18 मार्च 2026, Iran के सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी चीफ अली लारिजानी की शहादत की पुष्टि: अमेरिका-इजराइल के आक्रामक युद्ध के तीसरे सप्ताह में ईरान ने एक और बड़ा बलिदान दिया है। ईरान के सर्वोच्च राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद (Supreme National Security Council) के प्रमुख अली लारिजानी की मौत की आधिकारिक पुष्टि हो गई है। इजराइली हमले में उनके साथ उनके बेटे मोर्तेजा लारिजानी, उनके कार्यालय प्रमुख अलिरेजा बयात और कई सुरक्षा गार्ड भी शहीद हो गए। यह हमला तेहरान के पर्दिस इलाके में हुआ, जहां इजराइल ने precision airstrike का दावा किया।
ईरान की सर्वोच्च राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद ने एक आधिकारिक बयान में लारिजानी को “शहीद” बताया और कहा कि यह कायरतापूर्ण हत्या है। राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन ने भी शोक व्यक्त करते हुए कहा कि यह हमला ईरानी प्रतिरोध को तोड़ने का असफल प्रयास है। लारिजानी, जो 67 वर्ष के थे, ईरान की सुरक्षा और विदेश नीति के केंद्रीय स्तंभ थे। उन्होंने अगस्त 2025 में इस पद संभाला था और पिछले कुछ महीनों में युद्ध की रणनीति बनाने में अहम भूमिका निभाई थी। वे व्यावहारिक दृष्टिकोण (pragmatist) के लिए जाने जाते थे, लेकिन अमेरिका-इजराइल की आक्रामकता के खिलाफ दृढ़ थे।
इससे महज एक दिन बाद इजराइल ने और एक बड़ा दावा किया — ईरान के खुफिया मंत्री (Intelligence Minister) इस्माइल खतीब को भी तेहरान पर हुए हमले में मार गिराया गया है। इजराइली रक्षा मंत्री इजराइल काट्ज ने कहा कि “खतीब को eliminated” कर दिया गया। ईरानी राष्ट्रपति ने खतीब की मौत की पुष्टि करते हुए इसे “कायराना हत्या” करार दिया। यह लगातार तीसरी बड़ी हत्या है — इससे पहले सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह अली खामेनेई की मौत युद्ध के पहले दिन हुई थी।
ईरानी विश्लेषक और अधिकारी इसे राजनीतिक हत्या और युद्ध अपराध मान रहे हैं। लारिजानी ने ठीक एक हफ्ते पहले अमेरिका और इजराइल को चेतावनी दी थी कि ईरानी नेताओं की हत्या से ईरान कमजोर नहीं होगा, बल्कि और मजबूत होगा। उनकी भविष्यवाणी सही साबित हो रही है। तेहरान की सड़कों पर हजारों लोग शोक सभा में जमा हैं, “मौत अमेरिका-इजराइल” और “प्रतिशोध होगा” के नारे लगाते हुए।
युद्ध का संदर्भ और ईरान का दृढ़ प्रतिरोध
यह हमले तब हो रहे हैं जब अमेरिका-इजराइल गठबंधन ईरान पर लगातार बमबारी कर रहा है। साउथ पार्स गैस फील्ड समेत ऊर्जा सुविधाओं को निशाना बनाया गया, जिससे वैश्विक तेल की कीमतें आसमान छू रही हैं। इजराइल का मकसद ईरान की नेतृत्व व्यवस्था को तोड़ना और उसके परमाणु कार्यक्रम तथा मिसाइल क्षमता को नष्ट करना है, लेकिन ईरान ने जवाबी कार्रवाई में इजराइल के तेल अवीव और अन्य इलाकों पर क्लस्टर बम और मिसाइल दागे हैं, जिसमें कई मौतें हुई हैं।
ईरान ने स्पष्ट कहा है कि होर्मुज स्ट्रेट बंद रखा जाएगा और खाड़ी देशों (सऊदी, UAE, कतर) की ऊर्जा सुविधाओं को भी निशाना बनाया जा सकता है अगर वे इजराइल-अमेरिका का साथ देते रहे। ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अरागची ने कहा, “हमारी एक नेता की शहादत से हमारी इच्छाशक्ति नहीं टूटेगी। यह युद्ध जितना लंबा चलेगा, ईरान उतना ही मजबूत होगा।”
लारिजानी की मौत को कई ईरानी नागरिक शहीद की कुर्बानी मान रहे हैं। वे एक अनुभवी नेता थे जिन्होंने संसद स्पीकर, परमाणु वार्ताकार और सुरक्षा सलाहकार के रूप में ईरान की सेवा की। उनके परिवार की राजनीतिक विरासत भी मजबूत है। उनकी हत्या से साफ है कि इजराइल अब ईरान के उच्चतम स्तर के नेताओं को व्यक्तिगत रूप से निशाना बना रहा है — यह न केवल युद्ध का, बल्कि अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन है।
क्षेत्रीय और वैश्विक प्रभाव
इस घटना से मध्य पूर्व में तनाव चरम पर है। लेबनान में हिजबुल्लाह के ठिकानों पर भी इजराइली हमले बढ़े हैं। कई देशों ने ईरान के प्रति सहानुभूति जताई है और इस हत्या की निंदा की। चीन और रूस जैसे देशों ने इसे “खतरनाक escalation” बताया है।
ईरान की जनता और सशस्त्र बलों में गुस्सा बढ़ रहा है। IRGC (इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स) और बसीज फोर्स ने बदला लेने की शपथ ली है। विश्लेषकों का कहना है कि ऐसी हत्याएं ईरान को और एकजुट करेंगी, न कि तोड़ेंगी। लारिजानी जैसे नेता की जगह नए दृढ़ इरादे वाले अधिकारी आ सकते हैं जो प्रतिरोध की नीति को और मजबूत करेंगे।
ईरान ने हमेशा कहा है कि वह आत्मरक्षा का अधिकार रखता है। अमेरिका-इजराइल का यह आक्रमण बिना किसी उकसावे के शुरू हुआ था और अब यह निर्दोष ईरानी नेताओं और नागरिकों की जान ले रहा है। दुनिया को देखना चाहिए कि असली आक्रामक कौन है।
ईरान की मजबूती इस बात में है कि वह सदियों से विदेशी आक्रमणों का सामना करता आया है। लारिजानी की शहादत ईरानी प्रतिरोध की नई मिसाल बनेगी। तेहरान में शोक के साथ-साथ संकल्प भी दिख रहा है — “खून से खून निकलेगा”।
यह युद्ध न केवल ईरान की संप्रभुता पर हमला है, बल्कि पूरे इस्लामी दुनिया और स्वतंत्र राष्ट्रों की आजादी पर भी। ईरान अकेला नहीं है। उसका प्रतिरोध जारी रहेगा और अंत में न्याय की जीत होगी।
Sources: CBS न्यूज़