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3 जनवरी 2026, किशनगंज में NIA की सख्ती– राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने बिहार के सीमांचल क्षेत्र में अपनी कार्रवाई को और तेज कर दिया है। शुक्रवार (2 जनवरी) को किशनगंज जिले के उत्तर पल्ली इलाके में NIA की टीम ने छापेमारी की और दो स्थानीय युवकों – महफूज आलम और आफताब – को हिरासत में ले लिया। दोनों को किशनगंज सदर थाने ले जाया गया, जहां घंटों पूछताछ के बाद आफताब को रिहा कर दिया गया, लेकिन महफूज आलम की जांच जारी रही। यह कार्रवाई 2022 के फुलवारीशरीफ क्रिमिनल कॉन्सपिरेसी केस से जुड़ी है, जिसमें प्रतिबंधित संगठन पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (PFI) के सदस्यों पर आतंकवादी गतिविधियों को अंजाम देने, हथियार प्रशिक्षण देने और सांप्रदायिक सद्भाव बिगाड़ने का आरोप है। NIA का मानना है कि किशनगंज PFI के नेटवर्क का एक महत्वपूर्ण केंद्र रहा है, और यह छापेमारी स्थानीय स्तर पर छिपे तारों को उजागर करने की दिशा में एक कदम है।

फुलवारीशरीफ केस: एक खतरनाक साजिश का खुलासा

यह मामला 2022 से चल रहा है, जब पटना के फुलवारीशरीफ इलाके में PFI के सदस्यों की एक बैठक का पर्दाफाश हुआ। जांच में सामने आया कि संगठन के सदस्य युवाओं को कट्टरपंथी विचारधारा की ओर प्रेरित करने, अवैध हथियारों का प्रशिक्षण देने और भारत विरोधी गतिविधियों को बढ़ावा देने की साजिश रच रहे थे। शुरुआत में बिहार पुलिस ने इसकी जांच की, लेकिन राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े होने के कारण मामला NIA को सौंप दिया गया। अब तक 17 आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल हो चुकी है, और जांच एजेंसी ने साजिश के कई पहलुओं को उजागर किया है।

PFI, जो 2022 में केंद्र सरकार द्वारा आतंकवादी संगठन घोषित कर प्रतिबंधित किया गया, मूल रूप से केरल में सक्रिय था, लेकिन उत्तर भारत में इसका विस्तार चिंता का विषय बन गया। बिहार के सीमांचल क्षेत्र, खासकर किशनगंज और कटिहार जैसे जिलों में, संगठन ने स्थानीय मुस्लिम समुदायों को निशाना बनाकर अपनी पैठ मजबूत की। NIA के अनुसार, PFI के सदस्य हिंदुत्व विरोधी प्रचार के जरिए युवाओं को भड़काते थे और दुर्गा पूजा जैसे त्योहारों के दौरान सांप्रदायिक तनाव पैदा करने की कोशिश करते थे। फुलवारीशरीफ से जब्त दस्तावेजों में PFI की रणनीति का जिक्र मिला, जिसमें बांग्लादेश सीमा के पास सक्रियता बढ़ाने का प्लान था।

पिछली गिरफ्तारियां: साजिश के सूत्रधारों पर नकेल

इस केस में NIA ने कई महत्वपूर्ण गिरफ्तारियां की हैं, जो साजिश की गहराई को दर्शाती हैं। जनवरी 2025 में दिल्ली एयरपोर्ट से मोहम्मद सज्जाद आलम को पकड़ा गया। उसके खिलाफ दुबई से PFI को फंडिंग भेजने का आरोप है, जो संगठन की वित्तीय रीढ़ को कमजोर करने वाली कार्रवाई थी। फिर सितंबर 2025 में, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पूर्णिया यात्रा से ठीक पहले, किशनगंज के हलीम चौक के पास महबूब आलम उर्फ महबूब नदवी (39 वर्ष) को गिरफ्तार किया गया। कटिहार जिले के हसनगंज का निवासी नदवी 2016-17 में PFI का बिहार राज्य अध्यक्ष रहा था। वह जामिया मिलिया इस्लामिया का पूर्व छात्र था और कट्टरपंथी विचारों को फैलाने में माहिर माना जाता है। NIA ने उसे 19वां आरोपी घोषित किया, और उसके सहयोगी नोमान अभी भी फरार है।

