Kerala LynchingKerala Lynching

22 दिसंबर 2025, Kerala Lynching – Kerala के पालक्कड़ जिले के वलायार क्षेत्र में 20 दिसंबर को एक दिल दहला देने वाली घटना ने पूरे देश को झकझोर दिया। छत्तीसगढ़ के रहने वाले 31 वर्षीय दलित मजदूर रामनारायण बाघेल को स्थानीय लोगों की भीड़ ने ‘बांग्लादेशी घुसपैठिए’ और ‘चोर’ बताकर पीट-पीटकर मार डाला। रामनारायण, जो परिवार का इकलौता कमाने वाला था, बेहतर मजदूरी की तलाश में केरल आया था। घटना का एक वीडियो वायरल हो गया है, जिसमें भीड़ रामनारायण से ‘तुम बांग्लादेशी हो?’ पूछते हुए दिख रही है। मुख्यमंत्री पिनारयी विजयन ने घटना की कड़ी निंदा करते हुए विशेष जांच टीम गठित करने और मृतक के परिवार को 10 लाख रुपये मुआवजा देने का ऐलान किया है। विपक्ष और मानवाधिकार संगठनों ने इसे ‘इस्लामोफोबिया’ और ‘आरएसएस की नफरत राजनीति’ का परिणाम बताया है, जिससे राज्य की राजनीति गरम हो गई है। यह घटना प्रवासी मजदूरों की असुरक्षा और सांप्रदायिक ध्रुवीकरण को उजागर करती है।

घटना की शुरुआत 20 दिसंबर की शाम को अट्टापल्लम इलाके में हुई। रामनारायण, जो सतनामी समाज (अनुसूचित जाति) से ताल्लुक रखते थे, पालक्कड़ में एक निर्माण स्थल पर मजदूरी कर रहे थे। स्थानीय निवासियों ने इलाके में कथित चोरी की अफवाह फैलाई, और रामनारायण को संदेह की नजर से देखा। वायरल वीडियो में दिखता है कि एक भीड़ ने उन्हें घेर लिया और हिंदी में बात करने पर ‘बांग्लादेशी’ का ठप्पा लगा दिया। भीड़ ने लाठियों, डंडों और पत्थरों से उन पर हमला किया। डॉक्टरों के अनुसार, रामनारायण के शरीर पर कोई भी हिस्सा बिना चोट के नहीं बचा – सिर, छाती और पैरों पर गंभीर आघात थे। उन्हें तुरंत कोझीकोड मेडिकल कॉलेज अस्पताल ले जाया गया, जहां रविवार रात को उनकी मौत हो गई। पुलिस ने प्रारंभिक जांच में चार संदिग्धों को गिरफ्तार किया है, लेकिन परिवार ने एससी/एसटी एक्ट के तहत मामला दर्ज करने की मांग की है।

रामनारायण का परिवार छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिले के एक छोटे से गांव में रहता है। 31 वर्षीय रामनारायण पिता की मृत्यु के बाद घर का इकलौता सहारा था। उनकी पत्नी राधा और दो छोटे बच्चे (एक बेटी और एक बेटा) अब अनाथों की तरह रह गए हैं। परिवार के अनुसार, रामनारायण तीन महीने पहले बेहतर कमाई के लिए Kerala आए थे, जहां वे प्रतिदिन 800-1000 रुपये कमाते थे। उनकी बहन ने फोन पर बताया, “भाई ने कहा था कि केरल में काम अच्छा है, लेकिन कभी नहीं सोचा था कि ऐसा अंत होगा। वे शांत स्वभाव के थे, कभी किसी से झगड़ा नहीं किया।” छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने घटना पर शोक व्यक्त करते हुए केंद्रीय गृह मंत्रालय से हस्तक्षेप की मांग की है। दलित संगठनों ने इसे ‘जातिगत हिंसा’ का रूप दिया, जो प्रवासी दलितों पर बढ़ते हमलों की कड़ी है।

