10 दिसंबर 2025 – वैश्विक तकनीकी दिग्गज माइक्रोसॉफ्ट ने भारत को एशिया में अपना सबसे बड़ा निवेश समर्पित करते हुए 17.5 अरब डॉलर (लगभग 1.47 लाख करोड़ रुपये) की राशि घोषित की है। कंपनी के सीईओ सत्य नडेला ने सोमवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर इसकी आधिकारिक घोषणा की, जो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ उनकी हालिया चर्चा का परिणाम है। यह निवेश भारत को ‘AI-प्रथम’ (AI-first) राष्ट्र बनाने की दिशा में एक मील का पत्थर साबित होगा, जो क्लाउड कंप्यूटिंग, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) इंफ्रास्ट्रक्चर, स्किल डेवलपमेंट और संप्रभु क्षमताओं पर केंद्रित है।
माइक्रोसॉफ्ट का भारत से गहरा जुड़ाव 1990 के दशक से चला आ रहा है, जब कंपनी ने यहां अपना पहला विकास केंद्र स्थापित किया। आज भारत माइक्रोसॉफ्ट का दूसरा सबसे बड़ा बाजार है, जहां 20 लाख से अधिक डेवलपर्स सक्रिय हैं। इस निवेश से पहले भी माइक्रोसॉफ्ट ने भारत में 3 बिलियन डॉलर से अधिक का निवेश किया है, लेकिन यह नया एलान एशिया में कंपनी का अब तक का सबसे बड़ा वित्तीय प्रतिबद्धता है। नडेला ने कहा, “भारत की AI क्षमता वैश्विक स्तर पर अभूतपूर्व है। यह निवेश जनसंख्या स्तर पर AI प्रसार को बढ़ावा देगा।”
निवेश के प्रमुख क्षेत्रों में क्लाउड और AI इंफ्रास्ट्रक्चर का विस्तार प्रमुख है। माइक्रोसॉफ्ट भारत में डेटा सेंटरों की क्षमता को दोगुना करने की योजना बना रहा है, जिससे एज़्योर क्लाउड प्लेटफॉर्म अधिक मजबूत बनेगा। इससे स्वास्थ्य, शिक्षा, कृषि और विनिर्माण जैसे क्षेत्रों में AI-संचालित समाधान तेजी से उपलब्ध होंगे। उदाहरणस्वरूप, ग्रामीण क्षेत्रों में AI-आधारित भाषा अनुवाद टूल्स और स्मार्ट फार्मिंग सॉल्यूशंस विकसित किए जाएंगे। इसके अलावा, 10 लाख से अधिक लोगों को AI स्किलिंग प्रदान करने का लक्ष्य रखा गया है, जिसमें सरकारी योजनाओं जैसे डिजिटल इंडिया के साथ साझेदारी शामिल है। यह न केवल युवा प्रतिभाओं को सशक्त बनाएगा, बल्कि डिजिटल असमानता को कम करने में भी मदद करेगा।
इस निवेश का भारत की अर्थव्यवस्था पर गहरा प्रभाव पड़ेगा। विशेषज्ञों के अनुसार, यह 5 लाख से अधिक प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार सृजन करेगा, खासकर IT और स्टार्टअप सेक्टर में। भारत, जो पहले से ही विश्व का तीसरा सबसे बड़ा स्टार्टअप इकोसिस्टम है, AI इनोवेशन का वैश्विक केंद्र बन सकता है। वैश्विक AI बाजार 2030 तक 1.8 ट्रिलियन डॉलर का होने का अनुमान है, और भारत इसमें 10% से अधिक योगदान दे सकता है। हालांकि, चुनौतियां भी हैं – डेटा प्राइवेसी, साइबर सिक्योरिटी और ऊर्जा खपत। माइक्रोसॉफ्ट ने इनके लिए ‘सॉवरेन AI’ मॉडल पर जोर दिया है, जो स्थानीय डेटा को सुरक्षित रखते हुए वैश्विक क्षमताओं का लाभ देगा।
प्रधानमंत्री मोदी ने इस घोषणा का स्वागत करते हुए कहा कि यह ‘मेक इन इंडिया’ और ‘अटलांन’ जैसे कार्यक्रमों को मजबूत करेगा। वैश्विक स्तर पर, यह निवेश अमेरिका-भारत स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप को भी सुदृढ़ करता है। कुल मिलाकर, माइक्रोसॉफ्ट का यह कदम भारत को डिजिटल सुपरपावर बनाने की दौड़ में आगे ले जाएगा। भविष्य में, जब AI रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा बनेगा, तो यह निवेश उसकी नींव साबित होगा।