नदवी की गिरफ्तारी के बाद से किशनगंज में NIA की निगरानी बढ़ गई थी। यह चौथा मौका था जब एजेंसी ने जिले में छापे मारे। स्थानीय सूत्रों के अनुसार, नदवी के नेटवर्क में कई स्थानीय युवक शामिल थे, जो सोशल मीडिया और गुप्त बैठकों के जरिए सक्रिय थे।

किशनगंज छापेमारी: संदिग्धों की भूमिका और जांच का फोकस

शुक्रवार की छापेमारी में NIA टीम ने उत्तर पल्ली के महफूज आलम और आफताब के घरों पर दबिश दी। दोनों को पहले ही नोटिस जारी हो चुके थे। पूछताछ के दौरान महफूज के फोन और दस्तावेजों की जांच की गई, जिसमें PFI से उसके संपर्कों का पता लगाया गया। NIA का शक है कि महफूज फुलवारीशरीफ मॉड्यूल से जुड़ा था और स्थानीय स्तर पर युवाओं को संगठित करने में भूमिका निभा रहा था। आफताब को उसके सीमित संपर्कों के कारण रिहा कर दिया गया, लेकिन महफूज की पूछताछ देर रात तक चली। एजेंसी अब उसके बैंक खातों, यात्रा इतिहास और संपर्क सूची की पड़ताल कर रही है।

किशनगंज सदर थाने के आसपास सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई थी, और स्थानीय पुलिस ने सहयोग किया। NIA ने कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया, लेकिन स्रोतों के मुताबिक, यह कार्रवाई सीमांचल क्षेत्र में PFI के अवशेषों को साफ करने की दिशा में है। जांच का मुख्य फोकस फंडिंग चैनल, लॉजिस्टिकल सपोर्ट और बचे हुए ऑपरेटिव्स को पहचानना है। विशेषज्ञों का मानना है कि बांग्लादेश सीमा के निकट होने से किशनगंज PFI जैसे संगठनों के लिए रणनीतिक महत्व रखता है, जहां से हथियार और प्रचार सामग्री की तस्करी संभव हो सकती है।

PFI का खतरा: राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए चुनौती

PFI का इतिहास विवादास्पद रहा है। 2006 में केरल में स्थापित यह संगठन खुद को सामाजिक कार्यकर्ता बताता था, लेकिन NIA की रिपोर्ट्स में इसे ISIS और अन्य वैश्विक आतंकी नेटवर्क से जुड़ा पाया गया। 2022 में UAPA के तहत प्रतिबंध के बाद इसके कई सदस्य भूमिगत हो गए। बिहार में PFI ने मुस्लिम युवाओं को लक्ष्य बनाया, खासकर शिक्षा और रोजगार के अभाव का फायदा उठाकर। फुलवारीशरीफ केस ने साबित किया कि संगठन सांप्रदायिक दंगों को भड़काने और भारत विरोधी एजेंडे को बढ़ावा देने में लगा था।

इस कार्रवाई से स्थानीय समुदाय में हलचल है। कुछ लोग इसे सुरक्षा के लिए जरूरी मानते हैं, जबकि अन्य पूछताछ की निष्पक्षता पर सवाल उठा रहे हैं। बिहार सरकार ने NIA को पूर्ण सहयोग का आश्वासन दिया है, और राज्य पुलिस ने सीमांचल में अतिरिक्त फोर्स तैनात की है।

निष्कर्ष: जांच की निरंतरता और सबक

NIA की यह कार्रवाई दर्शाती है कि आतंकवाद के खिलाफ भारत की ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति कितनी सख्त है। महफूज आलम जैसे संदिग्धों से पूछताछ से नेटवर्क के नए लिंक्स उजागर हो सकते हैं, जो राष्ट्रीय सुरक्षा को मजबूत करेंगे। हालांकि, ऐसी घटनाओं से सांप्रदायिक तनाव न फैले, इसके लिए जागरूकता और समावेशी विकास जरूरी है। किशनगंज जैसे सीमावर्ती जिलों में युवाओं को मुख्यधारा से जोड़ने के प्रयास तेज करने होंगे, ताकि कट्टरपंथ की जड़ें कट सकें। NIA की जांच जारी है, और आने वाले दिनों में और खुलासे हो सकते हैं।

Sources: टाइम्स ऑफ़ इंडिया

By Mohd Abdush Shahid

Mohd Abdush Shahid is Founder and content creator at www.views24.in, specializing in news analysis, feature reporting, and in-depth storytelling. With a keen eye for detail and a passion for uncovering impactful narratives, Mohd Abdush Shahid delivers trusted, engaging content that keeps readers informed and inspired.

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