20 दिसंबर 2025, Guwahati: पूर्वोत्तर भारत की सांस्कृतिक और प्राकृतिक धरोहर को हवाई यात्रा के साथ जोड़ते हुए PM Modi ने आज असम के Guwahati में लोकप्रिय गोपीनाथ बोरडोलोई अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे (एलजीबीआई) का नया एकीकृत टर्मिनल भवन उद्घाटित किया। 4,000 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित यह टर्मिनल भारत का पहला ‘प्रकृति-थीम’ वाला एयरपोर्ट है, जो ‘बांस-ऑर्किड’ (Bamboo Orchids) थीम पर आधारित है। असम की समृद्ध जैव विविधता, ब्रह्मपुत्र नदी की धारा और कजिरंगा राष्ट्रीय उद्यान की प्रेरणा से सजा यह टर्मिनल न केवल यात्रियों को एक बेहतरीन अनुभव देगा, बल्कि पूर्वोत्तर को दक्षिण-पूर्व एशिया से जोड़ने वाला हब बनेगा। PM Modi के इस दो दिवसीय असम दौरे के दौरान यह उद्घाटन पूर्वोत्तर के बुनियादी ढांचे में क्रांतिकारी कदम के रूप में देखा जा रहा है, जो पर्यटन, अर्थव्यवस्था और कनेक्टिविटी को नई गति देगा। इस रिपोर्ट में हम इस टर्मिनल की विशेषताओं, निर्माण यात्रा, पीएम के संदेश और क्षेत्रीय प्रभावों पर विस्तार से चर्चा करेंगे।
उद्घाटन समारोह दोपहर करीब 3 बजे हुआ, जब PM Modi हेलीकॉप्टर से एयरपोर्ट पहुंचे। उन्होंने टर्मिनल का वर्चुअल टूर लिया, जहां स्थानीय कलाकारों ने बांस और ऑर्किड से प्रेरित नृत्य प्रदर्शन किया। समारोह में असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा, नागरिक उड्डयन मंत्री राम मोहन नायडू किनजरापु और अन्य वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। पीएम ने अपने संबोधन में कहा, “यह टर्मिनल असम की प्राकृतिक सुंदरता का प्रतीक है। बढ़ी हुई क्षमता से पूर्वोत्तर के लोगों को बेहतर ‘जीवन सुगमता’ मिलेगी।” उन्होंने ट्विटर (एक्स) पर पोस्ट करते हुए इसे “असम के बुनियादी ढांचे के लिए बड़ा बढ़ावा” बताया। उद्घाटन के बाद पीएम ने शहीद स्मारक क्षेत्र जाकर असम आंदोलन के शहीदों को श्रद्धांजलि दी और डिब्रूगढ़ में नमरूप उर्वरक संयंत्र का भूमिपूजन किया।
यह टर्मिनल असम की सांस्कृतिक और प्राकृतिक विरासत को दर्शाने वाला एक कला कृति है। इसका डिजाइन ‘कोपौ फूल’ (असम की दुर्लभ ऑर्किड) से प्रेरित है, जिसमें 57 ऑर्किड-थीम वाली कॉलम्स हैं। इंटीरियर में कजिरंगा नेशनल पार्क से प्रेरित जोन, माजुली द्वीप के आर्टिफैक्ट्स और ब्रह्मपुत्र की धारा का प्रतिबिंब शामिल है। सबसे अनोखा आकर्षण ‘स्काई फॉरेस्ट’ है – एक वर्टिकल गार्डन जिसमें लगभग एक लाख स्वदेशी पौधे लगाए गए हैं, जो यात्रियों को जंगल जैसा अनुभव देगा। निर्माण में 140 मीट्रिक टन स्थानीय बांस का उपयोग हुआ है, जिसमें एक बहुउद्देशीय ‘बांस वॉल्ट’ बनाया गया है। यह वॉल्ट सांस्कृतिक केंद्र के रूप में काम करेगा, जहां स्थानीय समुदाय सांस्कृतिक आदान-प्रदान कर सकेंगे। जापी (असम का पारंपरिक सिर ढकने वाला) मोटिफ्स, गैंडे का प्रतीक और बांस की बनावट इसे क्षेत्रीय पहचान प्रदान करती है। नागरिक उड्डयन मंत्रालय के अनुसार, यह डिजाइन सस्टेनेबिलिटी पर जोर देता है, जिसमें रेनवाटर हार्वेस्टिंग और सोलर पैनल्स शामिल हैं।
