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4 जनवरी 2026, Maduro की कैद और ट्रंप का ‘अमेरिकी शासन’ का ऐलान– लैटिन अमेरिका की राजनीति में एक ऐसा तूफान उठा है जो पूरी दुनिया को हिला रहा है। संयुक्त राज्य अमेरिका ने शनिवार रात को वेनेजुएला की राजधानी काराकास में सैन्य अभियान चलाकर राष्ट्रपति निकोलास Maduro और उनकी पत्नी सिसिलिया फ्लोर्स को कैद कर लिया। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रविवार सुबह व्हाइट हाउस से संबोधन में ऐलान किया, “Maduro एक नार्को-डिक्टेटर था, जो ड्रग तस्करी और भुखमरी के जरिए अपने लोगों को कुचल रहा था। हमने न्याय किया है। अब अमेरिका वेनेजुएला को चलेगा – तेल उत्पादन बढ़ेगा, अर्थव्यवस्था संभलेगी और लोकतंत्र लौटेगा।” यह बयान न केवल वेनेजुएला को अमेरिकी छत्रछाया में धकेल रहा है, बल्कि वैश्विक स्तर पर बहस छेड़ रहा है: क्या यह मुक्ति है या साम्राज्यवाद का नया अध्याय?

वेनेजुएला का संकट पुराना है। 2013 से Maduro का शासन तेल-समृद्ध इस देश को हाइपरइन्फ्लेशन (लाखों प्रतिशत), खाद्य संकट और राजनीतिक दमन की चपेट में झोंक चुका है। संयुक्त राष्ट्र के आंकड़ों के मुताबिक, 80 लाख से अधिक वेनेजुएलावासी शरणार्थी बन चुके हैं। अमेरिका ने 2019 में Maduro को ‘अवैध’ घोषित कर जुआन गुएडो को समर्थन दिया था, लेकिन गुएडो की विफलता के बाद तनाव चरम पर पहुंचा। ट्रंप के दूसरे कार्यकाल (2024 चुनावों के बाद) में वेनेजुएला को ‘राष्ट्रीय सुरक्षा खतरा’ करार दिया गया, खासकर रूस-चीन के प्रभाव और ड्रग तस्करी के आरोपों के कारण। पेंटागन के अनुसार, यह ‘सर्जिकल स्ट्राइक’ थी, जिसमें स्पेशल फोर्सेस ने ड्रोन और हेलीकॉप्टरों से Maduro को 30 मिनट में पकड़ लिया। उन्हें न्यूयॉर्क के डिटेंशन सेंटर ले जाया गया, जहां ड्रग तस्करी के मुकदमे की तैयारी है।

ट्रंप का ‘अमेरिकी शासन’ का ऐलान ट्रांजिशन गवर्नमेंट की स्थापना का संकेत देता है, जिसमें अमेरिकी सलाहकार तेल क्षेत्रों का प्रबंधन करेंगे। लेकिन सवाल उठता है: ट्रंप का कहना और करना में कितना फर्क है? ट्रंप ने 2016 अभियान में ‘अमेरिका फर्स्ट’ का नारा दिया था, जो विदेशी हस्तक्षेपों से परहेज का वादा करता था। फिर भी, 2025 में क्यूबा पर प्रतिबंध बढ़ाने और ईरान पर हमलों के बाद यह तीसरा बड़ा कदम है। आलोचक कहते हैं कि ट्रंप के वादे (जैसे ‘कोई नई जंग नहीं’) सिर्फ चुनावी जुमले थे। वास्तव में, उनका प्रशासन तेल कंपनियों (एक्सॉनमोबिल जैसी) के हितों को प्राथमिकता दे रहा है – वेनेजुएला के 300 अरब बैरल तेल भंडार पर नजर है। ट्रंप ने कहा, “हम जीवन बचा रहे हैं,” लेकिन वाशिंगटन पोस्ट की रिपोर्ट्स बताती हैं कि पहले ही 20 से अधिक नागरिक हताहत हो चुके हैं। यह फर्क ट्रंप की ‘ट्रांजेक्शनल डिप्लोमेसी’ को उजागर करता है: कहने में शांति, करने में आक्रमण।

वैश्विक प्रतिक्रियाएं: समर्थन और निंदा

दुनिया दो खेमों में बंट गई है। Maduro के समर्थक रूस और चीन ने तीखी निंदा की। रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने इसे “अमेरिकी साम्राज्यवाद की वापसी” कहा और संयुक्त राष्ट्र में जवाबी प्रस्ताव पेश किया। चीन ने आर्थिक प्रतिबंधों की धमकी दी, जबकि ईरान ने “लैटिन अमेरिका के खिलाफ युद्ध” घोषित कर दिया। क्यूबा ने आपातकाल लगाया और Maduro को “शहीद” करार दिया। ये प्रतिक्रियाएं रूस-चीन के ‘मल्टीपोलर वर्ल्ड’ के एजेंडे से जुड़ी हैं, जहां अमेरिकी वर्चस्व को चुनौती दी जा रही है।

