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3 जनवरी 2026, Kishanganj में ग्रामीणों का विरोध– बिहार के Kishanganj जिले में विकास की राह में एक बार फिर ग्रामीणों का गुस्सा फूट पड़ा है। ठाकुरगंज प्रखंड के छैतल पंचायत अंतर्गत गेदडी गांव में महानंदा नदी के किनारे प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना (PMGSY) के चरण तीन के तहत चल रहे सड़क निर्माण कार्य को ग्रामीणों ने बांस लगाकर अवरुद्ध कर दिया। उनकी मुख्य मांग है – नदी पर एक मजबूत और बड़ा पुल। प्रस्तावित 5 मीटर लंबे छोटे ब्रिज को वे अपर्याप्त मानते हैं, जबकि पुराना पुल 10 मीटर लंबा और चार बॉक्स वाला होने से वे बड़े पुल की जिद पर अड़े हैं। “पहले पुल तो फिर काम” का नारा लगाते हुए ग्रामीणों ने दोगच्छी तक का मार्ग बंद कर दिया, जिससे ठाकुरगंज के पश्चिमी इलाके के हजारों लोगों की आवाजाही प्रभावित हो गई। यह घटना न केवल स्थानीय विकास पर ब्रेक लगाती है, बल्कि महानंदा नदी के पुराने विवाद को फिर से उजागर करती है, जो वर्षों से क्षेत्रवासियों की जान-माल के लिए खतरा बनी हुई है।

घटना का पूरा विवरण: विरोध की शुरुआत और तनाव

शुक्रवार को सुबह होते ही गेदडी गांव के ग्रामीण सड़क निर्माण स्थल पर इकट्ठा हो गए। टॉप लाइन इन्फ्रा प्रोजेक्ट प्रा. लि., कटिहार की टीम द्वारा 8.590 किलोमीटर लंबी इस सड़क का निर्माण 9 करोड़ 53 लाख रुपये की लागत से हो रहा था। लेकिन जैसे ही मजदूरों ने काम शुरू किया, ग्रामीणों ने बांस और लकड़ी के अवरोधक लगाकर रास्ता रोक लिया। पूर्व मुखिया मुस्ता हसन उर्फ प्रिंस ने बताया, “महानंदा नदी के समीप होने के कारण प्रत्येक बरसात में सैकड़ों एकड़ फसलें डूब जाती हैं। पुराने पुल की जर्जर स्थिति से वाहन चालक अक्सर दुर्घटनाग्रस्त होकर अस्पताल पहुंच रहे हैं। हम छोटे पुल से सहमत नहीं हैं।” मो. हबीब, फिरोज आलम, वार्ड सदस्य शोयेब आलम और रहीमुद्दीन जैसे ग्रामीणों ने भी एकजुट होकर कहा कि सर्वे में गलती हुई है, जिससे प्रस्तावित ब्रिज नदी की चौड़ाई के अनुरूप नहीं है।

ग्रामीण कार्य विभाग के कनीय अभियंता सीजिम महाराणा कुमार ने मौके पर पहुंचकर ग्रामीणों को समझाने की कोशिश की। उन्होंने स्वीकार किया कि DPR (डिटेल्ड प्रोजेक्ट रिपोर्ट) में प्रावधानित पुल ही बनेगा, लेकिन सर्वे में त्रुटि की बात मान ली। “टेंडर के बाद मेरी तैनाती हुई है। ग्रामीण लिखित शिकायत दें, ताकि उच्च अधिकारियों को अवगत कराया जा सके,” उन्होंने कहा। हालांकि, ग्रामीणों ने शिकायत का वादा तो किया, लेकिन विरोध जारी रखने का ऐलान कर दिया। इस दौरान कोई हिंसक घटना नहीं हुई, लेकिन तनाव बरकरार है।

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि: महानंदा पुल का पुराना दर्द

महानंदा नदी पर पुल का मुद्दा Kishanganj के लिए कोई नई बात नहीं है। अंग्रेज काल का बना यह पुल ठाकुरगंज को नेपाल सीमा से जोड़ने वाली लाइफलाइन है। 2021 में स्थानीय विधायक इजहारूल ने पथ निर्माण विभाग के सचिव को पत्र लिखकर पुल के चौड़ीकरण और बारानी घाट पर नया पुल बनाने की मांग की थी। उसी साल अगस्त में खड़खड़ी-भेरभेरी इलाके में महापंचायत हुई, जहां RJD, AIMIM और JDU के नेता शामिल हुए। ग्रामीणों ने ठाकुरगंज और पोठिया प्रखंडों को जोड़ने के लिए पुल की मांग की, क्योंकि नदी पार करने के लिए वे जान जोखिम में डालते हैं।

