28 मार्च 2026, 30 मार्च को नीतीश कुमार देंगे इस्तीफा: बिहार की राजनीति में एक बार फिर युगांतकारी बदलाव की घड़ी आ गई है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन (नबीन) को 30 मार्च 2026 तक बिहार विधानमंडल की सदस्यता छोड़नी होगी। 16 मार्च को राज्यसभा चुनाव में दोनों नेताओं की निर्विरोध जीत के बाद संवैधानिक प्रावधानों के तहत यह अनिवार्य हो गया है। अगर समयसीमा में इस्तीफा नहीं दिया गया तो उनकी राज्यसभा सदस्यता प्रभावित हो सकती है।
संवैधानिक नियम और 14 दिन की समयसीमा
भारतीय संविधान के अनुच्छेद 101 और लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम के प्रावधानों के अनुसार, कोई व्यक्ति एक साथ दो सदनों का सदस्य नहीं रह सकता। राज्यसभा चुनाव में निर्वाचित होने के 14 दिनों के अंदर विधानसभा या विधान परिषद की सदस्यता छोड़नी पड़ती है। नीतीश कुमार बिहार विधान परिषद (एमएलसी) के सदस्य हैं, जबकि नितिन नवीन बांकीपुर विधानसभा सीट से विधायक हैं। 16 मार्च से गिनती करें तो 30 मार्च ठीक 14वां दिन है।
बिहार विधानसभा स्पीकर प्रेम कुमार ने भी इसकी पुष्टि की है। सूत्रों के मुताबिक, नीतीश कुमार 30 मार्च को एमएलसी पद से इस्तीफा दे देंगे। नितिन नवीन भी विधायक पद छोड़ेंगे। हालांकि, कुछ रिपोर्ट्स में कहा गया है कि अगर इस्तीफा नहीं दिया गया तो भी राज्यसभा सीट अपने आप नहीं जाएगी, लेकिन परंपरा के अनुसार दोनों नेता तय तारीख में इस्तीफा देंगे।
नीतीश कुमार का राजनीतिक सफर: 20 साल का ‘सुशासन’ दौर खत्म?
नीतीश कुमार बिहार के सबसे लंबे समय तक मुख्यमंत्री रहे हैं। उन्होंने 2005 से लेकर अब तक कई बार सत्ता संभाली और गठबंधन बदलते रहे। 2025 विधानसभा चुनाव में एनडीए की भारी जीत के बाद वे फिर सीएम बने। लेकिन अब राज्यसभा जाने का फैसला उन्होंने खुद लिया। 5 मार्च को अमित शाह की मौजूदगी में नामांकन दाखिल करने के बाद से ही अटकलें तेज थीं।
नीतीश ने कहा था कि दो दशक तक जनता का विश्वास मिला, अब राष्ट्रीय स्तर पर बिहार की सेवा करेंगे। सूत्र बताते हैं कि 30 मार्च को वे मुख्यमंत्री पद से भी इस्तीफा दे सकते हैं। हालांकि, संविधान के मुताबिक वे बिना किसी सदन के सदस्य बने 6 महीने तक सीएम रह सकते हैं। लेकिन वे पूर्ण इस्तीफा देकर नई व्यवस्था को रास्ता देने वाले हैं।
नया मुख्यमंत्री कौन? भाजपा को मिल सकती है कुर्सी
नीतीश कुमार के इस्तीफे के बाद बिहार में नई सरकार गठन की प्रक्रिया शुरू हो जाएगी। एनडीए में भाजपा की मजबूत स्थिति को देखते हुए नया सीएम भाजपा से हो सकता है। संभावित नामों में सम्राट चौधरी, विजय सिन्हा या अन्य वरिष्ठ नेता शामिल हैं। नीतीश ने आश्वासन दिया है कि वे नई सरकार को पूरा सहयोग देंगे और मार्गदर्शन करते रहेंगे।
नितिन नवीन का राज्यसभा सफर: भाजपा की राष्ट्रीय रणनीति
भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन पहले से ही राष्ट्रीय पटल पर सक्रिय हैं। राज्यसभा चुनाव में उनकी जीत ने पार्टी की बिहार में पकड़ को और मजबूत किया। उन्हें 30 मार्च तक विधानसभा सीट खाली करनी होगी। उनका राज्यसभा जाना भाजपा की राष्ट्रीय नेतृत्व व्यवस्था को नई दिशा देगा।
नीतीश के बेटे निशांत कुमार की राजनीतिक एंट्री
इस पूरे घटनाक्रम के बीच नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार की राजनीतिक सक्रियता भी चर्चा में है। मार्च 2026 में उन्होंने जेडीयू की सदस्यता ली और पार्टी कार्यकर्ताओं के साथ जुड़ रहे हैं। विश्लेषक इसे नीतीश की भविष्य की रणनीति का हिस्सा मान रहे हैं। निशांत अभी शुरुआती दौर में हैं, लेकिन जातीय और क्षेत्रीय समीकरणों को साधने की कोशिश कर रहे हैं।
विपक्ष की प्रतिक्रिया: ‘जनादेश की धोखाधड़ी’
महागठबंधन (राजद-कांग्रेस) ने इस बदलाव को ‘जनादेश की विश्वासघात’ करार दिया है। तेजस्वी यादव ने कहा कि 2025 चुनाव में जनता ने स्थानीय मुद्दों पर वोट दिया था, लेकिन अब सत्ता दिल्ली से तय हो रही है। विपक्ष का आरोप है कि भाजपा ने नीतीश का इस्तेमाल चुनाव के लिए किया और अब उन्हें किनारे कर रही है।
जेडीयू के अंदर भी कुछ कार्यकर्ता निराश हैं, लेकिन पार्टी लाइन साफ है। एनडीए गठबंधन की स्थिरता बरकरार रखने के लिए नीतीश का समर्थन अभी भी महत्वपूर्ण रहेगा।
राजनीतिक प्रभाव: बिहार में क्या बदलेगा?
यह बदलाव बिहार की युवा पीढ़ी, विकास योजनाओं, जातीय समीकरणों और रोजगार नीतियों पर असर डालेगा। नीतीश के लंबे शासनकाल में ‘सुशासन’ और बुनियादी ढांचे पर फोकस रहा। अब नई सरकार इन मुद्दों को कैसे आगे बढ़ाएगी, यह देखना होगा।
राज्यसभा में नीतीश कुमार राष्ट्रीय मुद्दों पर सक्रिय रहेंगे। वहीं, बिहार में नई पीढ़ी का नेतृत्व उभर सकता है। निशांत कुमार की भूमिका बढ़ने से जेडीयू में नई ऊर्जा आ सकती है, लेकिन चुनौतियां भी कम नहीं।
30 मार्च के बाद विधायक दल की बैठक में नए नेता का चुनाव होगा और राज्यपाल से शपथ ग्रहण। बिहार की जनता नए मुख्यमंत्री से बड़े उम्मीदें लगा रही है — रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य और विकास जैसे मुद्दे फिर से चर्चा में आएंगे।
नीतीश कुमार का यह कदम बिहार राजनीति का नया अध्याय शुरू कर रहा है, जहां पुराना अनुभव और नई ऊर्जा का मिश्रण देखने को मिलेगा।
Sources: टाइम्स ऑफ़ इंडिया