मुख्यमंत्री पिनारयी विजयन ने सोमवार को विधानसभा में बयान देते हुए कहा, “यह जघन्य अपराध है, जिसे हम बर्दाश्त नहीं करेंगे। विशेष जांच दल (SIT) गठित किया गया है, जो 15 दिनों में रिपोर्ट देगा। मृतक परिवार को 10 लाख रुपये का मुआवजा और नौकरी का अवसर दिया जाएगा।” विजयन ने इसे ‘आरएसएस और भाजपा की नफरत फैलाने वाली राजनीति’ का नतीजा बताया, जो बांग्लादेशी घुसपैठिए की अफवाहों से प्रेरित है। सीपीएम सरकार ने हमलावरों पर आईपीसी की धारा 302 (हत्या) और अन्य धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज किया है। हालांकि, मानवाधिकार कार्यकर्ताओं ने मुआवजे को अपर्याप्त बताते हुए 25 लाख रुपये की मांग की है। त्रिशूर में एक विरोध प्रदर्शन में वक्ताओं ने कहा, “यह हत्या राज्य में बढ़ते इस्लामोफोबिया का चिंताजनक संकेत है। सरकार को अपराध को सामान्य बनाने की कोशिश बंद करनी चाहिए।”

राजनीतिक प्रतिक्रियाएं तीखी रही हैं। विपक्षी कांग्रेस ने सरकार पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए कहा, “केरल को ‘गोड्स ओन कंट्री’ कहने वाली सरकार प्रवासियों की सुरक्षा कैसे सुनिश्चित करेगी?” राज्य कांग्रेस प्रमुख वीडी सतीशन ने विधानसभा में अविश्वास प्रस्ताव लाने की धमकी दी। भाजपा ने सीएम के बयान को ‘राजनीतिकरण’ बताते हुए कहा, “यह स्थानीय विवाद था, न कि सांप्रदायिक। लेकिन दलित की हत्या पर केंद्र सरकार हस्तक्षेप करेगी।” राष्ट्रीय स्तर पर, राहुल गांधी ने ट्वीट कर कहा, “दलित भाई की हत्या हृदय विदारक है। न्याय मिलना चाहिए।” आरएसएस से जुड़े संगठनों ने इनकार किया, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि बांग्लादेशी प्रवासियों पर बढ़ते हमले ‘हेट स्पीच’ से प्रेरित हैं।

यह घटना केरल की छवि को धूमिल कर रही है, जहां प्रवासी मजदूर आर्थिक विकास का आधार हैं। राज्य में 40 लाख से अधिक प्रवासी हैं, ज्यादातर उत्तर भारत से। 2024 में ही दो इसी तरह की घटनाएं हुईं, जहां मजदूरों को ‘बाहरी’ बताकर निशाना बनाया गया। सेंटर फॉर डेवलपमेंट स्टडीज की रिपोर्ट के अनुसार, सांप्रदायिक ध्रुवीकरण ने प्रवासियों की असुरक्षा बढ़ा दी है। विशेषज्ञ प्रोफेसर ए.के. रामकृष्णन ने कहा, “यह हत्या न केवल जातिगत, बल्कि क्षेत्रीय पूर्वाग्रह का प्रतीक है। सरकार को जागरूकता अभियान चलाना चाहिए।” परिवार ने न्याय की गुहार लगाई है, और छत्तीसगढ़ से प्रतिनिधिमंडल केरल आने की तैयारी कर रहा है।

कुल मिलाकर, रामनारायण की हत्या प्रवासी मजदूरों के लिए एक चेतावनी है। सीएम का ऐलान सांत्वना देता है, लेकिन सख्त कार्रवाई ही असली न्याय होगा। क्या Kerala अपनी ‘प्रगतिशील’ छवि बरकरार रख पाएगा? यह सवाल राज्य के भविष्य पर मंडरा रहा है।

Sources: इंडियन एक्सप्रेस

By SHAHID

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