क्षमता और तकनीकी मोर्चे पर यह टर्मिनल पूर्वोत्तर का सबसे उन्नत है। पुराने टर्मिनल से सात गुना बड़ा (1.4 लाख वर्ग मीटर), यह 2032 तक प्रति वर्ष 1.31 करोड़ यात्रियों को संभाल सकेगा। प्रति घंटे 34 एयर ट्रैफिक मूवमेंट्स (एटीएम) की क्षमता के साथ, यह क्षेत्र का सबसे अधिक है। इसमें भारत का सबसे उन्नत इंस्ट्रूमेंट लैंडिंग सिस्टम (आईएलएस) है, जो खराब मौसम में भी सुरक्षित लैंडिंग सुनिश्चित करेगा। डिजिटल एकीकरण में 14 एंट्री पॉइंट्स, चार डिजी यात्री गेट्स, फुल-बॉडी स्कैनर्स, ऑटोमेटेड बैगेज हैंडलिंग, फास्ट-ट्रैक इमिग्रेशन और एआई-ड्रिवन ऑपरेशंस शामिल हैं। अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के लिए कस्टम्स और इमिग्रेशन सुविधाएं बढ़ाई गई हैं, जो दक्षिण-पूर्व एशिया से कनेक्टिविटी को मजबूत करेंगी। एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया (एएआई) के चेयरमैन ने कहा, “यह टर्मिनल न केवल यात्रा को आसान बनाएगा, बल्कि असम की जैव विविधता को वैश्विक पटल पर प्रदर्शित करेगा।”
निर्माण यात्रा 2020 में शुरू हुई, जब केंद्र सरकार ने पूर्वोत्तर के हवाई ढांचे को मजबूत करने के लिए 10,000 करोड़ का पैकेज घोषित किया। कोविड महामारी के बावजूद, परियोजना समय पर पूरी हुई। पुराने टर्मिनल की क्षमता 30 लाख यात्रियों की थी, जो अब बढ़कर 1.31 करोड़ हो गई। रनवे, एप्रॉन और टैक्सीवे के अपग्रेड के साथ, यह एयरपोर्ट अब बोइंग 787 जैसी बड़े विमानों को संभाल सकेगा। पर्यावरणीय दृष्टि से, यह ग्रीन बिल्डिंग सर्टिफिकेशन की ओर अग्रसर है, जो कार्बन फुटप्रिंट को कम करेगा। स्थानीय कारीगरों को प्राथमिकता देकर रोजगार सृजन भी किया गया, जिससे 5,000 से अधिक नौकरियां पैदा हुईं।
इस उद्घाटन का क्षेत्रीय प्रभाव गहरा होगा। पूर्वोत्तर, जो लंबे समय से कनेक्टिविटी की कमी से जूझ रहा था, अब पर्यटन का नया केंद्र बनेगा। कजिरंगा, माजुली और ब्रह्मपुत्र घाटियों तक आसान पहुंच से पर्यटक बढ़ेंगे, जो असम की जीडीपी में 15% का योगदान दे सकता है। दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों के साथ व्यापार बढ़ेगा, खासकर थाईलैंड और म्यांमार से। पीएम मोदी ने रैली में कहा, “यह पूर्वोत्तर को भारत का गेटवे बनाएगा।” लेकिन चुनौतियां भी हैं – जैसे बढ़ते यात्री भार से ट्रैफिक मैनेजमेंट और मौसमी बाढ़ से सुरक्षा। एएआई ने इनके लिए योजना बनाई है।
निष्कर्षतः गुवाहाटी का नया टर्मिनल प्रकृति और प्रगति का संगम है, जो असम की आत्मा को हवाई पंख देगा। पीएम मोदी का यह कदम ‘एक्ट ईस्ट पॉलिसी’ को मजबूत करता है, पूर्वोत्तर को मुख्यधारा से जोड़ते हुए। क्या यह पर्यटन क्रांति लाएगा? संकेत सकारात्मक हैं। असम के लोग अब आसमान से अपनी जड़ों को महसूस करेंगे।