Karpuri Thakur Kisan Samman Nidhi YojnaKarpuri Thakur Kisan Samman Nidhi Yojna

4 फरवरी 2026, Karpuri Thakur किसान सम्मान निधि योजना: बिहार सरकार ने 3 फरवरी 2026 को विधानसभा में पेश किए गए 2026-27 के बजट में किसानों के लिए एक महत्वपूर्ण योजना की घोषणा की है। इस योजना का नाम ‘जननायक कर्पूरी ठाकुर किसान सम्मान निधि योजना’ रखा गया है, जो राज्य के लाखों किसानों को आर्थिक सहायता प्रदान करने का उद्देश्य रखती है। इस योजना के तहत, प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि (पीएम किसान) के लाभार्थी किसानों को राज्य सरकार की ओर से अतिरिक्त 3,000 रुपये प्रति वर्ष दिए जाएंगे। इस प्रकार, कुल सहायता राशि 6,000 रुपये से बढ़कर 9,000 रुपये हो जाएगी। यह कदम बिहार के कृषि क्षेत्र को मजबूत करने और किसानों की आय को बढ़ाने की दिशा में एक बड़ा प्रयास है।

योजना की पृष्ठभूमि और महत्व


कर्पूरी ठाकुर, जिन्हें जननायक के रूप में जाना जाता है, बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री थे। वे सामाजिक न्याय, पिछड़े वर्गों के उत्थान और किसानों के अधिकारों के लिए संघर्ष करने वाले एक प्रमुख नेता थे। उनका जन्म 1924 में हुआ था और उन्होंने बिहार की राजनीति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। ठाकुर जी ने गरीबों और किसानों के लिए कई सुधार किए, जैसे आरक्षण नीति को मजबूत करना। इस योजना का नाम उनके नाम पर रखना न केवल उनकी स्मृति को सम्मान देता है, बल्कि यह दर्शाता है कि सरकार किसानों के कल्याण को कितनी गंभीरता से ले रही है।

बिहार एक कृषि प्रधान राज्य है, जहां लगभग 70% आबादी कृषि पर निर्भर है। हालांकि, बाढ़, सूखा और अपर्याप्त सिंचाई जैसी समस्याओं के कारण किसानों को अक्सर आर्थिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। पीएम किसान योजना पहले से ही किसानों को 6,000 रुपये की वार्षिक सहायता प्रदान करती है, लेकिन राज्य सरकार ने महसूस किया कि यह पर्याप्त नहीं है। इसलिए, इस नई योजना के माध्यम से अतिरिक्त सहायता देकर किसानों की आय को बढ़ाने का प्रयास किया जा रहा है। यह योजना न केवल आर्थिक मदद देगी, बल्कि किसानों में आत्मविश्वास भी जगाएगी और उन्हें आधुनिक कृषि तकनीकों को अपनाने के लिए प्रोत्साहित करेगी।

योजना के प्रमुख विवरण


इस योजना के तहत, बिहार के लगभग 73 से 74 लाख किसान लाभान्वित होंगे। योग्यता के लिए, किसान को पीएम किसान योजना का लाभार्थी होना आवश्यक है। राज्य सरकार की ओर से दी जाने वाली 3,000 रुपये की राशि तीन किस्तों में वितरित की जाएगी, अर्थात प्रत्येक किस्त में 1,000 रुपये। यह राशि प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण (डीबीटी) के माध्यम से सीधे किसानों के बैंक खातों में जमा की जाएगी, जिससे पारदर्शिता सुनिश्चित होगी और भ्रष्टाचार की संभावना कम होगी।
योजना की शुरुआत बजट सत्र में वित्त मंत्री विजेंद्र प्रसाद यादव द्वारा की गई। उन्होंने कहा कि यह योजना चुनावी वादों का हिस्सा थी, जिसे जदयू-बीजेपी गठबंधन ने अपने संकल्प पत्र में शामिल किया था। बजट में इस योजना के लिए पर्याप्त धनराशि का प्रावधान किया गया है, जो राज्य की अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में मदद करेगा। इसके अलावा, योजना कृषि क्षेत्र में निवेश को बढ़ावा देगी, जैसे सिंचाई सुविधाओं का विस्तार, संग्रहण इकाइयों का निर्माण और प्रसंस्करण इकाइयों का विकास। सरकार ने एग्री-इंफ्रास्ट्रक्चर में 1 लाख करोड़ रुपये के निवेश की भी घोषणा की है, जो किसानों को बाजार तक पहुंच आसान बनाएगी।

