18 फरवरी 2026, जम्मू-कश्मीर ने Ranji Trophy फाइनल में पहली बार जगह बनाई: जम्मू और कश्मीर क्रिकेट टीम ने भारतीय घरेलू क्रिकेट के इतिहास में एक सुनहरा अध्याय जोड़ दिया है। रणजी ट्रॉफी 2025-26 सीजन के सेमीफाइनल में उन्होंने दो बार की चैंपियन बंगाल को 6 विकेट से हराकर पहली बार फाइनल में जगह बनाई। यह उपलब्धि 67 साल पुरानी है, क्योंकि जम्मू-कश्मीर ने 1959-60 सीजन में रणजी ट्रॉफी में डेब्यू किया था, लेकिन कभी फाइनल तक नहीं पहुंच पाया था। बंगाल क्रिकेट एकेडमी ग्राउंड में खेला गया यह मैच जम्मू-कश्मीर के लिए सपनों जैसा रहा, जहां टीम ने हर चुनौती को पार किया और इतिहास रच दिया।
मैच का परिदृश्य और महत्वपूर्ण प्रदर्शन
बंगाल ने पहली पारी में 328 रन बनाए, जिसमें सुदिप कुमार घरामी ने 146 रनों की शानदार पारी खेली। जम्मू-कश्मीर के तेज गेंदबाज औकिब नबी ने 5/87 लेकर टीम को मजबूत स्थिति में रखा। जवाब में जम्मू-कश्मीर की पहली पारी 302 रनों पर सिमटी, जिसमें अब्दुल समद ने 82 रनों की उपयोगी पारी खेली और औकिब नबी ने 42 रन जोड़े। मोहम्मद शमी ने करियर बेस्ट 8/90 लेकर बंगाल को वापसी का मौका दिया, लेकिन जम्मू-कश्मीर ने हार नहीं मानी।
दूसरी पारी में बंगाल पूरी तरह ढह गई और सिर्फ 99 रन पर ऑलआउट हो गई। औकिब नबी ने फिर कमाल दिखाया और 4/36 लेकर मैच में कुल 9 विकेट (5+4) झटके। सुनील कुमार ने भी 4/27 लेकर बंगाल के मिडिल ऑर्डर को तोड़ा। इस तरह जम्मू-कश्मीर को जीत के लिए सिर्फ 126 रनों का लक्ष्य मिला।
चेज में जम्मू-कश्मीर ने 34.4 ओवर में 4 विकेट खोकर लक्ष्य हासिल कर लिया। वंशज शर्मा ने नाबाद 43 रन बनाए, जबकि अब्दुल समद ने नाबाद 30 रन (27 गेंदों में) की तेज पारी खेली। दोनों के बीच 55 रनों की अटूट साझेदारी ने मैच खत्म किया। एक खास पल तब आया जब समद ने वंशज को छक्का मारकर मैच खत्म करने का मौका दिया, जो टीम की एकजुटता का प्रतीक रहा।
ऐतिहासिक संदर्भ और टीम का सफर
जम्मू-कश्मीर ने 67 साल और 325 मैचों के बाद पहली बार फाइनल में जगह बनाई। टीम ने इस सीजन में शानदार प्रदर्शन किया—ग्रुप स्टेज में मुंबई से हार के बाद राजस्थान, दिल्ली और हैदराबाद पर जीत दर्ज की। क्वार्टरफाइनल में भी औकिब नबी ने 12 विकेट लेकर टीम को सेमीफाइनल पहुंचाया। सेमीफाइनल में उनका 9 विकेट मैच का टर्निंग पॉइंट रहा। औकिब इस सीजन में 55 विकेट लेकर जम्मू-कश्मीर के पहले गेंदबाज बने जिन्होंने एक रणजी सीजन में 50+ विकेट लिए।
कप्तान परास डोगरा की रणनीति, युवा खिलाड़ियों का जोश और अनुभवी अब्दुल समद (आईपीएल स्टार) का योगदान निर्णायक रहा। यह जीत हिमालयी क्षेत्र की पहली टीम के रूप में फाइनल पहुंचने का गौरव भी दिलाती है।
प्रतिक्रियाएं और उत्सव
जीत के बाद जम्मू-कश्मीर कैंप में खुशी की लहर दौड़ गई। खिलाड़ी मैदान पर जमकर जश्न मनाते दिखे। जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री ओमार अब्दुल्ला ने टीम को बधाई दी और कहा, “यह पूरी टीम और सपोर्ट स्टाफ की सफलता है।” क्रिकेट जगत में भी इस ऐतिहासिक जीत की सराहना हुई। कई पूर्व खिलाड़ियों ने इसे “फेयरीटेल रन” बताया।
जम्मू-कश्मीर अब फाइनल में कर्नाटक (या उत्तराखंड, जहां कर्नाटक मजबूत स्थिति में है) से भिड़ेगा। फाइनल 24 फरवरी से शुरू होगा। यह मैच जम्मू-कश्मीर के लिए ट्रॉफी जीतने का सुनहरा मौका है।
यह सिर्फ एक मैच की जीत नहीं, बल्कि जम्मू-कश्मीर क्रिकेट के विकास की कहानी है। औकिब नबी जैसे उभरते सितारे, अब्दुल समद की आक्रामकता और टीम की एकजुटता ने साबित किया कि छोटे राज्य भी बड़े मुकाम हासिल कर सकते हैं। 67 साल का इंतजार खत्म हुआ, अब फाइनल में इतिहास रचने की बारी है। जम्मू-कश्मीर क्रिकेट फैंस के लिए यह दिन हमेशा यादगार रहेगा।
Sources: ESPN क्रिकइन्फो