दूसरी ओर, लैटिन अमेरिकी पड़ोसी ब्राजील, कोलंबिया और कनाडा ने सतर्क समर्थन जताया। ब्राजील के राष्ट्रपति लूला ने कहा, “Maduro का अंत जरूरी था, लेकिन संक्रमण में सहयोग करेंगे।” ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर ने “न्यायपूर्ण कार्रवाई” की सराहना की, लेकिन “शांतिपूर्ण संक्रमण” की मांग की। यूरोपीय संघ ने 5 करोड़ यूरो की मानवीय सहायता का ऐलान किया, लेकिन अंतरराष्ट्रीय कानून की जांच की वकालत की। संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने आपात बैठक बुलाई, जहां ‘जिनेवा कन्वेंशन का उल्लंघन’ बहस का केंद्र है। ओपेक में हलचल मच गई – तेल कीमतें 6% गिर गईं, क्योंकि बाजार को उत्पादन बढ़ोतरी की उम्मीद है। लेकिन WOLA (वॉशिंगटन ऑफिस ऑन लैटिन अमेरिका) जैसी संस्थाओं ने चेताया कि यह “खतरनाक मिसाल” सेट कर रहा है।

भविष्य की चुनौतियां: संक्रमण या संघर्ष?

वेनेजुएला में अराजकता व्याप्त है। काराकास की सड़कों पर Maduro समर्थक ‘यांकी गो होम’ के नारे लगा रहे हैं, जबकि विपक्षी उत्सव मना रहे हैं। पूर्व अंतरिम राष्ट्रपति जुआन गुएडो ने ट्वीट किया, “लोकतंत्र की जीत, लेकिन अमेरिकी हस्तक्षेप पर सतर्क रहें।” मानवीय संकट गहरा सकता है – भोजन और दवा की कमी से लाखों प्रभावित। अमेरिका ने 15 करोड़ डॉलर की सहायता का वादा किया, लेकिन विशेषज्ञ चेताते हैं कि बिना स्थानीय सहमति के यह विफल होगा।

ट्रंप के कहने और करने में फर्क यहां स्पष्ट है। उन्होंने ‘तेज संक्रमण’ का वादा किया, लेकिन इतिहास गवाह है: 1954 में ग्वाटेमाला और 1989 में पनामा जैसे हस्तक्षेप लंबे गुरिल्ला युद्धों में बदल गए। वेनेजुएला में चावेज समर्थक विद्रोह छेड़ सकते हैं, जो क्षेत्रीय युद्ध को जन्म दे सकता है। अर्थव्यवस्था के लिए अवसर हैं – तेल उत्पादन 3 लाख से 10 लाख बैरल प्रतिदिन हो सकता है, लेकिन भ्रष्टाचार और प्रतिबंधों से जूझना पड़ेगा। यदि ट्रंप के कार्य वादों पर खरे न उतरे – जैसे पहले ईरान डील तोड़ना – तो यह ‘संक्रमण’ संघर्ष में बदल सकता है। न्यूयॉर्क कोर्ट में Maduro का मुकदमा फरवरी से शुरू होगा, जहां 25 साल की सजा संभव है, लेकिन इससे राजनीतिक अस्थिरता बढ़ेगी।

ट्रंप की ‘अमेरिका फर्स्ट’ नीति वास्तव में ‘अमेरिका कंट्रोल’ साबित हो रही है। उनके पहले कार्यकाल में कोविड हैंडलिंग में वादे (जल्दी वैक्सीन) और वास्तविकता (देरी) का फर्क था; अब वेनेजुएला में भी यही पैटर्न दिख रहा है। विश्लेषक कहते हैं कि तेल हितों के चलते ट्रंप लंबे हस्तक्षेप को जस्टिफाई करेंगे, भले ही अमेरिकी सैनिकों की जान पर बने।

संक्षेप में, Maduro की कैद ने वेनेजुएला को अमेरिकी युग में धकेल दिया है, लेकिन वैश्विक निंदा, संक्रमण की चुनौतियां और ट्रंप के वादों-कार्यों का फर्क भविष्य को अनिश्चित बना रहा है। क्या यह शांति लाएगा या नया युद्ध? दुनिया सांस थामे देख रही है।

Sources: CNN, US Department of War, The New York Times, Al Jazeera

By Mohd Abdush Shahid

Mohd Abdush Shahid is Founder and content creator at www.views24.in, specializing in news analysis, feature reporting, and in-depth storytelling. With a keen eye for detail and a passion for uncovering impactful narratives, Mohd Abdush Shahid delivers trusted, engaging content that keeps readers informed and inspired.

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