Menaka Guruswamy - TMC's Rajya Sabha candidateMenaka Guruswamy - TMC's Rajya Sabha candidate

28 फरवरी 2026, मेनका गुरुस्वामी- TMC की राज्यसभा उम्मीदवार: कल ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) ने पश्चिम बंगाल से राज्यसभा चुनावों के लिए चार उम्मीदवारों के नाम घोषित किए, जिनमें सबसे ज्यादा चर्चा वरिष्ठ अधिवक्ता डॉ. मेनका गुरुस्वामी के नाम की हुई। यदि वे 16 मार्च 2026 को होने वाले चुनाव में जीत हासिल करती हैं, तो वे भारत की संसद में खुलेआम LGBTQ+ समुदाय से आने वाली पहली सांसद बन जाएंगी। यह कदम न केवल राजनीतिक विविधता का प्रतीक है, बल्कि लंबे समय से चले आ रहे सामाजिक परिवर्तन की दिशा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर भी साबित हो सकता है।

मेनका गुरुस्वामी का परिचय और शिक्षा

डॉ. मेनका गुरुस्वामी का जन्म 27 नवंबर 1974 को हैदराबाद में हुआ। उन्होंने अपनी प्रारंभिक शिक्षा हैदराबाद पब्लिक स्कूल से पूरी की। इसके बाद वे ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी से रोड्स स्कॉलर के रूप में पढ़ाई करने गईं, जहां उन्होंने कानून में डिग्री हासिल की। बाद में हार्वर्ड लॉ स्कूल से उन्होंने आगे की पढ़ाई की। उनकी शिक्षा और विदेशी अनुभव ने उन्हें संवैधानिक कानून, मानवाधिकार और सामाजिक न्याय के क्षेत्र में विशेषज्ञता प्रदान की। वे सुप्रीम कोर्ट ऑफ इंडिया में सीनियर एडवोकेट हैं और कई ऐतिहासिक मामलों में प्रमुख भूमिका निभा चुकी हैं।

धारा 377 केस में ऐतिहासिक भूमिका

मेनका गुरुस्वामी की सबसे बड़ी पहचान 2018 के सुप्रीम कोर्ट के उस फैसले से जुड़ी है, जिसमें भारतीय दंड संहिता की धारा 377 को असंवैधानिक घोषित कर समलैंगिकता को अपराध की श्रेणी से बाहर किया गया। वे उन वकीलों में शामिल थीं, जिन्होंने याचिकाकर्ताओं की ओर से बहस की और इस ऐतिहासिक जीत में महत्वपूर्ण योगदान दिया। इस फैसले ने लाखों LGBTQ+ व्यक्तियों को सम्मानजनक जीवन जीने का अधिकार दिया और भारत को वैश्विक स्तर पर प्रगतिशील देशों की सूची में शामिल किया। गुरुस्वामी ने इस दौरान न केवल कानूनी दलीलें दीं, बल्कि सामाजिक पूर्वाग्रहों के खिलाफ भी मजबूत आवाज उठाई।

उन्होंने अन्य कई महत्वपूर्ण मामलों में भी भाग लिया, जैसे कि अगस्ता वेस्टलैंड घोटाला, सलवा जुडुम, शिक्षा का अधिकार और नौकरशाही सुधार से जुड़े केस। उनकी विशेषज्ञता संवैधानिक व्याख्या और मानवाधिकारों पर केंद्रित रही है।

टीएमसी में शामिल होना और राजनीतिक प्रवेश

फरवरी 2026 में मेनका गुरुस्वामी ने तृणमूल कांग्रेस जॉइन की। पार्टी ने उन्हें राज्यसभा के लिए नामित करते हुए कहा कि वे संसद में मजबूत आवाज लाएंगी, खासकर बीजेपी के खिलाफ। टीएमसी के अन्य उम्मीदवारों में पूर्व केंद्रीय मंत्री और गायक बाबुल सुप्रियो, पश्चिम बंगाल के पूर्व डीजीपी राजीव कुमार और बंगाली अभिनेत्री कोयल मलिक शामिल हैं। पश्चिम बंगाल विधानसभा में टीएमसी की मजबूत बहुमत (215 सीटें) के कारण इन उम्मीदवारों के निर्विरोध चुने जाने की संभावना बहुत अधिक है।

टीएमसी की यह रणनीति पार्टी के विविधता और समावेशिता के एजेंडे को दर्शाती है। ममता बनर्जी ने अतीत में भी पत्रकारों, नौकरशाहों, कलाकारों और बुद्धिजीवियों को राज्यसभा में जगह दी है। मेनका गुरुस्वामी का नामांकन इसी परंपरा का हिस्सा है, लेकिन यह LGBTQ+ प्रतिनिधित्व के मामले में अभूतपूर्व है।

LGBTQ+ अधिकारों में योगदान और व्यक्तिगत जीवन

मेनका गुरुस्वामी न केवल वकील हैं, बल्कि LGBTQ+ अधिकारों की मुखर समर्थक भी हैं। उनकी पार्टनर अरुंधति कटजू भी वकील हैं और दोनों ने मिलकर कई सामाजिक मुद्दों पर काम किया है। गुरुस्वामी अक्सर मीडिया और सार्वजनिक मंचों पर समलैंगिक अधिकारों, लैंगिक समानता और संवैधानिक मूल्यों की बात करती हैं। उनका राजनीतिक प्रवेश LGBTQ+ समुदाय के लिए प्रेरणा का स्रोत बन सकता है, क्योंकि संसद में उनकी मौजूदगी से ऐसे मुद्दों पर ज्यादा प्रभावी बहस हो सकेगी।

संभावित प्रभाव और चुनौतियां

यदि मेनका गुरुस्वामी राज्यसभा पहुंचती हैं, तो यह भारत की संसदीय इतिहास में एक ऐतिहासिक क्षण होगा। इससे LGBTQ+ युवाओं को राजनीति में भागीदारी के लिए प्रोत्साहन मिलेगा। हालांकि, कुछ आलोचकों ने टीएमसी पर “गैर-बंगाली” उम्मीदवार चुनने का आरोप लगाया है, लेकिन पार्टी ने इसे खारिज करते हुए कहा कि योग्यता और विविधता महत्वपूर्ण है।

राज्यसभा में उनकी उपस्थिति से संवैधानिक मामलों, मानवाधिकारों और सामाजिक न्याय पर गहन चर्चा हो सकती है। वे धारा 377 के बाद के दौर में LGBTQ+ अधिकारों की रक्षा के लिए नए कानूनों या नीतियों की वकालत कर सकती हैं।

मेनका गुरुस्वामी का टीएमसी द्वारा राज्यसभा उम्मीदवार बनाया जाना सिर्फ एक राजनीतिक फैसला नहीं है, बल्कि भारत के सामाजिक परिदृश्य में बदलाव का संकेत है। एक सीनियर एडवोकेट, संवैधानिक विशेषज्ञ और LGBTQ+ अधिकारों की योद्धा के रूप में वे संसद में नई ऊर्जा ला सकती हैं। यदि वे चुनी जाती हैं, तो यह न केवल उनके व्यक्तिगत करियर की उपलब्धि होगी, बल्कि पूरे देश के लिए समावेशिता और समानता की जीत होगी।

Sources: द हिन्दू

By Mohd Abdush Shahid

Mohd Abdush Shahid is Founder and content creator at www.views24.in, specializing in news analysis, feature reporting, and in-depth storytelling. With a keen eye for detail and a passion for uncovering impactful narratives, Mohd Abdush Shahid delivers trusted, engaging content that keeps readers informed and inspired.

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