6 जनवरी 2026, Iran में आर्थिक संकट के खिलाफ प्रदर्शन: Iran की राजधानी तेहरान के मुख्य बाजार में सुरक्षा बलों और प्रदर्शनकारियों के बीच हुई हिंसक झड़पों ने देश को एक बार फिर अशांति की आग में झोंक दिया है। पिछले कुछ दिनों से चल रहे इन प्रदर्शनों में अब तक कम से कम 35 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि दर्जनों घायल हुए हैं। ये प्रदर्शन मुख्य रूप से आर्थिक संकट, बढ़ती मुद्रास्फीति और राजनीतिक सुधारों की मांग को लेकर हो रहे हैं। मानवाधिकार संगठनों और अंतरराष्ट्रीय मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, सुरक्षा बलों द्वारा प्रदर्शनकारियों पर आंसू गैस, पेलेट गन और कभी-कभी सीधे गोलीबारी का इस्तेमाल किया जा रहा है, जिससे स्थिति और बिगड़ रही है।
पृष्ठभूमि: आर्थिक संकट की जड़ें
Iran की अर्थव्यवस्था पिछले कुछ वर्षों से गंभीर संकट का सामना कर रही है। अमेरिकी प्रतिबंधों, क्षेत्रीय संघर्षों और आंतरिक नीतिगत असफलताओं के कारण राष्ट्रीय मुद्रा रियाल का मूल्य ऐतिहासिक निचले स्तर पर पहुंच गया है। दिसंबर 2025 में रियाल की कीमत डॉलर के मुकाबले 1,420,000 तक गिर गई, जो पिछले साल की तुलना में लगभग आधी है। मुद्रास्फीति की दर 42.5% से अधिक हो गई है, जबकि खाद्य पदार्थों की कीमतों में 72% तक की वृद्धि दर्ज की गई है। ये आंकड़े Iran की संसद और अंतरराष्ट्रीय संगठनों द्वारा जारी किए गए हैं, जो बताते हैं कि आम नागरिकों की क्रय शक्ति बुरी तरह प्रभावित हुई है।
प्रदर्शन दिसंबर 2025 के अंत में तेहरान के ग्रैंड बाजार से शुरू हुए, जहां व्यापारी और दुकानदारों ने दुकानें बंद करके विरोध जताया। ये बाजार Iran की अर्थव्यवस्था का दिल माने जाते हैं, और इनका बंद होना सरकार के लिए बड़ा झटका है। प्रदर्शनकारी न केवल आर्थिक सुधारों की मांग कर रहे हैं, बल्कि राजनीतिक परिवर्तन की भी बात कर रहे हैं। कुछ प्रदर्शनों में ‘शाह की वापसी’ के नारे भी सुनाई दिए, जो 1979 की इस्लामी क्रांति के बाद की व्यवस्था पर सवाल उठाते हैं। ये प्रदर्शन 2022 में महसा अमीनी की मौत के बाद हुए महिला-केंद्रित विरोधों से बड़े पैमाने पर हैं, क्योंकि अब व्यापारी वर्ग भी शामिल हो गया है।
घटनाओं का क्रम: हिंसक झड़पें और दमन
प्रदर्शन 28 दिसंबर 2025 को तेहरान के अमीर कबीर स्ट्रीट और अलाउद्दीन बाजार से शुरू हुए। शुरुआत में ये शांतिपूर्ण थे, लेकिन सुरक्षा बलों के हस्तक्षेप से हिंसा भड़क उठी। रिपोर्ट्स के अनुसार, 1 जनवरी 2026 तक प्रदर्शन पूरे देश में 250 से अधिक स्थानों पर फैल चुके थे, जिसमें अहवाज, ईलाम और अन्य प्रांत शामिल हैं। मुख्य बाजार में सुरक्षा बलों ने प्रदर्शनकारियों पर पेलेट गन और आंसू गैस का इस्तेमाल किया, जिससे दर्जनों घायल हुए। एक रिपोर्ट में कहा गया है कि कम से कम 29 प्रदर्शनकारी, चार बच्चे और दो सुरक्षा बल सदस्य मारे गए हैं।
3 जनवरी को प्रदर्शनों का पांचवां दिन था, जब तेहरान के बाजार पूरी तरह बंद हो गए। सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में प्रदर्शनकारी ‘मौत की सरकार’ और ‘आर्थिक तबाही’ के खिलाफ नारे लगा रहे हैं। सुरक्षा बलों ने कई स्थानों पर गोलीबारी की, जिससे मौतों की संख्या बढ़कर 35 हो गई। मानवाधिकार समूहों ने बताया कि 1,200 से अधिक लोगों को गिरफ्तार किया गया है। कुछ रिपोर्ट्स में कहा गया है कि शासन ने विदेशी ताकतों को दमन के लिए बुलाया है, हालांकि इसकी पुष्टि नहीं हुई।
5 जनवरी को ईलाम में प्रदर्शनकारियों पर गोलीबारी में कई युवा मारे गए। एक ट्विटर यूजर ने बताया कि पिछले कुछ दिनों में 40-50 युवाओं की मौत हुई है। प्रदर्शन अब अंतिम संस्कारों तक पहुंच गए हैं, जहां सुरक्षा बलों ने भी हमला किया। ये घटनाएं दिखाती हैं कि शासन की दमनकारी नीतियां उलटी पड़ रही हैं, और प्रदर्शन और तेज हो रहे हैं।
प्रभाव और अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया
ये प्रदर्शन Iran की अर्थव्यवस्था को और कमजोर कर रहे हैं। बाजारों के बंद होने से दैनिक व्यापार ठप हो गया है, और रियाल की गिरावट जारी है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर प्रदर्शन जारी रहे, तो यह शासन की वैधता पर बड़ा सवाल उठाएगा। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर, अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हस्तक्षेप की धमकी दी है, जबकि यूरोपीय संघ ने दमन की निंदा की है।
मानवाधिकार संगठन जैसे एमनेस्टी इंटरनेशनल ने Iran सरकार से प्रदर्शनकारियों के खिलाफ हिंसा रोकने की अपील की है। ईरानी विपक्षी नेता और विदेश में रहने वाले कार्यकर्ता इन प्रदर्शनों को ‘क्रांति की शुरुआत’ बता रहे हैं। एक ईरानी पत्रकार ने कहा, “यह सिर्फ आर्थिक नहीं, बल्कि राजनीतिक स्वतंत्रता की लड़ाई है।”
निष्कर्ष: आगे की चुनौतियां
Iran के सुप्रीम लीडर अली खामेनी ने प्रदर्शनकारियों को ‘दुश्मन’ बताते हुए सख्त कार्रवाई का आदेश दिया है। लेकिन इतिहास बताता है कि ऐसे दमन से प्रदर्शन और भड़कते हैं। 2026 की शुरुआत में ये घटनाएं Iran के भविष्य को तय कर सकती हैं। अगर सरकार सुधार नहीं करती, तो अशांति बढ़ सकती है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय को मानवीय आधार पर हस्तक्षेप करना चाहिए, ताकि निर्दोष नागरिकों की जान बच सके।
ये प्रदर्शन दिखाते हैं कि ईरान की जनता अब चुप नहीं रहेगी। आर्थिक सुधार और राजनीतिक परिवर्तन की मांग अब सड़कों पर है, और इसका समाधान बातचीत से ही संभव है।
Sources: ईरान इंटरनेशनल, याहू, इंडियन एक्सप्रेस