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14 जनवरी 2026, Araria सदर अस्पताल में दवाओं के वितरण में लापरवाही: Araria जिले के सदर अस्पताल में सरकारी दवाओं के वितरण और प्रबंधन में गंभीर अनियमितताओं का मामला हाल ही में सामने आया है। यह अस्पताल, जो जिले के हजारों मरीजों की स्वास्थ्य जरूरतों को पूरा करने के लिए जिम्मेदार है, अब लापरवाही और कुप्रबंधन के आरोपों से घिरा हुआ है। नगर परिषद के वार्ड संख्या 25 के पार्षद आबिद हुसैन अंसारी ने इस मुद्दे को उठाते हुए जिला पदाधिकारी (डीएम) से उच्च स्तरीय जांच की मांग की है। उनके अनुसार, अस्पताल में उपलब्ध सरकारी दवाएं मरीजों तक नहीं पहुंच रही हैं, जबकि बड़ी मात्रा में दवाएं एक्सपायर होकर कचरे में फेंकी जा रही हैं। इससे मरीजों को बाहर से महंगी दवाएं खरीदने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है, जो गरीब और ग्रामीण आबादी के लिए एक बड़ा बोझ है।

यह मुद्दा न केवल स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता पर सवाल उठाता है, बल्कि सरकारी संसाधनों की बर्बादी को भी उजागर करता है। Araria जैसे सीमावर्ती जिले में, जहां स्वास्थ्य सुविधाएं पहले से ही सीमित हैं, ऐसी लापरवाही से जनता का विश्वास हिल सकता है। रिपोर्ट के अनुसार, अस्पताल परिसर में कई स्थानों पर दवाओं के पैकेट खुले में फेंके हुए पाए गए हैं, जो पर्यावरण और स्वास्थ्य दोनों के लिए खतरा हैं। यह घटना 14 जनवरी 2026 को विशेष रूप से चर्चा में आई, जब स्थानीय मीडिया ने इसे प्रमुखता से कवर किया।

दवाओं की बर्बादी का विवरण

सदर अस्पताल में दवाओं की बर्बादी का मामला कोई नया नहीं है, लेकिन हालिया खुलासे ने इसे और गंभीर बना दिया है। रिपोर्ट्स बताती हैं कि सरकारी निधि से खरीदी गई दवाएं, जैसे एंटीबायोटिक्स, पेनकिलर्स और अन्य आवश्यक दवाएं, स्टोर रूम से सीधे कचरे में फेंकी जा रही हैं। एक जांच में पाया गया कि अस्पताल के पीछे के हिस्से में दवाओं के ढेर लगे हुए हैं, जहां वे एक्सपायर हो रही हैं या जानबूझकर नष्ट की जा रही हैं।

यह लापरवाही अस्पताल के प्रबंधन की जिम्मेदारी पर सवाल उठाती है। विशेषज्ञों का कहना है कि दवाओं का सही स्टॉक मैनेजमेंट न होने से एक्सपायरी डेट से पहले ही उन्हें बेकार मान लिया जाता है। इसके अलावा, दवा काउंटर पर कर्मचारियों की कमी या उनकी लापरवाही से मरीजों को दवाएं नहीं मिल पातीं। एक स्थानीय निवासी ने बताया कि वे अस्पताल में इलाज के लिए आए थे, लेकिन डॉक्टर द्वारा लिखी गई दवाएं उपलब्ध नहीं होने पर उन्हें बाजार से 500-1000 रुपये की दवाएं खरीदनी पड़ीं। यह स्थिति विशेष रूप से ग्रामीण क्षेत्रों से आने वाले गरीब मरीजों के लिए चुनौतीपूर्ण है, जहां परिवहन और आर्थिक संसाधन सीमित हैं।

अस्पताल प्रशासन की ओर से इस पर कोई स्पष्ट जवाब नहीं आया है, लेकिन सूत्रों का कहना है कि स्टाफ की कमी और बजट की समस्या इसकी वजह हो सकती है। हालांकि, यह बहाना पर्याप्त नहीं लगता, क्योंकि सरकारी स्तर पर स्वास्थ्य बजट में वृद्धि हो रही है।

वार्ड पार्षद की शिकायत और मांग

नगर परिषद के वार्ड पार्षद आबिद हुसैन अंसारी ने इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाया है। उन्होंने जिला पदाधिकारी को एक लिखित आवेदन देकर उच्च स्तरीय जांच की मांग की है। उनके आवेदन में अस्पताल के दवा वितरण सिस्टम में घोटाले की आशंका जताई गई है। पार्षद का कहना है कि मरीजों को दवाएं न देकर उन्हें बाहर से खरीदने के लिए मजबूर किया जा रहा है, जो एक संगठित रैकेट का संकेत हो सकता है।

