3 जनवरी 2026, सहरसा विधायक IP Gupta गुप्ता का ऐलान- बिहार की राजनीति में एक नया विवाद खड़ा हो गया है, जब उत्तराखंड के एक बीजेपी नेता की महिलाओं पर की गई कथित अमर्यादित टिप्पणी ने पूरे राज्य को झकझोर दिया। इस घटना पर सहरसा से विधायक और इंडियन इन्क्लूसिव पार्टी (IIP) के राष्ट्रीय अध्यक्ष इंद्रजीत प्रसाद गुप्ता (IP Gupta) ने एक अभूतपूर्व कदम उठाते हुए 10 लाख रुपये का इनाम घोषित कर दिया है। उन्होंने कहा कि जो भी व्यक्ति उत्तराखंड के इस नेता को पकड़कर बिहार लाएगा, उसे यह राशि दी जाएगी। यह ऐलान न केवल बिहार की महिलाओं की गरिमा की रक्षा का प्रतीक है, बल्कि राजनीतिक साहस का भी उदाहरण पेश करता है। इस रिपोर्ट में हम इस विवाद की पूरी पड़ताल करेंगे, जिसमें पृष्ठभूमि, प्रतिक्रियाएं और इसके व्यापक प्रभाव शामिल हैं।
विवाद की पृष्ठभूमि: एक वीडियो जो बन गया आग का गोला
सारा विवाद तब शुरू हुआ जब उत्तराखंड सरकार में महिला सशक्तीकरण एवं बाल विकास मंत्री रेखा आर्या के पति गिरधारी लाल साहू का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। यह वीडियो अल्मोड़ा जिले के एक सार्वजनिक कार्यक्रम का था, जहां साहू स्थानीय युवकों से शादी-विवाह के संदर्भ में बात कर रहे थे। उन्होंने कहा, “शादी के लिए लड़की बिहार से ले आओ, वहां 20-25 हजार रुपये में आसानी से लड़कियां मिल जाती हैं।” यह बयान सुनते ही हंगामा मच गया। बिहार में इसे महिलाओं के अपमान के रूप में देखा गया, जो न केवल बिहारी बेटियों की छवि को धूमिल करता है, बल्कि पूरे समाज की संवेदनशीलता पर सवाल खड़े करता है।
वीडियो वायरल होते ही बिहार में आक्रोश की लहर दौड़ पड़ी और महिलाएं सड़कों पर उतर आईं। गिरधारी लाल साहू ने बाद में सफाई देते हुए माफी मांगी, लेकिन यह काफी न था। बिहार राज्य महिला आयोग ने इस बयान का स्वतः संज्ञान लिया और उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को पत्र लिखकर तत्काल कार्रवाई की मांग की। आयोग की अध्यक्ष अप्सरा ने पत्र में इसे “बेहद शर्मनाक, निंदनीय और अपमानजनक” करार दिया। उन्होंने कहा कि ऐसी टिप्पणियां महिलाओं के सशक्तिकरण के खिलाफ हैं और सख्त कानूनी कदम उठाए जाने चाहिए। यह घटना न केवल बिहार-उत्तराखंड के बीच तनाव पैदा कर रही है, बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर महिलाओं की गरिमा को लेकर बहस छेड़ रही है।
IP Gupta का ऐलान: साहस या राजनीतिक स्टंट?
इस विवाद के बीच सहरसा विधायक IP Gupta ने एक ऐसा ऐलान किया, जो राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बन गया। फेसबुक लाइव और सोशल मीडिया पोस्ट के माध्यम से उन्होंने घोषणा की, “गिरधारी लाल साहू को पकड़कर बिहार लाने वाले व्यक्ति को हम 10 लाख रुपये का इनाम देंगे। चाहे वह कोई आम नागरिक हो या पुलिसकर्मी।” गुप्ता ने स्पष्ट किया कि यह इनाम बिहार की महिलाओं के अपमान का बदला नहीं, बल्कि न्याय की मांग है। उन्होंने कहा, “पूरे बिहार की महिलाओं के लिए इससे बड़ी अपमानजनक बात नहीं हो सकती। यह सिर्फ बिहार की महिलाओं की ही बात नहीं है। महिला तो महिला होती है। चाहे वह बिहार की हो या बंगाल की या महाराष्ट्र की। भारत में महिलाओं का सर्वोच्च स्थान है। वह सृष्टि की जननी है। उनके विरुद्ध अमर्यादित टिप्पणी बर्दाश्त नहीं की जाएगी।”