बाढ़ इस क्षेत्र की सबसे बड़ी समस्या है। 2022 की बाढ़ में महानंदा, रेतुआ, कनकई और गोरिया नदियों ने दर्जनों पुल-सड़कें क्षतिग्रस्त कर दीं, जिससे ग्रामीणों की मुश्किलें बढ़ गईं। जून 2024 में कनकई और महानंदा को जोड़ने वाला 70 मीटर लंबा ब्रिज ढह गया, जो 10 दिनों में चौथा ऐसा हादसा था। इन घटनाओं ने ग्रामीणों का विश्वास विभाग पर कम कर दिया है। ठाकुरगंज जनहित संघर्ष मोर्चा जैसे संगठन बायपास सड़क और पुल निर्माण के लिए लगातार आंदोलन चला रहे हैं।

ग्रामीणों की पीड़ा: फसलें डूबें, दुर्घटनाएं बढ़ें

यह मार्ग न केवल Kishanganj के पौआखाली, बरचौंधी, जीरनगच्छ, बहादुरगंज और पोठिया क्षेत्रों को जोड़ता है, बल्कि पश्चिम बंगाल के इस्लामपुर तक जाता है। ग्रामीणों के अनुसार, छोटा ब्रिज बाढ़ के दौरान नदी के बहाव को सहन नहीं कर पाएगा, जिससे फसलें और जान-माल का नुकसान होगा। “हर मानसून में हमारी मेहनत की कमाई पानी में बह जाती है। पुराना पुल टूटने की कगार पर है, फिर भी विभाग सुस्त है,” शोयेब आलम ने गुस्से में कहा। दुर्घटनाओं का सिलसिला भी थम नहीं रहा – हाल के महीनों में कई वाहन नदी में गिर चुके हैं। आर्थिक रूप से कमजोर यह क्षेत्र कृषि पर निर्भर है, जहां पुल की कमी से बाजार तक पहुंच मुश्किल हो जाती है।

अधिकारियों का रुख: शिकायत पर कार्रवाई का वादा

ग्रामीण कार्य विभाग ने विरोध को गंभीरता से लिया है। EE (AE) ने बताया कि DPR में सुधार संभव है, लेकिन इसके लिए उच्च स्तरीय समीक्षा जरूरी। DM कीर्ति शर्मा ने कहा, “ग्रामीणों की चिंताओं को समझा जाएगा। जल्द ही सर्वे टीम भेजी जाएगी।” हालांकि, ग्रामीणों को आशंका है कि वादे कागजों तक सीमित रहेंगे। पथ निर्माण विभाग ने भी पुराने पुल के चौड़ीकरण का प्रस्ताव रखा है, लेकिन फंडिंग की कमी बाधा बनी हुई है।

व्यापक प्रभाव: विकास और सुरक्षा पर सवाल

यह विरोध Kishanganj जैसे सीमावर्ती जिले के विकास मॉडल पर सवाल खड़े करता है। नेपाल और बंगाल से सटा ठाकुरगंज आर्थिक रूप से महत्वपूर्ण है, लेकिन बुनियादी ढांचे की कमी से निवेश प्रभावित हो रहा है। यदि सड़क निर्माण लंबा खिंचा, तो 9 करोड़ का प्रोजेक्ट प्रभावित होगा, जो ग्रामीण अर्थव्यवस्था को झटका देगा। साथ ही, बाढ़ प्रबंधन में भी कमी उजागर हुई है। विशेषज्ञों का मानना है कि नदी के खनन पर रोक लगाने की जरूरत है, जो धारा बदलने का कारण बन रहा है।

निष्कर्ष: संवाद से समाधान की उम्मीद

ग्रामीणों का यह आंदोलन विकास की प्रक्रिया को रोकने का नहीं, बल्कि उसे मजबूत बनाने का प्रयास है। विभाग को तत्काल सर्वे सुधारकर बड़े पुल का प्रावधान करना चाहिए। यदि शिकायत पर कार्रवाई हुई, तो यह न केवल महानंदा के तटवासियों की सुनवाई होगी, बल्कि बिहार के ग्रामीण विकास का नया मॉडल बनेगा। आने वाले दिनों में DM स्तर पर बैठक बुलाई जा सकती है, जहां ग्रामीणों की मांगें सुनी जाएंगी। फिलहाल, गेदडी का मार्ग बंद है, लेकिन उम्मीद जगी है कि संवाद से पुल बनेगा और सड़क चलेगी।

Sources: दैनिक भास्कर, हिंदुस्तान

By Mohd Abdush Shahid

Mohd Abdush Shahid is Founder and content creator at www.views24.in, specializing in news analysis, feature reporting, and in-depth storytelling. With a keen eye for detail and a passion for uncovering impactful narratives, Mohd Abdush Shahid delivers trusted, engaging content that keeps readers informed and inspired.

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