और संभावित प्रभाव
प्रोटेस्ट 6 जनवरी को हुआ और उसी दिन फैसला आया। कुछ आलोचकों का मानना है कि भाजपा-समर्थित विरोध ने एनएमसी को प्रभावित किया। क्या सरप्राइज इंस्पेक्शन पहले से प्लान था या विवाद के बाद? यह पारदर्शिता की कमी दर्शाता है।
पारदर्शिता संबंधी चिंताएं
NMC की प्रक्रिया में इंस्पेक्शन रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं की गई, जिससे संदेह बढ़ा। क्या अनुमति देने से पहले कमियां नहीं देखी गईं? यह मेडिकल शिक्षा की गुणवत्ता पर सवाल उठाता है और क्या धार्मिक राजनीति शिक्षा को प्रभावित कर रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि एनएमसी को राजनीतिक हस्तक्षेप से मुक्त रहना चाहिए।
व्यापक प्रभाव
यह घटना जम्मू-कश्मीर में शिक्षा और धर्म के मिश्रण को उजागर करती है। इससे अन्य धार्मिक फंडेड इंस्टीट्यूट्स पर असर पड़ सकता है। छात्रों की सुरक्षा सुनिश्चित हुई, लेकिन यह सेकुलरिज्म पर हमला माना जा रहा है। क्षेत्र में आरक्षण व्यवस्था पर भी बहस बढ़ी है। भविष्य में एनएमसी को अधिक पारदर्शी बनाना होगा ताकि ऐसे सवाल न उठें।
निष्कर्ष
NMC द्वारा वैष्णो देवी मेडिकल इंस्टीट्यूट से MBBS अनुमति की वापसी एक जटिल मामला है, जिसमें गुणवत्ता, धर्म और राजनीति घुलमिल गए हैं। जबकि एनएमसी ने कमियों का हवाला दिया, विवाद की समयबद्धता ने इसकी प्रक्रिया पर सवाल खड़े कर दिए। यह घटना मेडिकल शिक्षा में निष्पक्षता की जरूरत को रेखांकित करती है। कॉलेज को कमियां दूर कर दोबारा आवेदन करने का मौका है, लेकिन छात्रों और समाज के लिए यह एक सबक है कि शिक्षा को धर्म से अलग रखना चाहिए।
Sources: एनडीटीवी, द टेलीग्राफ