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13 जनवरी 2026, पश्चिम बंगाल में Nipah Virus का खतरा: पश्चिम बंगाल में 19 वर्षों बाद Nipah Virus की वापसी ने स्वास्थ्य अधिकारियों को हाई अलर्ट पर ला दिया है। बारासात के एक निजी अस्पताल में कार्यरत दो नर्सों में Nipah Virus के संक्रमण का संदेह है, और दोनों की हालत गंभीर बनी हुई है। राज्य सरकार ने संपर्क ट्रेसिंग शुरू कर दी है, जबकि केंद्र सरकार ने राष्ट्रीय संयुक्त प्रकोप प्रतिक्रिया टीम तैनात की है। यह मामला 11 जनवरी 2026 की रात को सामने आया, जब मरीजों के सैंपल टेस्ट में वायरस की संभावना पाई गई। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि संक्रमण का स्रोत अभी रहस्य बना हुआ है, लेकिन फल चमगादड़ों से जुड़ा हो सकता है। इस रिपोर्ट में हम मामले की विस्तृत जानकारी, Nipah Virus की पृष्ठभूमि, सरकारी प्रतिक्रिया और रोकथाम के उपायों पर चर्चा करेंगे।

Nipah Virus क्या है?

Nipah Virus एक जानलेवा जूनोटिक संक्रमण है, जो जानवरों से मनुष्यों में फैलता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, इसकी मृत्यु दर 45 से 75 प्रतिशत तक है, जो इसे सबसे खतरनाक पैथोजन में से एक बनाती है। वर्तमान में कोई विशिष्ट उपचार या वैक्सीन उपलब्ध नहीं है, इसलिए रोकथाम ही एकमात्र तरीका है।

उत्पत्ति और संचरण

Nipah Virus की पहचान 1999 में मलेशिया में हुई थी, जहां सुअरों से मनुष्यों में संक्रमण फैला। भारत में यह मुख्य रूप से फल चमगादड़ों (फ्रूट बैट्स) से जुड़ा है, जो वायरस का प्राकृतिक होस्ट हैं। संक्रमण कच्चे खजूर के रस के सेवन से, संक्रमित जानवरों के संपर्क से या मनुष्य से मनुष्य में बॉडी फ्लूइड्स के माध्यम से फैल सकता है। पर्यावरणीय कारक जैसे जंगलों की कटाई और जलवायु परिवर्तन चमगादड़ों को मनुष्यों के करीब लाते हैं, जिससे स्पिलओवर की संभावना बढ़ती है। पश्चिम बंगाल, केरल, कर्नाटक जैसे राज्यों में चमगादड़ों में वायरस के एंटीबॉडी पाए गए हैं।

लक्षण और मृत्यु दर

संक्रमण के शुरुआती लक्षणों में बुखार, सिरदर्द, मांसपेशियों में दर्द, उल्टी और गले में खराश शामिल हैं। कुछ मामलों में यह एसिम्प्टोमैटिक रहता है, लेकिन गंभीर रूप से यह मस्तिष्क सूजन (एनसेफलाइटिस), सांस की तकलीफ, दौरे और कोमा का कारण बन सकता है। इनक्यूबेशन पीरियड 4 से 14 दिन है, लेकिन 45 दिन तक लंबा हो सकता है। जीवित बचे लोगों में 20 प्रतिशत तक न्यूरोलॉजिकल समस्याएं जैसे दौरे या व्यक्तित्व परिवर्तन हो सकते हैं। उच्च मृत्यु दर के कारण WHO इसे महामारी की क्षमता वाला वायरस मानता है।

भारत में निपाह के पूर्व प्रकोप

भारत में Nipah Virus का पहला प्रकोप 2001 में पश्चिम बंगाल के सिलिगुड़ी में हुआ, जहां 66 मामले आए और 45 मौतें हुईं। 2007 में नादिया जिले में 5 मामले सभी घातक साबित हुए। उसके बाद केरल में 2018 से 2025 तक कई प्रकोप हुए, जिसमें 2018 का कोझीकोड प्रकोप सबसे बड़ा था (18 मामले, 17 मौतें)। ये प्रकोप मुख्य रूप से कच्चे खजूर रस से जुड़े थे, लेकिन मनुष्य-से-मनुष्य संचरण सीमित रहा।

