13 जनवरी 2026, Nitish Kumar कैबिनेट के बड़े फैसले: बिहार के मुख्यमंत्री Nitish Kumar की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में कुल 41 से 43 प्रस्तावों को मंजूरी दी गई, जो राज्य के विकास, रोजगार और बुनियादी सुविधाओं पर केंद्रित थे। बैठक में सबसे प्रमुख फैसला सोन नदी के जल बंटवारे पर बिहार और झारखंड के बीच समझौते को मंजूरी देना रहा, जो 53 वर्षों से लंबित विवाद को सुलझाता है। इसके अलावा, पटना में बिजली के तारों को अंडरग्राउंड करने के लिए 653 करोड़ रुपये के प्रोजेक्ट को हरी झंडी दी गई, जो विशेष रूप से बुजुर्गों और आम नागरिकों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए लिया गया फैसला है। यह रिपोर्ट बैठक के प्रमुख फैसलों, उनके महत्व और राज्य पर प्रभाव पर विस्तार से चर्चा करती है।
बैठक का अवलोकन और पृष्ठभूमि
बिहार कैबिनेट की यह बैठक पटना के सचिवालय में आयोजित हुई, जिसमें मुख्यमंत्री Nitish Kumar के अलावा उपमुख्यमंत्री, मंत्री और वरिष्ठ अधिकारी शामिल थे। बैठक का मुख्य फोकस राज्य की जल संसाधन, ऊर्जा, शिक्षा, रोजगार और प्रशासनिक सुधारों पर था। कुल 41 से 43 प्रस्तावों पर मुहर लगी, जो बिहार के विकास को गति देने वाले हैं। नीतीश कुमार ने बैठक के बाद कहा कि ये फैसले राज्य की जनता के कल्याण के लिए हैं और विशेष रूप से ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाओं को मजबूत करेंगे।
बैठक की तैयारी और संदर्भ
यह बैठक ऐसे समय में हुई जब बिहार और झारखंड के बीच जल विवाद लंबे समय से चला आ रहा था। 1973 के बांसागर समझौते के बाद से सोन नदी का जल बंटवारा अटका हुआ था। इसी तरह, पटना में बिजली की पुरानी ओवरहेड लाइनों से होने वाली दुर्घटनाओं, विशेष रूप से बुजुर्गों के लिए खतरे को देखते हुए अंडरग्राउंड केबलिंग का फैसला लिया गया। राज्य सरकार ने पहले भी ऊर्जा क्षेत्र में सुधारों की घोषणा की थी, जैसे 125 यूनिट मुफ्त बिजली, जो अब इस प्रोजेक्ट से जुड़कर और मजबूत होगी।
सोन नदी जल बंटवारे पर समझौता: एक ऐतिहासिक कदम
कैबिनेट ने सोन नदी के जल बंटवारे पर बिहार और झारखंड के बीच समझौते को मंजूरी दी, जो 53 वर्ष पुराने विवाद का अंत करता है। 1973 के बांसागर समझौते के तहत अविभाजित बिहार को 7.75 मिलियन एकड़ फीट (MAF) पानी मिलना था, जो अब बंटकर बिहार को 5.75 एमएएफ और झारखंड को 2 एमएएफ मिलेगा। यह समझौता इंद्रपुरी जलाशय परियोजना को गति देगा, जिससे भोजपुर, बक्सर, रोहतास, कैमूर, औरंगाबाद, पटना, गया और अरवल जैसे जिलों में सिंचाई सुविधा बढ़ेगी।
समझौते का महत्व और प्रभाव