IP Gupta का यह बयान सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। उनके फेसबुक पेज पर हजारों लाइक्स और शेयर मिले, जबकि कई यूजर्स ने इसे “साहसिक कदम” बताया। IP Gupta, जो IIP के संस्थापक हैं, बिहार की राजनीति में एक नया चेहरा हैं। वे सहरसा से विधायक चुने गए हैं और दलित-ओबीसी समुदाय के मुद्दों पर मुखर रहते हैं। उनका यह ऐलान राजनीतिक स्टंट तो लग सकता है, लेकिन यह बिहार की महिलाओं की भावनाओं को आवाज देता है। उन्होंने आगे कहा, “माफी मांगने से ऐसी बातें खत्म नहीं होतीं। ऐसे लोगों को सजा मिलना ही चाहिए। हम बिहार की मिट्टी का सम्मान करेंगे और किसी को भी अपमानित नहीं होने देंगे।”
राजनीतिक प्रतिक्रियाएं: पक्ष-विपक्ष में बवाल
IP Gupta के ऐलान ने राजनीतिक दलों को दो गुटों में बांट दिया। विपक्षी राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी प्रसाद यादव, जो फिलहाल विदेश यात्रा पर हैं, ने सोशल मीडिया पर बीजेपी पर निशाना साधा। उन्होंने ट्वीट किया, “बीजेपी नेताओं की यही सोच रही है। बिहार की बेटियों को बाजार की वस्तु समझना उनकी मानसिकता को उजागर करता है।” तेजस्वी ने उत्तराखंड सरकार से कार्रवाई की मांग की और कहा कि यह बीजेपी की महिलावादी छवि पर सवाल उठाता है।
दूसरी ओर, सत्ताधारी दल जेडीयू और बीजेपी के प्रवक्ताओं ने भी बयान की निंदा की। केंद्रीय मंत्री जीतनराम मांझी ने इसे “गलत और असंवेदनशील” बताया। उन्होंने कहा, “बच्ची की शादी में कीमत लगाना सही नहीं होता। उत्तराखंड की बीजेपी सरकार को इस पर तुरंत कार्रवाई करनी चाहिए।” जेडीयू के एक प्रवक्ता ने कहा कि यह व्यक्तिगत बयान है, लेकिन पार्टी स्तर पर इसका विरोध किया जाएगा। बीजेपी बिहार इकाई ने भी आधिकारिक बयान जारी कर कहा कि पार्टी ऐसी टिप्पणियों का समर्थन नहीं करती। हालांकि, IP Gupta के इनाम वाले ऐलान पर बीजेपी ने चुप्पी साध रखी है, जो विवाद को और गहरा रहा है।
महिला संगठनों ने भी IP Gupta का समर्थन किया। ऑल इंडिया डेमोक्रेटिक विमेंस एसोसिएशन (AIDWA) की बिहार इकाई ने कहा कि यह ऐलान महिलाओं के हक की लड़ाई में एक मील का पत्थर है। एक कार्यकर्ता ने बताया, “हम सहरसा में प्रदर्शन करेंगे और उत्तराखंड सरकार से न्याय मांगेंगे।”
व्यापक प्रभाव: महिलाओं की गरिमा और अंतरराज्यीय संबंध
यह विवाद केवल एक बयान तक सीमित नहीं है। यह बिहार की प्रवासी महिलाओं की स्थिति, अंतरराज्यीय संबंधों और राजनीतिक नैतिकता पर सवाल खड़े करता है। बिहार से उत्तराखंड में हजारों प्रवासी हैं, जो मजदूरी या नौकरी के सिलसिले में जाते हैं। साहू का बयान इन प्रवासियों की छवि को और खराब करता है, जिससे सामाजिक तनाव बढ़ सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसी घटनाएं चुनावी राजनीति को प्रभावित करेंगी, खासकर जब बिहार विधानसभा चुनाव नजदीक हैं।
महिला आयोग की कार्रवाई एक सकारात्मक कदम है। यदि उत्तराखंड सरकार एक्शन लेती है, तो यह राष्ट्रीय स्तर पर महिलाओं के सम्मान को मजबूत करेगा। लेकिन IP Gupta का ऐलान सवाल पैदा करता है: क्या यह कानूनी तरीके से संभव है? कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि इनाम घोषणा व्यक्तिगत हो सकती है, लेकिन गिरफ्तारी पुलिस का काम है। फिर भी, यह जनभावना को जागृत करने में सफल रहा है।
निष्कर्ष: न्याय की मांग जारी रहेगी
IP Gupta का 10 लाख का इनाम ऐलान बिहार की महिलाओं के लिए एक संदेश है कि उनका अपमान बर्दाश्त नहीं होगा। यह घटना हमें याद दिलाती है कि राजनीति में शब्दों की ताकत कितनी बड़ी होती है। गिरधारी लाल साहू की माफी पर्याप्त नहीं; सख्त कार्रवाई जरूरी है। बिहार सरकार और केंद्र को इस पर सक्रिय भूमिका निभानी चाहिए। अंत में, IP Gupta जैसे नेताओं का साहस राजनीति को सकारात्मक दिशा दे सकता है। बिहार की बेटियां मजबूत हैं, और उनका सम्मान हर कीमत पर सुरक्षित रहेगा।
Sources: एनडीटीवी, हिंदुस्तान