Jalalgarh-Kishanganj new rail line projectJalalgarh-Kishanganj new rail line project

17 फरवरी 2026, Jalalgarh-Kishanganj नई रेल लाइन परियोजना: बिहार के सीमांचल क्षेत्र के लिए एक लंबे इंतजार के बाद खुशखबरी आई है। जलालगढ़-किशनगंज नई ब्रॉड गेज रेल लाइन परियोजना, जो 2008-09 के रेल बजट में घोषित हुई थी, अब 17 साल बाद फिर से सक्रिय हो गई है। हाल ही में इसकी अपडेटेड डिटेल्ड प्रोजेक्ट रिपोर्ट (DPR) रेलवे बोर्ड को भेजी गई है, और अनुमानित लागत अब ₹1852 करोड़ तक पहुंच गई है। यह परियोजना न केवल किशनगंज जिले को मजबूत रेल कनेक्टिविटी देगी, बल्कि पूरे सीमांचल (पूर्णिया, अररिया, किशनगंज और पड़ोसी क्षेत्रों) के आर्थिक-सामाजिक विकास में बड़ा बदलाव लाएगी।

परियोजना का इतिहास और देरी के कारण

यह परियोजना 2008-09 में तत्कालीन रेल मंत्री लालू प्रसाद यादव के कार्यकाल में शामिल की गई थी। शुरुआती अनुमानित लागत मात्र ₹360 करोड़ (कुछ स्रोतों में ₹282.92 करोड़) थी, और लंबाई लगभग 50.871 किमी बताई गई। हालांकि, कम ट्रैफिक प्रोजेक्शन, फंड की कमी और प्रशासनिक सुस्ती के कारण यह प्रोजेक्ट ठंडे बस्ते में चला गया। 2019 में रेलवे बोर्ड ने इसे अबेयेंस में डाल दिया था, जिसका मतलब था कि कोई नया खर्च या काम नहीं किया जाएगा।

2024 में रेलवे बोर्ड ने इसे डी-फ्रीज करने का फैसला किया (DO Letter No. 2024/W-1/NFR/NL/Jalalgarh-Kishanganj/14 dated 13.06.2024)। इसके बाद फाइनल लोकेशन सर्वे (FLS) की तैयारी शुरू हुई, जिसकी टारगेट डेट 15 मई 2025 थी। 2025-26 के यूनियन बजट में इस परियोजना (और कुर्सेला-बिहारिगंज के साथ) के लिए ₹170.8 करोड़ का आवंटन किया गया, जो रिवाइवल की दिशा में पहला बड़ा कदम था। फरवरी 2026 तक DPR अपडेट होकर बोर्ड को सौंपी गई, और लागत बढ़कर ₹1852 करोड़ हो गई – यह बढ़ोतरी भूमि अधिग्रहण, मुद्रास्फीति, डिजाइन बदलाव और नई तकनीक के कारण हुई है।

परियोजना की मुख्य विशेषताएं

  • लंबाई: 51.632 किमी (कुछ आधिकारिक दस्तावेजों में 50.871 किमी या 51.87 किमी उल्लेखित)।
  • अनुमानित लागत: ₹1852 करोड़ (Northeast Frontier Railway के अंतर्गत)।
  • रूट: जलालगढ़ (पूर्णिया जिले के पास, कटिहार-पूर्णिया-किशनगंज लाइन पर) से किशनगंज तक। रूट खाताहाट, रौटा, बहादुरगंज, महीनगांव जैसे इलाकों से गुजरेगा।
  • प्रस्तावित नए स्टेशन: कुल 8 नए रेलवे स्टेशन बनेंगे, जिनमें प्रमुख हैं – खाताहाट, रौटा, महीनगांव, बहादुरगंज आदि। ये स्टेशन स्थानीय गांवों और बाजारों को रेल नेटवर्क से जोड़ेंगे।
  • उद्देश्य: यह लाइन ‘चिकन नेक’ (सिलीगुड़ी कॉरिडोर) क्षेत्र के लिए वैकल्पिक रूट बनेगी। वर्तमान में कटिहार-मुकुरिया-किशनगंज मार्ग अतिव्यस्त है, जहां ट्रेनों का दबाव बहुत ज्यादा है। नई लाइन से कटिहार से किशनगंज का सबसे छोटा रास्ता बनेगा, और पूर्णिया प्रमंडल मुख्यालय अपने जिले से सीधे जुड़ेगा।

सीमांचल के लिए क्या मतलब?