वर्तमान मामले की विस्तृत जानकारी

मरीजों का विवरण

दोनों मरीज नर्स हैं, जो बारासात के एक निजी अस्पताल में कार्यरत हैं। एक नर्स नादिया जिले की निवासी है, जबकि दूसरी पूरबा बर्धमान के कटवा की। वे हाल ही में पूरबा बर्धमान गई थीं, लेकिन राज्य से बाहर नहीं। लक्षण दिखने पर उनका टेस्ट किया गया, और वे अब लाइफ सपोर्ट पर हैं। सैंपल दो लैब्स में जांच के लिए भेजे गए हैं।

संक्रमण के स्रोत का रहस्य

संक्रमण का स्रोत अभी स्पष्ट नहीं है। प्रारंभिक जांच में पूरबा बर्धमान यात्रा का जिक्र है, लेकिन कोई निश्चित स्पष्टीकरण नहीं। स्वास्थ्यकर्मी होने के कारण मरीजों से संक्रमण की संभावना है, लेकिन चमगादड़ों से स्पिलओवर की जांच हो रही है। स्थानीय आदतें जैसे कच्चा खजूर रस पीना संदेह में है, हालांकि इस मामले में कोई सीधा लिंक नहीं।

सरकारी प्रतिक्रिया और उपाय

राज्य सरकार के कदम

पश्चिम बंगाल सरकार ने हाई अलर्ट जारी किया है। मुख्य सचिव नंदिनी चक्रवर्ती ने लोगों से घबराने की बजाय सतर्क रहने की अपील की। संपर्क ट्रेसिंग उत्तर 24 परगना, पूरबा बर्धमान और नादिया जिलों में चल रही है। तीन हेल्पलाइन नंबर (03323330180, 9874708858, 9836046212) जारी किए गए। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने 11 जनवरी को अस्पताल का दौरा किया।

केंद्र सरकार की सहायता

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने राष्ट्रीय केंद्र रोग नियंत्रण (NCDC) से संयुक्त टीम भेजी है, जिसमें कोलकाता के एआईआईएचपीएच, पुणे के एनआईवी, चेन्नई के एनआईई, कलयाणी के एआईएमएस और वन्यजीव विभाग के विशेषज्ञ शामिल हैं। पब्लिक हेल्थ इमरजेंसी ऑपरेशंस सेंटर सक्रिय है। स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने ममता बनर्जी से बात की और पूर्ण समर्थन का आश्वासन दिया। टीम संपर्क ट्रेसिंग, टेस्टिंग और रोकथाम में मदद कर रही है।

रोकथाम के उपाय और सलाह

Nipah Virus से बचाव के लिए साबुन से हाथ धोना, चमगादड़ों वाले इलाकों से दूर रहना, फलों की जांच करना और कच्चा खजूर रस न पीना जरूरी है। देखभालकर्ताओं को संक्रमितों के बॉडी फ्लूइड्स से बचना चाहिए। उबला हुआ गुड़ सुरक्षित है। वैक्सीन विकास पर काम चल रहा है, जैसे जेनोवा और CEPI का सहयोग। जनता को अफवाहों से बचना चाहिए और लक्षण दिखने पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।

सार्वजनिक स्वास्थ्य निहितार्थ

यह प्रकोप पश्चिम बंगाल के लिए चुनौती है, लेकिन त्वरित प्रतिक्रिया से इसे नियंत्रित किया जा सकता है। पर्यावरणीय बदलावों से ऐसे वायरस का खतरा बढ़ रहा है, इसलिए सतर्कता और अनुसंधान जरूरी। मामले की जांच जारी है, और उम्मीद है कि जल्द स्रोत पता चलेगा। जनता को सहयोग करना चाहिए ताकि फैलाव रोका जा सके।

Sources: टाइम्स ऑफ़ इंडिया

By Mohd Abdush Shahid

Mohd Abdush Shahid is Founder and content creator at www.views24.in, specializing in news analysis, feature reporting, and in-depth storytelling. With a keen eye for detail and a passion for uncovering impactful narratives, Mohd Abdush Shahid delivers trusted, engaging content that keeps readers informed and inspired.

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