8 मार्च 2026, Israel ने तेहरान के तेल डिपो और रिफाइनरी पर पहली बार बड़े हमले किए: मिडिल ईस्ट में चल रहे अमेरिका-इज़राइल बनाम ईरान युद्ध के आठवें दिन में ईरान की ओर से गल्फ देशों (सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात, कुवैत, कतर, बहरीन) पर मिसाइल और ड्रोन हमलों का सिलसिला जारी है। यह युद्ध 28 फरवरी 2026 को शुरू हुआ था, जब अमेरिका और इज़राइल ने संयुक्त रूप से ईरान पर बड़े हमले किए, जिसमें ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई सहित कई टॉप IRGC कमांडर्स मारे गए। ईरान ने इसे “अनप्रोवोक्ड एग्रेशन” बताते हुए जवाबी कार्रवाई शुरू की, जिसमें गल्फ देशों को मुख्य निशाना बनाया गया क्योंकि ये देश अमेरिकी सैन्य अड्डों के मेजबान हैं।
ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने अब तक सैकड़ों बैलिस्टिक मिसाइलें, क्रूज मिसाइलें और हजारों ड्रोन लॉन्च किए हैं। गल्फ देशों पर कुल हमलों की संख्या 2,000 से अधिक बताई जा रही है, जिसमें UAE पर सबसे ज्यादा (1,000+ ड्रोन और 200+ मिसाइलें) फोकस रहा है। अधिकांश हमले अमेरिकी एयर बेस जैसे अल उदैद (कतर), अल धफरा (UAE), अली अल सलेम (कुवैत) और प्रिंस सुल्तान एयर बेस (सऊदी अरब) को निशाना बनाकर किए गए। हालांकि, ईरान ने सिविलियन टारगेट्स जैसे होटल, एयरपोर्ट, रेजिडेंशियल बिल्डिंग्स और एनर्जी इंफ्रास्ट्रक्चर पर भी हमले किए, जिससे क्षेत्र में अराजकता फैली।
मौतें और घायल: गल्फ देशों में कुल मौतों की संख्या अभी तक दर्जनों में है, जबकि सैकड़ों घायल हुए हैं। UAE में अब तक 3 मौतें और 78 घायल रिपोर्ट हुए हैं (UAE डिफेंस मिनिस्ट्री के अनुसार), जिसमें पाकिस्तानी, नेपाली और बांग्लादेशी नागरिक शामिल हैं। कुवैत में 2 मौतें और 32 घायल, बहरीन में 2 मौतें और 6 घायल बताए गए हैं। सऊदी अरब में ड्रोन हमलों से कुछ घायल हुए, लेकिन मौतों की पुष्टि कम है। कतर में हालिया हमलों में कोई मौत नहीं, लेकिन एयर डिफेंस सिस्टम सक्रिय रहे। कुल मिलाकर, गल्फ देशों में 10-20 मौतें और 150+ घायल होने की रिपोर्ट्स हैं, ज्यादातर डेब्री या इंटरसेप्शन से। ये आंकड़े बदलते रहते हैं क्योंकि कई हमले इंटरसेप्ट हो जाते हैं, लेकिन फेलियर से सिविलियन एरिया प्रभावित होते हैं।
हमलों का पैटर्न: शुरुआत में बैलिस्टिक मिसाइलों पर फोकस था, लेकिन अब ड्रोन अटैक्स बढ़ गए हैं। NYT के अनुसार, ड्रोन वॉलेज से गल्फ देशों के एयर डिफेंस सिस्टम (जैसे पैट्रियट, THAAD) पर दबाव बढ़ रहा है, क्योंकि ड्रोन सस्ते और ज्यादा संख्या में लॉन्च किए जा सकते हैं। सऊदी अरब ने रियाद के पास और शायबह ऑयलफील्ड पर ड्रोन इंटरसेप्ट किए। UAE में दुबई के मारिना टावर और एयरपोर्ट पर डेब्री गिरने से आग लगी। कतर में अल उदैद बेस पर हमले हुए, जहां अमेरिकी फोर्सेस हैं। बहरीन में मदीना में होटल और रेजिडेंशियल बिल्डिंग्स हिट हुए।
क्षेत्रीय प्रभाव: ये हमले होर्मुज जलडमरूमध्य को प्रभावित कर रहे हैं, जहां 150+ ऑयल टैंकर फंसे हैं और शिपिंग ठप है। तेल कीमतें आसमान छू रही हैं, जिससे वैश्विक अर्थव्यवस्था पर असर पड़ रहा है। गल्फ देशों के एयरपोर्ट (दुबई, अबू धाबी, दोहा) हफ्तों से बंद या सीमित हैं, टूरिज्म और बिजनेस ठप। अमेरिकी स्टेट डिपार्टमेंट ने कई देशों से गैर-जरूरी अमेरिकियों को निकालने का आदेश दिया।
ईरान की तरफ से: ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन ने वीडियो में पड़ोसी देशों से माफी मांगी और कहा कि अगर वे हमला न करें तो ईरान हमले रोक देगा। उन्होंने पड़ोसियों पर “अटैक न करने” की अपील की। हालांकि, IRGC ने “अमेरिकी बेसेज” को निशाना बनाने की कसम खाई है। ईरान का दावा है कि ये हमले “रक्षात्मक” हैं और अमेरिकी-इज़राइली हमलों का जवाब हैं।
अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया: सऊदी, UAE और UAE ने “थ्रेट्स” का मुकाबला करने की बात कही। ट्रंप ने ईरान से “अनकंडीशनल सरेंडर” की मांग दोहराई। चीन और रूस ने युद्ध रोकने की अपील की। विश्लेषकों का कहना है कि ये हमले गल्फ देशों को युद्ध में खींच सकते हैं, जो “नाइटमेयर सिनेरियो” है।
यह युद्ध अब क्षेत्रीय स्तर पर फैल चुका है, जहां गल्फ देश अनिच्छा से शामिल हो रहे हैं। स्थिति तेज बदल रही है—अधिक मौतें, आर्थिक नुकसान और वैश्विक अस्थिरता का खतरा बढ़ता जा रहा है।
Sources: अल-जज़ीरा