Nitish KumarNitish Kumar

24 फरवरी 2026, Nitish Kumar का वार्ड सदस्यों के लिए बड़ा ऐलान: बिहार में पंचायती राज व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने एक बड़ा ऐलान किया है। राज्य सरकार ग्राम पंचायतों के वार्ड सदस्यों को सालाना 2 लाख रुपये का विकास फंड उपलब्ध कराने की तैयारी में है। यह राशि सीधे वार्ड सदस्यों के खाते में जाएगी, जिससे वे अपने वार्ड में छोटी-मोटी लेकिन जरूरी विकास योजनाओं को स्वतंत्र रूप से लागू कर सकें। इस घोषणा को पंचायत स्तर पर विकेंद्रीकरण और स्थानीय शासन को सशक्त बनाने की महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है।

पृष्ठभूमि और घोषणा का संदर्भ

बिहार में वर्तमान में ग्राम पंचायतों की संरचना में मुखिया (सरपंच) मुख्य भूमिका निभाते हैं, जबकि वार्ड सदस्यों की भूमिका सीमित रहती है। अक्सर विकास कार्यों में वार्ड सदस्यों को मुखिया के पीछे-पीछे भागना पड़ता है, जिससे कई वार्डों में असमान विकास होता है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने इस समस्या को पहचाना और वार्ड स्तर पर प्रत्यक्ष शक्ति देने का फैसला लिया।

ग्रामीण विकास मंत्री श्रवण कुमार ने विधान परिषद में इस संबंध में जानकारी दी कि सरकार वार्ड सदस्यों को मनरेगा (महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम) और अन्य कोषों के तहत योजनाओं के चयन तथा राशि खर्च करने का अधिकार देने पर विचार कर रही है। इस प्रस्ताव को जल्द ही केंद्र सरकार को भेजा जाएगा। केंद्र से स्वीकृति मिलने के बाद ही राशि जारी की जाएगी। यह कदम 73वें संविधान संशोधन (पंचायती राज) की भावना के अनुरूप है, जो स्थानीय स्तर पर निर्णय लेने की शक्ति का प्रावधान करता है।

फंड का उद्देश्य और उपयोग

यह 2 लाख रुपये का वार्षिक फंड विशेष रूप से स्थानीय विकास योजनाओं के लिए होगा। वार्ड सदस्य इसे निम्नलिखित क्षेत्रों में खर्च कर सकेंगे:

  • सड़क, गली-नाली की मरम्मत और छोटे पुल-पुलिया निर्माण
  • पेयजल सुविधाओं में सुधार, जैसे हैंडपंप, ट्यूबवेल या जल संरक्षण
  • स्वच्छता अभियान, शौचालय निर्माण या कचरा प्रबंधन
  • स्कूल, आंगनबाड़ी केंद्र या सामुदायिक भवनों की छोटी मरम्मत
  • स्ट्रीट लाइट, पार्क या खेल मैदान जैसी बुनियादी सुविधाएं
  • महिलाओं, बच्चों या वृद्धों के लिए स्थानीय स्तर की योजनाएं

फंड का उपयोग पारदर्शी तरीके से होगा। सरकार ने संकेत दिया है कि खर्च पर उचित लेखा-जोखा और ऑडिट की व्यवस्था होगी, ताकि दुरुपयोग न हो। यह फंड वार्ड सदस्यों को मुखिया पर निर्भर होने से मुक्त करेगा और प्रत्येक वार्ड में समान विकास सुनिश्चित करेगा।

बिहार में पंचायती राज की वर्तमान स्थिति

बिहार में लगभग 8,000 से अधिक ग्राम पंचायतें हैं, जिनमें हर पंचायत में औसतन 10-15 वार्ड होते हैं। इससे अनुमान लगाया जा सकता है कि राज्य में 1 लाख से अधिक वार्ड सदस्य हैं। यदि यह योजना लागू होती है, तो कुल 200 करोड़ रुपये से अधिक का वार्षिक फंड पंचायत स्तर पर जाएगा, जो ग्रामीण विकास में बड़ा योगदान देगा।

पिछले वर्षों में नीतीश सरकार ने पंचायती राज को मजबूत करने के कई कदम उठाए हैं, जैसे पंचायत चुनावों में महिलाओं के लिए 50% आरक्षण, मानदेय में वृद्धि और डिजिटल प्लेटफॉर्म पर योजनाओं की निगरानी। यह नया फंड इन प्रयासों की अगली कड़ी है। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे ग्रामीण क्षेत्रों में “बॉटम-अप” दृष्टिकोण मजबूत होगा, जहां नीचे से सुझाव आकर योजनाएं बनेगी।

लाभार्थियों की प्रतिक्रिया और चुनौतियां

वार्ड सदस्यों के बीच इस घोषणा से उत्साह है। कई सदस्यों ने कहा कि अब वे मुखिया के इंतजार में नहीं रहेंगे और अपने वार्ड की असली जरूरतों पर ध्यान दे सकेंगे। हालांकि, कुछ चुनौतियां भी हैं:

  • केंद्र से स्वीकृति में देरी हो सकती है, क्योंकि यह मनरेगा जैसे केंद्रीय कोष से जुड़ा है।
  • फंड के दुरुपयोग को रोकने के लिए सख्त मॉनिटरिंग जरूरी।
  • वार्ड सदस्यों को प्रशिक्षण देना होगा, ताकि वे फंड का सही उपयोग कर सकें।
  • बजट आवंटन में पारदर्शिता बनाए रखनी होगी।

निष्कर्ष: विकेंद्रीकरण की नई मिसाल

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का यह फैसला बिहार के ग्रामीण विकास में एक मील का पत्थर साबित हो सकता है। यह न केवल वार्ड सदस्यों को सशक्त बनाएगा, बल्कि गांव-गांव तक विकास की पहुंच बढ़ाएगा। यदि केंद्र से जल्द मंजूरी मिलती है, तो अगले वित्तीय वर्ष से ही यह योजना लागू हो सकती है। इससे बिहार पंचायती राज में एक नया अध्याय शुरू होगा, जहां हर वार्ड का प्रतिनिधि सीधे विकास का हिस्सा बनेगा।

Sources: दैनिक जागरण

By Mohd Abdush Shahid

Mohd Abdush Shahid is Founder and content creator at www.views24.in, specializing in news analysis, feature reporting, and in-depth storytelling. With a keen eye for detail and a passion for uncovering impactful narratives, Mohd Abdush Shahid delivers trusted, engaging content that keeps readers informed and inspired.

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