10 दिसंबर 2025: बिहार में नई सरकार के गठन के बाद शुरू हुई ‘ऑपरेशन बुलडोजर’ की मुहिम ने एक बार फिर हिंसक रूप धारण कर लिया है। सीमांचल के किशनगंज जिले के सदर थाना क्षेत्र के खगड़ा स्थित कालू चौक मेला ग्राउंड पर मंगलवार को अतिक्रमण हटाने पहुंची नगर परिषद की टीम पर स्थानीय लोगों ने जमकर हमला बोल दिया। आक्रोशित भीड़ ने लाठी-डंडों, पत्थरों और धारदार हथियारों से हल्ला बोला, जिसमें अमीन, जेसीबी चालक समेत तीन लोग गंभीर रूप से घायल हो गए। बुलडोजर मशीन को भी क्षतिग्रस्त कर दिया गया। घटना के वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो चुके हैं, जिसमें सर्किल ऑफिसर (सीओ) को भीड़ से बचने के लिए भागते हुए दिखाया गया है।
घटना दोपहर करीब 12 बजे की बताई जा रही है। नगर परिषद की टीम, जिसमें अमीन, जेसीबी चालक और पुलिस बल शामिल था, सरकारी जमीन पर अवैध रूप से बने 60 से अधिक घरों और दुकानों को ध्वस्त करने पहुंची थी। यह कार्रवाई जिला प्रशासन के निर्देश पर की जा रही थी, जिसमें पूर्व में अतिक्रमणकारियों को नोटिस जारी किया गया था। लेकिन जैसे ही जेसीबी ने पहली दुकान को तोड़ना शुरू किया, स्थानीय दुकानदारों और निवासियों ने विरोध शुरू कर दिया। भीड़ ने नारेबाजी करते हुए टीम को घेर लिया और सीओ को लाठी-डंडों से पीटने की कोशिश की। एक प्रत्यक्षदर्शी ने बताया, “लोगों का गुस्सा इतना भड़क गया कि वे सीओ को दौड़ा-दौड़ाकर मारने पर उतारू हो गए। अमीन पर चाकू से वार किया गया, जिससे उसकी हालत गंभीर बनी हुई है।”
हमले में घायल अमीन को सदर अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां डॉक्टरों ने उनकी स्थिति को नाजुक बताया। जेसीबी चालक को सिर में चोट लगी, जबकि तीसरा व्यक्ति मामूली रूप से जख्मी हुआ। पुलिस ने हवा में गोली चलाकर और लाठीचार्ज कर भीड़ को तितर-बितर किया। एसपी मनीष कुमार ने बताया, “घटना के बाद हालात नियंत्रण में हैं। हमलावरों की पहचान कर ली गई है और उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज कर कार्रवाई की जा रही है। अतिक्रमण हटाने का अभियान जारी रहेगा, लेकिन सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए जाएंगे।” जिला मजिस्ट्रेट (डीएम) ने भी कहा कि यह कार्रवाई कानून के दायरे में है और अतिक्रमणकारियों को पहले ही चेतावनी दी गई थी।
यह घटना बिहार में बुलडोजर एक्शन की व्यापक मुहिम का हिस्सा है, जो पटना से लेकर पूर्णिया तक फैली हुई है। नई एनडीए सरकार ने सत्ता संभालते ही अवैध कब्जों के खिलाफ सख्त रुख अपनाया है। कटिहार, सुपौल और शेखपुरा में भी इसी तरह की कार्रवाइयां हुईं, जहां विरोध के बावजूद दर्जनों निर्माण ध्वस्त किए गए। लेकिन किशनगंज की यह घटना सबसे हिंसक साबित हुई, जहां प्रशासनिक टीम को अपनी जान जोखिम में पड़ गई। विपक्षी दलों ने इसे ‘अमानवीय’ बताते हुए निंदा की है। आरजेडी नेता ने कहा, “बिना पर्याप्त नोटिस के कार्रवाई से आम जनता प्रभावित हो रही है। सरकार को संवेदनशीलता दिखानी चाहिए।”
स्थानीय दुकानदारों का कहना है कि ये निर्माण दशकों पुराने हैं और बिना वैकल्पिक व्यवस्था के उन्हें उजाड़ना अन्याय है। एक प्रभावित व्यापारी ने रोते हुए कहा, “हमारी आजीविका छिन गई। सरकार ने नोटिस तो दिया, लेकिन सुनवाई नहीं की।” विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसी कार्रवाइयों से पहले पुनर्वास योजना जरूरी है, वरना सामाजिक तनाव बढ़ेगा।
कुल मिलाकर, किशनगंज का यह बवाल कानून-व्यवस्था पर सवाल खड़े करता है। प्रशासन का दावा है कि अतिक्रमण मुक्त शहर बनाने का लक्ष्य हासिल होगा, लेकिन हिंसा की यह घटना चेतावनी है कि विकास के नाम पर जनता की भावनाओं को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। आने वाले दिनों में अन्य जिलों में भी ऐसी चुनौतियां सामने आ सकती हैं।