Nitish Kumar's Rajya Sabha journeyNitish Kumar's Rajya Sabha journey

5 मार्च 2026, Nitish Kumar का राज्यसभा सफर: को बिहार की राजनीति में एक ऐतिहासिक मोड़ आया है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने सोशल मीडिया पर स्पष्ट किया कि उनका “दिल राज्यसभा में है”। उन्होंने पिछले दो दशकों से अधिक समय से राज्य की सेवा के बाद अब संसद के उच्च सदन में जाने की अपनी लंबे समय से चली आ रही इच्छा को पूरा करने का फैसला किया है। आज पटना में उन्होंने राज्यसभा चुनाव के लिए नामांकन पत्र दाखिल किया, जहां केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, बीजेपी के प्रमुख नेता और JD(U) के कार्यकर्ता मौजूद थे। यह कदम पिछले 20+ वर्षों में बिहार की राजनीति का सबसे बड़ा टर्निंग पॉइंट माना जा रहा है, क्योंकि इससे न केवल मुख्यमंत्री पद में बदलाव होगा, बल्कि NDA गठबंधन की संरचना और राज्य की सत्ता समीकरण भी प्रभावित होंगे।

नीतीश कुमार का राजनीतिक सफर: सुशासन से राज्यसभा तक

नीतीश कुमार का राजनीतिक जीवन 1970 के दशक से शुरू हुआ, जब वे जनता पार्टी से जुड़े। 1989 में पहली बार लोकसभा पहुंचे, फिर विधानसभा, विधान परिषद और मुख्यमंत्री पद पर कई बार। कुल 10 बार मुख्यमंत्री बने, जो बिहार के इतिहास में रिकॉर्ड है। 2005 से लगातार (कुछ छोटे अंतरालों के साथ) उन्होंने “सुशासन” का मॉडल पेश किया। सड़कें, बिजली, शिक्षा, कानून-व्यवस्था में सुधार और जंगलराज का अंत उनकी उपलब्धियां रहीं। राजनीतिक उलटफेर भी उनका हिस्सा रहे—LJP से NDA, महागठबंधन और फिर NDA में वापसी। अब 75 वर्ष की उम्र में वे केंद्र की राजनीति में कदम रख रहे हैं।

नीतीश ने सोशल मीडिया पोस्ट में लिखा कि वे पिछले 20+ वर्षों से राज्यसभा जाना चाहते थे। उनका लक्ष्य संसद और विधानमंडल के सभी चार सदनों (लोकसभा, राज्यसभा, विधानसभा, विधान परिषद) का सदस्य बनना था। उन्होंने कहा, “बिहार के विकास के संकल्प पर कायम रहूंगा और नई सरकार को पूरा मार्गदर्शन दूंगा।” नामांकन के दौरान अमित शाह की मौजूदगी से साफ है कि यह फैसला NDA स्तर पर लिया गया, जो गठबंधन की मजबूती दिखाता है।

राज्यसभा नामांकन और तत्काल प्रभाव

आज सुबह 11:30 बजे बिहार विधानसभा में नीतीश कुमार ने नामांकन दाखिल किया। राज्यसभा चुनाव 16 मार्च को होने हैं, और नामांकन की अंतिम तिथि के करीब यह कदम उठाया गया। अमित शाह ने नीतीश की तारीफ की, कहा कि उन्होंने बिहार को जंगलराज से मुक्त किया और विकास की नींव रखी। नीतीश ने इस्तीफा देने की प्रक्रिया शुरू कर दी है, हालांकि वे चुनाव तक CM बने रह सकते हैं।

इस फैसले से बिहार में पहली बार बीजेपी का मुख्यमंत्री बनेगा। 2025 विधानसभा चुनाव में NDA की बड़ी जीत के बाद भी JD(U) के पास CM पद था, लेकिन अब बीजेपी प्रमुख भूमिका में आ रही है।