सीमांचल क्षेत्र (पूर्णिया, किशनगंज, अररिया, पूर्णिया) बिहार का पिछड़ा लेकिन संभावनाओं से भरा इलाका है। यहां कृषि, व्यापार और सीमा व्यापार (नेपाल के साथ) मुख्य आजीविका हैं। लेकिन रेल कनेक्टिविटी की कमी से विकास रुका हुआ है।

  • आर्थिक लाभ: नई लाइन से माल ढुलाई आसान होगी। कृषि उत्पाद (धान, जूट, मक्का) तेजी से बाजार पहुंचेंगे। रोजगार बढ़ेगा – निर्माण चरण में हजारों मजदूरों को काम मिलेगा, और बाद में स्टेशन/रेल संचालन में स्थानीय नौकरियां।
  • सामाजिक प्रभाव: बेहतर कनेक्टिविटी से शिक्षा, स्वास्थ्य और पर्यटन सुधरेगा। किशनगंज से पूर्णिया, कटिहार और आगे NJP (न्यू जलपाईगुड़ी) तक यात्रा आसान हो जाएगी।
  • रणनीतिक महत्व: यह लाइन पूर्वोत्तर भारत और नेपाल बॉर्डर क्षेत्र की सुरक्षा-कनेक्टिविटी मजबूत करेगी। ‘चिकन नेक’ के लिए बैकअप रूट के रूप में काम करेगी।
  • जमीन की कीमतों में उछाल: DPR की खबर से इलाके में जमीन की कीमतें बढ़ गई हैं। कई लोग इसे ‘रातोंरात अमीर बनने’ का मौका मान रहे हैं, लेकिन सावधानी बरतनी होगी।

वर्तमान स्थिति और आगे का रोडमैप

फिलहाल प्रोजेक्ट प्री-कंस्ट्रक्शन फेज में है। FLS पूरा होने के बाद भूमि अधिग्रहण, टेंडर और निर्माण शुरू होगा। रेलवे बोर्ड से फाइनल अप्रूवल और फंड रिलीज की उम्मीद है। अगर सब सुचारू रहा, तो निर्माण 2-4 साल में पूरा हो सकता है, हालांकि रेल प्रोजेक्ट्स में अक्सर देरी होती है।

सीमांचल के लोग, सांसद और स्थानीय नेता लंबे समय से इसकी मांग कर रहे थे। लोकसभा में भी कई बार चर्चा हुई। अब DPR भेजे जाने से उत्साह है। यह परियोजना बिहार में रेल इंफ्रास्ट्रक्चर के विस्तार का हिस्सा है, जहां 2025-26 में कई नई लाइनों को गति मिली है।

कुल मिलाकर, जलालगढ़-किशनगंज रेल लाइन सीमांचल के लिए ‘गेम चेंजर’ साबित हो सकती है। यह सिर्फ पटरी बिछाने की बात नहीं, बल्कि क्षेत्र के सपनों को जोड़ने की कहानी है। उम्मीद है कि जल्द ही ट्रेनें दौड़ेंगी और सीमांचल का चेहरा बदल जाएगा।

Sources: दैनिक जागरण

By Mohd Abdush Shahid

Mohd Abdush Shahid is Founder and content creator at www.views24.in, specializing in news analysis, feature reporting, and in-depth storytelling. With a keen eye for detail and a passion for uncovering impactful narratives, Mohd Abdush Shahid delivers trusted, engaging content that keeps readers informed and inspired.

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