किसानों पर प्रभाव और लाभ


यह योजना बिहार के किसानों के लिए एक बड़ा कदम है। अतिरिक्त 3,000 रुपये से किसान बीज, खाद और उपकरण खरीद सकेंगे, जिससे उत्पादकता बढ़ेगी। विशेष रूप से छोटे और सीमांत किसानों के लिए यह सहायता जीवन बदलने वाली साबित हो सकती है। उदाहरण के लिए, पूर्णिया जिले जैसे क्षेत्रों में, जहां यूजर स्थित हैं, कृषि मुख्य आजीविका है। यहां के किसान धान, गेहूं और सब्जियों की खेती करते हैं, और यह योजना उन्हें मौसमी चुनौतियों से निपटने में मदद करेगी।
इसके अलावा, योजना से राज्य की अर्थव्यवस्था पर सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा। बढ़ी हुई आय से किसान अधिक खर्च करेंगे, जो ग्रामीण बाजारों को मजबूत करेगा। कृषि उत्पादन में वृद्धि से खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित होगी और निर्यात की संभावनाएं बढ़ेंगी। सरकार का लक्ष्य अगले पांच वर्षों में प्रति व्यक्ति आय को दोगुना करना है, और यह योजना उस दिशा में एक महत्वपूर्ण योगदान देगी।
हालांकि, योजना की सफलता उसके क्रियान्वयन पर निर्भर करेगी। पिछले अनुभवों से सीखते हुए, सरकार को सुनिश्चित करना चाहिए कि सभी योग्य किसानों को लाभ मिले और कोई विलंब न हो। किसानों को योजना के बारे में जागरूक करने के लिए अभियान चलाए जाने चाहिए, विशेष रूप से ग्रामीण क्षेत्रों में।

अन्य संबंधित पहल और चुनौतियां


बजट में किसानों के लिए अन्य घोषणाएं भी की गई हैं, जैसे जैविक खेती को बढ़ावा देना और कृषि ऋणों में छूट। वाल्मीकि टाइगर रिजर्व में बाघों की संख्या बढ़ने से पर्यावरण संरक्षण को भी बल मिला है, जो अप्रत्यक्ष रूप से कृषि को प्रभावित करता है। लेकिन चुनौतियां भी हैं, जैसे जलवायु परिवर्तन और बाजार मूल्यों में उतार-चढ़ाव। सरकार को इन पर ध्यान देना होगा।

कर्पूरी ठाकुर किसान सम्मान निधि योजना बिहार के किसानों के लिए एक उम्मीद की किरण है। यह न केवल आर्थिक सहायता प्रदान करेगी, बल्कि सामाजिक न्याय की भावना को भी मजबूत करेगी। सरकार के इस कदम से राज्य की कृषि अर्थव्यवस्था नई ऊंचाइयों को छू सकती है। किसानों को इस योजना का लाभ उठाने के लिए अपने दस्तावेज अपडेट रखने चाहिए और स्थानीय अधिकारियों से संपर्क करना चाहिए। कुल मिलाकर, यह योजना बिहार को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित होगी।

Sources: दैनिक जागरण

By Mohd Abdush Shahid

Mohd Abdush Shahid is Founder and content creator at www.views24.in, specializing in news analysis, feature reporting, and in-depth storytelling. With a keen eye for detail and a passion for uncovering impactful narratives, Mohd Abdush Shahid delivers trusted, engaging content that keeps readers informed and inspired.

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