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21 जनवरी 2026, Bihar में जमीन मापी अभियान को मिली रफ्तार: बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने राज्य में लंबे समय से लंबित जमीन मापी (भूमि मापन) के आवेदनों को जल्द निपटाने का बड़ा ऐलान किया है। उन्होंने निर्देश दिया है कि 31 जनवरी 2026 तक सभी लंबित आवेदनों का निस्तारण विशेष भूमि मापी अभियान के जरिए कर दिया जाए। इसके अलावा, 1 अप्रैल 2026 से नई व्यवस्था लागू होगी, जिसमें अविवादित जमीन की मापी 7 दिनों में और विवादित मामलों की 11 दिनों में पूरी की जाएगी। यह कदम राज्य में भूमि विवादों को कम करने और किसानों को पारदर्शी, समयबद्ध सुविधा देने की दिशा में महत्वपूर्ण है।

सीएम का ऐलान और अभियान का उद्देश्य

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने मंगलवार को उच्चस्तरीय बैठक में यह घोषणा की। उन्होंने कहा कि भूमि विवाद बिहार में अपराधों का प्रमुख कारण हैं और इनकी जड़ पुराने, अस्पष्ट रिकॉर्ड में है। विशेष अभियान चलाकर सभी लंबित आवेदनों का निपटारा किया जाएगा। डिप्टी सीएम विजय कुमार सिन्हा ने भी इस मुहिम को गति देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। सरकार का लक्ष्य है कि आम नागरिकों, खासकर किसानों को जमीन मापी में होने वाली देरी से मुक्ति मिले।

लंबित मामलों की स्थिति और चुनौतियां

बिहार में लाखों-करोड़ों जमीन मापी और म्यूटेशन (दाखिल-खारिज) के आवेदन वर्षों से लंबित हैं। पुराने सर्वे (आखिरी बड़ा सर्वे 100 साल पहले हुआ था) और राजस्व कर्मियों की कमी मुख्य कारण हैं। कई मामलों में आवेदन के बाद महीनों-वर्षों इंतजार करना पड़ता है, जिससे विवाद बढ़ते हैं। नवादा जैसी घटनाएं इसी का परिणाम हैं। अब विशेष अभियान में अतिरिक्त कर्मी तैनात किए जाएंगे, कैंप लगाए जाएंगे और डिजिटल टूल्स का इस्तेमाल बढ़ाया जाएगा।

नई व्यवस्था से क्या बदलेगा?

1 अप्रैल 2026 से लागू नई समयसीमा के तहत:

  • अविवादित जमीन: मापी 7 दिनों में पूरी।
  • विवादित जमीन: 11 दिनों में निपटारा।
  • मापी रिपोर्ट ऑनलाइन अपलोड होगी, जिससे पारदर्शिता बढ़ेगी।
  • बिहार भूमि पोर्टल पर आवेदन और ट्रैकिंग आसान होगी।

यह ‘सात निश्चय-3’ योजना का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य भूमि सर्वेक्षण को आधुनिक बनाना है। ड्रोन सर्वे, GIS मैपिंग और डिजिटल रिकॉर्ड का उपयोग बढ़ेगा। इससे किसान आसानी से बैंक लोन ले सकेंगे, सरकारी योजनाओं का लाभ मिलेगा और संपत्ति का सही मूल्यांकन होगा।

किसानों और ग्रामीणों पर प्रभाव

बिहार की अर्थव्यवस्था कृषि प्रधान है और जमीन सबसे बड़ी संपत्ति। लंबित मापी से किसान बंटवारे, बिक्री या लोन में अड़चन महसूस करते हैं। इस अभियान से लाखों किसानों को राहत मिलेगी। ग्रामीण क्षेत्रों में विशेष शिविर लगाए जाएंगे, जहां राजस्व अधिकारी मौके पर मापी करेंगे। महिलाओं और गरीब परिवारों को प्राथमिकता दी जाएगी। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे भूमि विवादों में 50% तक कमी आ सकती है, जो राज्य में अपराध दर को भी कम करेगा।

आगे की राह

सरकार ने जनता से सुझाव भी मांगे हैं। अभियान की सफलता राजस्व विभाग की तैयारी और कर्मियों की ईमानदारी पर निर्भर करेगी। अगर यह लक्ष्य हासिल हुआ तो बिहार अन्य राज्यों के लिए मिसाल बनेगा। भूमि रिकॉर्ड का डिजिटलीकरण और समयबद्ध निपटारा ग्रामीण विकास की कुंजी है।

नीतीश कुमार का यह ऐलान बिहार के लाखों किसानों और ग्रामीणों के लिए नई उम्मीद है। 31 जनवरी तक लंबित मामलों का निपटारा और अप्रैल से नई व्यवस्था से भूमि विवादों का स्थायी समाधान संभव है। यह कदम न केवल प्रशासनिक सुधार है, बल्कि सामाजिक सद्भाव और आर्थिक विकास की दिशा में बड़ा कदम है।

Sources: हिंदुस्तान

By Mohd Abdush Shahid

Mohd Abdush Shahid is Founder and content creator at www.views24.in, specializing in news analysis, feature reporting, and in-depth storytelling. With a keen eye for detail and a passion for uncovering impactful narratives, Mohd Abdush Shahid delivers trusted, engaging content that keeps readers informed and inspired.

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