आबिद हुसैन ने मीडिया से बातचीत में कहा, “सरकारी दवाएं जो मरीजों के लिए हैं, वे कचरे में फेंकी जा रही हैं। यह जनता के पैसे की बर्बादी है। डीएम से मांग है कि एक कमिटी गठित कर जांच कराई जाए और दोषियों पर कार्रवाई हो।” उनकी इस पहल से स्थानीय समुदाय में समर्थन मिल रहा है, और कई संगठनों ने उनके साथ आवाज मिलाई है। यह मुद्दा अब राजनीतिक रंग भी ले रहा है, क्योंकि विपक्षी दल इसे सरकार की विफलता बताकर हमला कर रहे हैं।

मरीजों की परेशानी और प्रभाव

इस लापरवाही का सबसे बड़ा असर मरीजों पर पड़ रहा है। अररिया सदर अस्पताल जिले का प्रमुख स्वास्थ्य केंद्र है, जहां रोजाना सैकड़ों मरीज आते हैं। इनमें से अधिकांश गरीब परिवारों से हैं, जो सरकारी सुविधाओं पर निर्भर हैं। जब अस्पताल में दवाएं उपलब्ध नहीं होतीं, तो उन्हें निजी दुकानों से महंगी दवाएं खरीदनी पड़ती हैं। एक सर्वे के अनुसार, औसतन एक मरीज को 300-800 रुपये अतिरिक्त खर्च करने पड़ते हैं।

महिलाओं और बच्चों पर इसका प्रभाव और गहरा है। गर्भवती महिलाओं को आयरन और कैल्शियम की दवाएं न मिलने से स्वास्थ्य जोखिम बढ़ जाता है। इसी तरह, बुजुर्ग मरीजों को क्रोनिक बीमारियों की दवाएं न मिलने से इलाज में देरी होती है। स्थानीय निवासियों का कहना है कि यह समस्या पिछले कई महीनों से चल रही है, लेकिन अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। इससे अस्पताल की विश्वसनीयता कम हो रही है, और लोग निजी क्लीनिकों की ओर रुख कर रहे हैं, जो और महंगे हैं।

अस्पताल प्रशासन की प्रतिक्रिया और जांच की संभावना

अस्पताल प्रशासन की ओर से इस मुद्दे पर औपचारिक बयान नहीं आया है, लेकिन डीएम ने औचक निरीक्षण के दौरान दवा काउंटर पर लापरवाही पाई और एक कर्मचारी पर कार्रवाई का आदेश दिया है। यह निरीक्षण दर्शाता है कि प्रशासन मुद्दे को गंभीरता से ले रहा है। हालांकि, पार्षद की मांग के अनुसार, एक व्यापक जांच की जरूरत है, जिसमें स्टॉक रजिस्टर, खरीद प्रक्रिया और वितरण सिस्टम की जांच हो।

विशेषज्ञों का सुझाव है कि डिजिटल ट्रैकिंग सिस्टम लागू करके इस समस्या को हल किया जा सकता है। सरकारी स्तर पर स्वास्थ्य मंत्रालय को इसमें हस्तक्षेप करना चाहिए। अगर जांच में घोटाला साबित होता है, तो दोषियों पर सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।

सुझाव

Araria सदर अस्पताल में दवाओं के वितरण में लापरवाही एक गंभीर मुद्दा है, जो स्वास्थ्य सेवाओं की कमजोरी को दर्शाता है। पार्षद की जांच की मांग सही दिशा में एक कदम है। सरकार को तत्काल कार्रवाई करनी चाहिए ताकि मरीजों को सरकारी सुविधाओं का लाभ मिल सके। भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए पारदर्शी सिस्टम और नियमित ऑडिट जरूरी हैं। यह मामला पूरे राज्य के स्वास्थ्य विभाग के लिए एक सबक है, कि संसाधनों का सही उपयोग जनता के हित में हो।

Sources: दैनिक भास्कर

By Mohd Abdush Shahid

Mohd Abdush Shahid is Founder and content creator at www.views24.in, specializing in news analysis, feature reporting, and in-depth storytelling. With a keen eye for detail and a passion for uncovering impactful narratives, Mohd Abdush Shahid delivers trusted, engaging content that keeps readers informed and inspired.

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