11 दिसंबर 2025: म्यांमार के पश्चिमी राज्य राखाइन में बुधवार रात को हुए एक हवाई हमले ने दुनिया को स्तब्ध कर दिया। सैन्य जंटा के विमान ने विद्रोही समूह अराकान आर्मी के नियंत्रण वाले क्षेत्र में स्थित एक अस्पताल पर दो 500-पाउंड बम गिराए, जिसमें कम से कम 34 लोग मारे गए और 80 से अधिक घायल हो गए। मृतकों में मरीज, चिकित्सा कर्मी, महिलाएं और बच्चे शामिल हैं, जो इस संघर्षग्रस्त देश में जारी गृहयुद्ध की भयावहता को उजागर करता है। स्थानीय बचाव कार्यकर्ता वाई हन औंग ने एपी को बताया कि हमला रात 9:13 बजे हुआ, जिसमें एक बम अस्पताल के रिकवरी वार्ड पर गिरा और दूसरा मुख्य भवन के पास फटा।
हमला म्रौक-यू टाउनशिप के जनरल अस्पताल पर हुआ, जो राखाइन राज्य का एक प्रमुख चिकित्सा केंद्र है। अराकान आर्मी के प्रवक्ता खाइन थू खा ने कहा कि जेट फाइटर से गिराए गए बमों ने अस्पताल को पूरी तरह तबाह कर दिया। आर्म्ड कॉन्फ्लिक्ट डेटा प्रोजेक्ट के अनुसार, जंटा ने हाल के महीनों में विद्रोही क्षेत्रों पर हवाई हमलों की संख्या बढ़ा दी है, जिसमें स्कूल, मठ और विस्थापित शिविर भी निशाना बने हैं। यह घटना 28 दिसंबर को होने वाले चुनावों से ठीक पहले घटी है, जिन्हें जंटा “लड़ाई का अंत” बताकर प्रचारित कर रही है। लेकिन अराकान आर्मी और अन्य जातीय सशस्त्र समूहों ने इसका बहिष्कार करने की कसम खाई है, और जंटा ने कथित विरोधियों की गिरफ्तारियां तेज कर दी हैं।
म्यांमार में 2021 के सैन्य तख्तापलट के बाद से गृहयुद्ध भड़क गया है। सेना ने लोकतंत्र समर्थक आंग सान सू की की सरकार को उखाड़ फेंका, जिसके बाद पूरे देश में विद्रोह फैल गया। राखाइन राज्य, जहां रोहिंग्या संकट भी लंबे समय से चला आ रहा है, अब अराकान आर्मी के साथ जंटा के बीच युद्ध का केंद्र बन गया है। मेडिकल संगठन एमएसएफ (डॉक्टर्स विदाउट बॉर्डर्स) ने हमले की निंदा की, कहा कि यह “युद्ध अपराध” का रूप ले रहा है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, हमले में 10 मरीजों की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि कई घायल गंभीर रूप से जख्मी हैं। स्थानीय मीडिया और बचाव टीमों ने मलबे से शव निकालने का काम जारी रखा, लेकिन संसाधनों की कमी से राहत कार्य बाधित हो रहा है।
अंतरराष्ट्रीय समुदाय ने इस घटना पर कड़ी प्रतिक्रिया दी। संयुक्त राष्ट्र ने जंटा पर “मानवीय नियमों का उल्लंघन” करने का आरोप लगाया, जबकि यूरोपीय संघ और अमेरिका ने अतिरिक्त प्रतिबंधों की चेतावनी दी। ऑस्ट्रेलिया और कनाडा ने हमले की स्वतंत्र जांच की मांग की। विशेषज्ञों का मानना है कि जंटा के हवाई हमले क्षेत्र में विद्रोह को दबाने की हताशा को दर्शाते हैं, लेकिन इससे नागरिक मौतें बढ़ रही हैं। 2025 में म्यांमार में 5,000 से अधिक नागरिक हताहत हो चुके हैं, और लाखों विस्थापित हो चुके हैं।
यह हमला न केवल चिकित्सा सुविधाओं पर खतरे को रेखांकित करता है, बल्कि पूरे क्षेत्र में शांति प्रयासों को झटका देता है। ASEAN देशों को अब सक्रिय भूमिका निभानी होगी, वरना मानवीय संकट और गहरा सकता है। म्यांमार की जनता अब न्याय और शांति की उम्मीद में बेचैन है, लेकिन जंटा की क्रूरता से वह उम्मीद धुंधली पड़ती जा रही है।