23 जनवरी 2026, बाजार में बड़ी गिरावट, Sensex 770 अंक और निफ्टी 241 अंक टूटा: भारतीय शेयर बाजार ने शुक्रवार को भारी बिकवाली का सामना किया। शुरुआती कारोबार में हल्की तेजी के बाद बाजार लाल निशान में बंद हुआ। सेंसेक्स और निफ्टी दोनों में करीब 1% की गिरावट दर्ज की गई, जिससे निवेशकों की संपत्ति में करीब 6-7 लाख करोड़ रुपये का नुकसान हुआ। यह गिरावट विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली, मिश्रित तिमाही नतीजों और वैश्विक अनिश्चितताओं के कारण आई।
बाजार का समग्र प्रदर्शन
बीएसई सेंसेक्स 769.67 अंकों यानी 0.94% की गिरावट के साथ 81,537.70 पर बंद हुआ। दिन के दौरान यह 82,516 तक चढ़ा था, लेकिन बिकवाली के दबाव में 81,562 तक लुढ़क गया। एनएसई निफ्टी 241.25 अंकों यानी 0.95% टूटकर 25,048.65 पर बंद हुआ। निफ्टी 25,000 के महत्वपूर्ण मनोवैज्ञानिक स्तर से नीचे बंद हुआ, जो निवेशकों के लिए चिंता की बात है।
ब्रॉडर मार्केट में भी कमजोरी दिखी। निफ्टी मिडकैप और स्मॉलकैप इंडेक्स में 1-2% की गिरावट दर्ज की गई। कुल मिलाकर बाजार में 2,800 से ज्यादा शेयर लाल निशान में बंद हुए, जबकि केवल 1,200 शेयरों में तेजी रही।
निवेशकों की संपत्ति में भारी नुकसान
इस एक दिन की गिरावट से बीएसई लिस्टेड कंपनियों का कुल मार्केट कैपिटलाइजेशन करीब 6-7 लाख करोड़ रुपये घट गया। सप्ताह के दौरान कुल नुकसान इससे कहीं ज्यादा रहा। निवेशक बजट से पहले सतर्क हो गए हैं और विदेशी निवेशकों की बिकवाली ने इस गिरावट को और गहरा किया।
साप्ताहिक आधार पर चार महीने की सबसे बड़ी गिरावट
यह सप्ताह भारतीय शेयर बाजार के लिए बेहद खराब रहा। निफ्टी में 2.51% और सेंसेक्स में 2.43% की साप्ताहिक गिरावट दर्ज की गई, जो पिछले चार महीनों में सबसे बड़ी साप्ताहिक गिरावट है। सप्ताह के दौरान निफ्टी करीब 645 अंक और सेंसेक्स 2,032 अंक टूटा। यह गिरावट मुख्य रूप से विदेशी फंड आउटफ्लो, कमजोर तिमाही नतीजों और वैश्विक व्यापार अनिश्चितता के कारण आई।
सेक्टोरल परफॉर्मेंस: ज्यादातर सेक्टर लाल निशान में
बाजार में व्यापक बिकवाली देखने को मिली। रियल्टी, पीएसयू बैंक, ऑटो और आईटी को छोड़कर लगभग सभी सेक्टर इंडेक्स 1-4% तक गिरे।
- सबसे ज्यादा गिरावट: अडानी ग्रुप से जुड़े सेक्टर और हेवीवेट शेयरों में। रियल्टी इंडेक्स 3% से ज्यादा टूटा।
- कम गिरावट वाले सेक्टर: मेटल और कुछ फार्मा शेयरों में मामूली तेजी या कम गिरावट रही।
- निफ्टी के 50 शेयरों में से करीब 40 लाल निशान में बंद हुए।
टॉप गेनर्स और लूजर्स
गिरते बाजार में कुछ शेयरों ने निवेशकों को राहत दी, जबकि कई बड़े शेयरों में भारी बिकवाली हुई।
टॉप लूजर्स (निफ्टी 50 में):
- अडानी एंटरप्राइजेज: -10.76%
- अडानी पोर्ट्स: -4.16% से ज्यादा
- इटरनल: -4.87%
- इंटरग्लोब एविएशन (इंडिगो): -4%
- सिप्ला, पावर ग्रिड, एक्सिस बैंक आदि में 1-2% गिरावट
टॉप गेनर्स: कुल मिलाकर गेनर्स की संख्या कम रही, लेकिन कुछ शेयरों जैसे डॉ रेड्डीज लैब्स, टेक महिंद्रा और चुनिंदा फाइनेंशियल शेयरों में मामूली तेजी दर्ज की गई।
गिरावट के प्रमुख कारण
- विदेशी निवेशकों की बिकवाली — जनवरी महीने में अब तक एफआईआई ने 31,000 करोड़ रुपये से ज्यादा की बिकवाली की है। 22 जनवरी को भी वे नेट सेलर रहे।
- मुनाफावसूली — पिछले दिनों की तेजी के बाद निवेशकों ने मुनाफा बुक किया।
- मिश्रित Q3 नतीजे — कई कंपनियों के नतीजे उम्मीद से कमजोर रहे, जिससे सेंटिमेंट प्रभावित हुआ।
- वैश्विक अनिश्चितता — अमेरिकी टैरिफ नीतियों और व्यापार तनाव की खबरों ने ग्लोबल मार्केट को प्रभावित किया, जिसका असर भारतीय बाजार पर पड़ा।
- कमजोर रुपया — रुपया डॉलर के मुकाबले रिकॉर्ड निचले स्तर के करीब कारोबार कर रहा है।
- बजट से पहले सतर्कता — आगामी बजट को लेकर निवेशक सतर्क हैं।
ग्लोबल मार्केट का असर
एशियाई और यूरोपीय मार्केट मिश्रित रहे। अमेरिकी मार्केट में भी ट्रंप प्रशासन की संभावित टैरिफ नीतियों को लेकर चिंता बनी हुई है। गिफ्ट निफ्टी सुबह पॉजिटिव संकेत दे रहा था, लेकिन दिन में बिकवाली हावी हो गई।
आगे की दिशा: क्या कहते हैं विशेषज्ञ?
विशेषज्ञों का मानना है कि बाजार में फिलहाल दबाव बना रहेगा। निफ्टी का महत्वपूर्ण सपोर्ट 24,800-25,000 के स्तर पर है। अगर यह टूटता है तो और गिरावट आ सकती है। दूसरी ओर डीआईआई की खरीदारी और बजट में पॉजिटिव घोषणाएं रिकवरी का ट्रिगर बन सकती हैं।
अगले सप्ताह कई बड़ी कंपनियों के नतीजे और बजट से पहले के संकेत बाजार की दिशा तय करेंगे। निवेशकों को सलाह है कि वे बड़े शेयरों में सतर्क रहें और क्वालिटी स्टॉक्स पर फोकस करें।
निष्कर्ष: 23 जनवरी 2026 का कारोबारी सत्र भारतीय शेयर बाजार के लिए निराशाजनक रहा। लगातार बिकवाली और वैश्विक अनिश्चितता ने बाजार को कमजोर किया। हालांकि लंबे समय में भारतीय अर्थव्यवस्था की बुनियाद मजबूत है, लेकिन फिलहाल अस्थिरता बनी रह सकती है। निवेशक अपने पोर्टफोलियो की समीक्षा करें और रिस्क मैनेजमेंट पर ध्यान दें।
Sources: रॉयटर्स, NSE वेबसाइट, BSE वेबसाइट