29 जनवरी 2026, Kishanganj डॉ. कलाम कृषि महाविद्यालय में ड्रैगन फ्रूट खेती पर तीन दिवसीय प्रशिक्षण शुरू: बिहार के सीमांचल क्षेत्र में कृषि क्रांति की नई पहल के तहत डॉ. कलाम कृषि महाविद्यालय, अर्राबाड़ी (किशनगंज) में ड्रैगन फ्रूट की वैज्ञानिक खेती पर तीन दिवसीय विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम का शुभारंभ हुआ। इस प्रशिक्षण में जिले के विभिन्न प्रखंडों से चुने गए 30 प्रगतिशील किसान भाग ले रहे हैं। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य किसानों को कम पानी और कम देखभाल में अधिक लाभ देने वाली इस विदेशी फसल की उन्नत तकनीकों से अवगत कराना है। बिहार कृषि विश्वविद्यालय, सबौर के सहयोग से आयोजित इस प्रशिक्षण में विशेषज्ञों द्वारा ड्रैगन फ्रूट की प्रजातियों, रोपण, पोषण प्रबंधन, कीट नियंत्रण और कटाई के बाद प्रबंधन पर विस्तार से जानकारी दी जा रही है।
महाविद्यालय के प्राचार्य ने उद्घाटन समारोह में कहा कि ड्रैगन फ्रूट एक कैक्टस परिवार की फसल है, जो सूखा सहन करने वाली है और पारंपरिक फसलों की तुलना में बहुत कम पानी की जरूरत पड़ती है। “यह फसल कम पानी में अधिक लाभ देती है। उचित तकनीक अपनाकर प्रति एकड़ बेहतर उत्पादन और मुनाफा प्राप्त किया जा सकता है।” उन्होंने बताया कि बिहार में जलवायु परिवर्तन और पानी की कमी को देखते हुए ऐसी फसलों को बढ़ावा देना जरूरी है।
प्रशिक्षण कार्यक्रम की विशेषताएं
यह तीन दिवसीय प्रशिक्षण बिहार कृषि विश्वविद्यालय के विस्तार शिक्षा निदेशालय के मार्गदर्शन में आयोजित किया गया है। कार्यक्रम में शामिल प्रमुख विषय हैं:
- ड्रैगन फ्रूट की विभिन्न प्रजातियां (लाल, सफेद, पीली गूदे वाली)
- खेत तैयारी, कटिंग से रोपण विधि और सहारा देने की तकनीक
- ड्रिप सिंचाई से पानी और पोषक तत्व प्रबंधन
- कीट-रोग नियंत्रण और जैविक तरीके
- कटाई, ग्रेडिंग, पैकेजिंग और मार्केटिंग
प्रशिक्षण के दौरान किसानों को व्यावहारिक सत्र भी कराए जा रहे हैं, जिसमें महाविद्यालय के डेमो फार्म में लगे ड्रैगन फ्रूट के पौधों का अवलोकन और हैंड्स-ऑन ट्रेनिंग शामिल है। भाग ले रहे किसानों में से कई ने बताया कि वे पहली बार इस फसल की वैज्ञानिक जानकारी प्राप्त कर रहे हैं। एक किसान ने कहा, “पारंपरिक फसलों से मुश्किल से गुजारा होता है, लेकिन ड्रैगन फ्रूट से अच्छी कमाई की उम्मीद है।”
ड्रैगन फ्रूट खेती के फायदे: कम पानी, अधिक मुनाफा
ड्रैगन फ्रूट (पिटाया या कमलम) मूल रूप से मध्य अमेरिका का फल है, लेकिन अब भारत में तेजी से लोकप्रिय हो रहा है। बिहार में यह फसल विशेष रूप से उपयोगी है क्योंकि:
- कम पानी की जरूरत: कैक्टस प्रजाति होने से यह सूखा प्रतिरोधी है। पारंपरिक फसलों की तुलना में मात्र 1/6 पानी पर्याप्त है। ड्रिप सिंचाई से और बचत होती है।
- उच्च लाभ: एक बार लगाने पर 20-25 साल तक फल देता है। प्रति एकड़ 8-10 टन उत्पादन संभव। बाजार मूल्य 100-300 रुपये प्रति किग्रा तक। प्रति एकड़ सालाना 5-10 लाख तक शुद्ध मुनाफा
- स्वास्थ्य लाभ: विटामिन सी, आयरन, एंटी ऑक्सीडेंट से भरपूर। डायबिटीज, हार्ट और इम्यूनिटी के लिए फायदेमंद।
- कम मेहनत: मवेशी नहीं खाते, कीट कम लगते हैं, और पौधा मजबूत होता है।
बिहार सरकार की ‘ड्रैगन फ्रूट विकास योजना’ के तहत किसानों को प्रति हेक्टेयर 3 लाख रुपये तक सब्सिडी मिल रही है। किशनगंज, पूर्णिया, कटिहार जैसे सीमांचल जिलों में जलवायु और मिट्टी इस फसल के लिए उपयुक्त है। पहले से ही कई किसान सफलतापूर्वक खेती कर रहे हैं।
बिहार में ड्रैगन फ्रूट की बढ़ती लोकप्रियता
बिहार में पिछले कुछ वर्षों में ड्रैगन फ्रूट की खेती तेजी से फैल रही है। गया, नालंदा, कैमूर सहित कई जिलों में किसान लाखों कमा रहे हैं। किशनगंज में डॉ. कलाम कृषि महाविद्यालय लगातार ऐसे प्रशिक्षण आयोजित कर किसानों को सशक्त बना रहा है। पहले भी यहां पांच दिवसीय प्रशिक्षण हो चुके हैं, जिनसे सैकड़ों किसानों को लाभ हुआ। विशेषज्ञों का मानना है कि यह फसल बिहार के किसानों की आय दोगुनी करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।
प्रशिक्षण के समापन पर किसानों को प्रमाण पत्र दिए जाएंगे और आगे फॉलो-अप सपोर्ट भी उपलब्ध कराया जाएगा। यह पहल न केवल किसानों की आर्थिक स्थिति सुधारने बल्कि जल संरक्षण और विविधीकरण की दिशा में भी महत्वपूर्ण कदम है।
Sources: हिंदुस्तान