यह फैसला किसानों के लिए वरदान साबित होगा, क्योंकि सोन नदी बिहार की कृषि अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा है। विवाद के कारण इंद्रपुरी परियोजना रुकी हुई थी, लेकिन अब यह पूरा होने से हजारों हेक्टेयर भूमि को सिंचाई मिलेगी, जो सूखे प्रभावित क्षेत्रों में फसल उत्पादन बढ़ाएगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह समझौता पड़ोसी राज्यों के साथ सहयोग का उदाहरण है। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे बिहार की जीडीपी में 2-3 प्रतिशत की वृद्धि हो सकती है।
बिजली के तार अंडरग्राउंड करने का प्रोजेक्ट: सुरक्षा और विश्वसनीयता पर फोकस
कैबिनेट ने पटना इलेक्ट्रिक सप्लाई अंडरटेकिंग (PESU) के तहत 13 डिवीजनों में बिजली के तारों को अंडरग्राउंड करने के लिए 653 करोड़ रुपये के प्रोजेक्ट को मंजूरी दी। यह फैसला विशेष रूप से बुजुर्गों और बच्चों की सुरक्षा को ध्यान में रखकर लिया गया है, क्योंकि ओवरहेड तारों से दुर्घटनाएं आम हैं। प्रोजेक्ट से पटना के घरों में बिजली सप्लाई अधिक विश्वसनीय होगी और बिजली कटौती कम होगी।
प्रोजेक्ट की विशेषताएं और लाभ
यह योजना पटना के शहरी क्षेत्रों को कवर करेगी, जहां पुरानी तारों से आग लगने और दुर्घटनाओं का खतरा रहता है। बुजुर्गों के लिए यह इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि वे घरों में अधिक समय बिताते हैं और तारों से संबंधित जोखिमों से प्रभावित होते हैं। सरकार ने पहले बुजुर्गों के लिए घर से ही जमीन रजिस्ट्री की सुविधा दी थी, जो इस प्रोजेक्ट से जुड़कर समग्र कल्याण को बढ़ाएगी। प्रोजेक्ट 2028 तक पूरा होने की उम्मीद है, जिससे ऊर्जा हानि 10-15 प्रतिशत कम होगी।
अन्य प्रमुख फैसले: रोजगार, शिक्षा और प्रशासनिक सुधार
बैठक में रोजगार सृजन पर विशेष एक्शन प्लान को मंजूरी दी गई, जो पब्लिक और प्राइवेट सेक्टर में नौकरियां बढ़ाएगा। साथ ही, मुंबई में बिहार भवन के लिए 314.20 करोड़ रुपये की मंजूरी मिली, जो प्रवासी बिहारियों के लिए उपयोगी होगा। दर्भंगा एयरपोर्ट के पास जमीन अधिग्रहण के लिए 138 करोड़ रुपये का मुआवजा स्वीकृत किया गया।
शिक्षा और ऊर्जा क्षेत्र के फैसले
पीएम श्री योजना के तहत 789 स्कूलों के लिए 14,850.50 करोड़ रुपये आवंटित किए गए, जो शिक्षा गुणवत्ता सुधारेंगे। गया के मैन्युफैक्चरिंग क्लस्टर के लिए 220 केवी डीसी ट्रांसमिशन लाइन की मंजूरी मिली। इसके अलावा, खरीद के लिए 7,000 करोड़ रुपये का ऋण और कृषि एवं मत्स्य विभाग में नए पदों का सृजन हुआ।
बिहार के विकास की दिशा में मील का पत्थर
यह कैबिनेट बैठक बिहार के लिए मील का पत्थर साबित होगी, जो जल, ऊर्जा और रोजगार जैसे क्षेत्रों में प्रगति लाएगी। सोन नदी समझौता से कृषि क्रांति आएगी, जबकि अंडरग्राउंड केबलिंग से शहर सुरक्षित होंगे। Nitish Kumar की सरकार ने इन फैसलों से साबित किया कि जनकल्याण उनकी प्राथमिकता है। विशेषज्ञों का कहना है कि ये कदम 2026-27 के बजट को मजबूत आधार देंगे। कुल मिलाकर, यह बैठक राज्य की प्रगति का नया अध्याय लिखेगी।
Sources: पटना प्रेस