1 जनवरी 2026, FASTag: राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) ने वाहन मालिकों को बड़ी राहत देते हुए एक महत्वपूर्ण घोषणा की है। 1 फरवरी 2026 से नई कारों, जीपों और वैन के लिए जारी होने वाले नए फास्टैग पर ‘नो योर व्हीकल’ (KYV) सत्यापन प्रक्रिया को पूरी तरह समाप्त कर दिया जाएगा। यह कदम उपयोगकर्ताओं की सुविधा बढ़ाने और सक्रियण के बाद होने वाली परेशानियों को दूर करने के उद्देश्य से उठाया गया है। मौजूदा फास्टैग वाले कार मालिकों के लिए भी नियमित KYV की आवश्यकता नहीं रहेगी—यह केवल शिकायतों (जैसे ढीला फास्टैग, गलत जारी या दुरुपयोग) के मामले में ही अनिवार्य होगा। NHAI के इस फैसले से लाखों वाहन मालिकों को टोल प्लाजा पर रुकने और सत्यापन की झंझट से मुक्ति मिलेगी, जो राष्ट्रीय राजमार्गों पर यात्रा को और अधिक सहज बनाएगा।
FASTag सिस्टम की शुरुआत 2014 में हुई थी, जो रेडियो फ्रीक्वेंसी आइडेंटिफिकेशन (RFID) तकनीक पर आधारित है। यह इलेक्ट्रॉनिक टोल कलेक्शन (ETC) का माध्यम है, जिससे वाहन चालकों को टोल बूथ पर रुकने की जरूरत नहीं पड़ती। दिसंबर 2017 से सभी नई कारों के लिए फास्टैग अनिवार्य हो गया, और 2021 से इसे सभी वाहनों पर बाध्यकारी बनाया गया। हालांकि, KYV प्रक्रिया—जिसमें वाहन पंजीकरण प्रमाणपत्र (RC), चेसिस नंबर और वाहन की फोटो अपलोड करनी पड़ती थी—ने कई उपयोगकर्ताओं को परेशान किया। अक्टूबर 2025 में NHAI ने KYV को सरल बनाया था, जिसमें केवल वाहन के आगे की फोटो (नंबर प्लेट और फास्टैग दिखाते हुए) अपलोड करने की आवश्यकता थी। लेकिन अब यह प्रक्रिया नई जारी फास्टैग के लिए पूरी तरह हटाई जा रही है।
NHAI के कार्यकारी निदेशक (संचालन) के अनुसार, “यह बदलाव उपयोगकर्ताओं की शिकायतों पर आधारित है। पहले सक्रियण के बाद KYV न करने पर फास्टैग ब्लैकलिस्ट हो जाते थे, जिससे यात्रा बाधित होती थी। अब बैंकों को जारी करने से पहले ही वाहन सत्यापन (VAHAN डेटाबेस के माध्यम से) करना होगा।” नई प्रक्रिया में, फास्टैग जारी करने वाले बैंक (जैसे एसबीआई, एचडीएफसी, आईसीआईसीआई) को वैहान पोर्टल से RC विवरण सत्यापित करना अनिवार्य होगा। केवल असाधारण मामलों में ही RC-आधारित सत्यापन होगा। ऑनलाइन फास्टैग के लिए यह नियम तुरंत लागू हो रहा है। मौजूदा फास्टैग पर, यदि कोई शिकायत न हो, तो KYV की कोई जरूरत नहीं। इससे सिस्टम की अखंडता बनी रहेगी, लेकिन उपयोगकर्ताओं को अनावश्यक बोझ नहीं झेलना पड़ेगा।
इस बदलाव का लाभ मुख्य रूप से निजी वाहन मालिकों को मिलेगा। भारत में 15 करोड़ से अधिक FASTag सक्रिय हैं, जिनमें कारों का बड़ा हिस्सा है। 2025 में KYV संबंधी शिकायतें 20% बढ़ी थीं, क्योंकि कई उपयोगकर्ता फोटो अपलोड न करने पर टोल पर रुकने को मजबूर हो जाते थे। अब नई कार खरीदने वाले—जैसे महिंद्रा XUV700 या टाटा नेक्सॉन के मालिक—को फास्टैग लेते ही बिना किसी अतिरिक्त सत्यापन के यात्रा शुरू कर सकेंगे। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे टोल संग्रह में 10-15% की दक्षता बढ़ेगी, क्योंकि ब्लैकलिस्टिंग की घटनाएं कम होंगी। ऑटोमोबाइल एसोसिएशन ऑफ इंडिया के महासचिव ने कहा, “यह कदम डिजिटल इंडिया की दिशा में सकारात्मक है। लेकिन अन्य वाहनों (ट्रक, बस) के लिए KYV बरकरार रखना उचित है, जहां दुरुपयोग की संभावना अधिक है।”
NHAI ने सिस्टम की मजबूती के लिए कई कदम उठाए हैं। बैंकों को प्री-एक्टिवेशन वेलिडेशन स्ट्रेंग्थन करने का निर्देश दिया गया है, जिसमें FASTag जारी करने से पहले वाहन नंबर, मालिक का नाम और बैलेंस चेक शामिल है। यदि कोई FASTag ढीला पाया जाता है या गलत वाहन पर उपयोग होता है, तो शिकायत पर KYV फिर से लागू होगा। इसके अलावा, 31 जनवरी 2026 तक सभी मौजूदा फास्टैग के लिए KYV पूरा करने की अंतिम समयसीमा है, अन्यथा वे डीएक्टिवेट हो सकते हैं। एनएचएआई की वेबसाइट या NPCI पोर्टल पर उपयोगकर्ता स्थिति चेक कर सकते हैं। यह घोषणा केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी के ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ अभियान का हिस्सा है, जो 2026 में इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए भी फास्टैग एकीकरण को बढ़ावा देगा।
इस फैसले से राष्ट्रीय राजमार्गों पर यात्रा का अनुभव बदलेगा। उदाहरण के लिए, दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे पर यात्रा करने वाले कार मालिकों को अब सत्यापन की चिंता नहीं रहेगी। हालांकि, ट्रक और कमर्शियल वाहनों के लिए KYV अनिवार्य बना रहेगा, क्योंकि उनमें मल्टी-व्हीकल उपयोग की समस्या अधिक है। 2025 में एनएचएआई ने 1,000 करोड़ रुपये से अधिक टोल संग्रह किया, और FASTag कवरेज 98% पहुंच चुका है। लेकिन KYV जैसी जटिलताओं ने इसे प्रभावित किया था। अब यह सरलीकरण टोल राजस्व को स्थिर रखते हुए उपयोगकर्ता संतुष्टि बढ़ाएगा।
वाहन मालिकों को सलाह है कि नई कार खरीदते समय डीलर से फास्टैग तुरंत सक्रिय करवाएं। यदि कोई समस्या हो, तो NHAI हेल्पलाइन 1033 पर संपर्क करें। कुल मिलाकर, यह घोषणा बुनियादी ढांचे में डिजिटलीकरण की नई मिसाल है, जो 2026 को ‘स्मार्ट हाईवे ईयर’ बना देगी। एनएचएआई का यह कदम न केवल समय बचाएगा, बल्कि सड़क सुरक्षा और पर्यावरण संरक्षण को भी बढ़ावा देगा, क्योंकि कम रुकावट से उत्सर्जन कम होगा।
Sources: टाइम्स ऑफ इंडिया