अगले मुख्यमंत्री की दौड़: प्रमुख दावेदार

नीतीश के जाने के बाद नए CM के नाम पर चर्चा तेज है। प्रमुख नाम इस प्रकार हैं:

बीजेपी से संभावित CM

  • सम्राट चौधरी (वर्तमान डिप्टी CM): OBC बैकग्राउंड, संगठन में मजबूत पकड़, सबसे आगे।
  • नित्यानंद राय: केंद्रीय मंत्री, मजबूत दावेदार।
  • विजय सिन्हा या अन्य वरिष्ठ नेता।

कुछ रिपोर्ट्स में महिला CM की संभावना भी जताई गई है, लेकिन अभी स्पष्ट नहीं।

JD(U) की भूमिका

  • नीतीश के बेटे निशांत कुमार को डिप्टी CM बनाने की अफवाहें तेज हैं, जो पार्टी की कमान संभाल सकते हैं।
  • JD(U) से 2 डिप्टी CM बनाने का फॉर्मूला चर्चा में है, ताकि संतुलन बना रहे।

JD(U) में असंतोष और विरोध

यह फैसला JD(U) कार्यकर्ताओं को रास नहीं आया। पटना में CM आवास के बाहर कई कार्यकर्ता रो-रोकर विरोध कर रहे हैं। उन्हें लगता है कि “सुशासन बाबू” का दौर खत्म हो रहा है। पार्टी में भावुक माहौल है, कई नेता इसे धोखा मान रहे हैं। हालांकि उच्च स्तर पर यह NDA की रणनीति का हिस्सा है—नीतीश को केंद्र में मजबूत भूमिका देकर बिहार में बीजेपी को आगे बढ़ाना।

विपक्ष की प्रतिक्रिया

तेजस्वी यादव (RJD) ने तीखा हमला बोला: “BJP ने नीतीश को पूरी तरह हाईजैक कर लिया है।” महागठबंधन इसे NDA में बड़े बदलाव का संकेत मान रहा है। Lalu-Nitish युग का अंत माना जा रहा है, क्योंकि दोनों ही अब सक्रिय राज्य राजनीति से दूर हो रहे हैं। RJD सांसद मनोज झा ने इसे “एक राजनीतिक अध्याय का अवसान” कहा।

भविष्य के प्रभाव: जातीय समीकरण और 2029 चुनाव

नीतीश के जाने से बिहार के जातीय गठजोड़ प्रभावित होंगे। EBC, दलित, मुस्लिम वोट बैंक उनके इर्द-गिर्द बने थे। नया नेतृत्व इन समीकरणों को कैसे संभालेगा, यह चुनौती है। 2029 लोकसभा चुनाव से पहले यह फैसला NDA को मजबूत कर सकता है, लेकिन JD(U) की स्थिति कमजोर हो सकती है अगर नया चेहरा मजबूत नहीं उभरा।

इतिहास में दर्ज दिन

नीतीश कुमार का राज्यसभा जाना सिर्फ व्यक्तिगत फैसला नहीं, बल्कि बिहार की राजनीति का सबसे बड़ा टर्निंग पॉइंट है। पिछले 20+ सालों में राज्य ने विकास की राह पाई, लेकिन राजनीतिक स्थिरता अस्थिर रही। अब नया दौर शुरू हो रहा है—बीजेपी के नेतृत्व में, JD(U) के समर्थन से। क्या नया CM बिहार को नई ऊंचाइयों पर ले जाएगा? समय बताएगा, लेकिन आज का दिन इतिहास में दर्ज हो चुका है।

Sources: abpलाइव

By Mohd Abdush Shahid

Mohd Abdush Shahid is Founder and content creator at www.views24.in, specializing in news analysis, feature reporting, and in-depth storytelling. With a keen eye for detail and a passion for uncovering impactful narratives, Mohd Abdush Shahid delivers trusted, engaging content that keeps readers informed and inspired.

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