14 दिसंबर 2025: कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) के वैश्विक दौड़ में भारत ने एक ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की है। स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी के ह्यूमन-सेंटरड आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (HAI) इंस्टीट्यूट द्वारा जारी 2025 AI इंडेक्स रिपोर्ट के अनुसार, भारत AI प्रतिस्पर्धात्मकता में तीसरे स्थान पर पहुंच गया है। ग्लोबल AI वाइब्रेंसी टूल के आधार पर जारी इस रैंकिंग में भारत का स्कोर 21.59 है, जो अमेरिका (78.6) और चीन (36.95) के बाद सबसे ऊंचा है। दक्षिण कोरिया (17.24) और ब्रिटेन (16.64) जैसे विकसित देशों को पीछे छोड़ते हुए भारत ने 2023 में सातवें से तीसरे स्थान पर छलांग लगाई है। यह रिपोर्ट नवंबर 2025 में जारी हुई, जो AI के सामाजिक, आर्थिक और वैश्विक प्रभाव को मापती है। भारत की यह प्रगति उसके विशाल टैलेंट पूल, मजबूत डिजिटल इकोसिस्टम और सरकारी निवेशों का परिणाम है, जो ‘मेक इन इंडिया’ और ‘डिजिटल इंडिया’ जैसी पहलों से प्रेरित है।
रैंकिंग का आधार: सात स्तंभों पर मूल्यांकन
स्टैनफोर्ड की रिपोर्ट ग्लोबल AI वाइब्रेंसी इंडेक्स पर आधारित है, जो सात प्रमुख स्तंभों पर देशों का मूल्यांकन करती है: रिसर्च एंड डेवलपमेंट (पेटेंट और जर्नल पब्लिकेशन्स), जिम्मेदार AI (नैतिक मानक और हानि रोकथाम), इकोनॉमी (निवेश और जॉब मार्केट), टैलेंट (AI शिक्षा कार्यक्रम), पब्लिक ओपिनियन, इंफ्रास्ट्रक्चर, और पॉलिसी एंड गवर्नेंस। इनमें से भारत ने टैलेंट और इंफ्रास्ट्रक्चर में उल्लेखनीय सुधार दिखाया है। उदाहरणस्वरूप, AI से जुड़े शिक्षा कार्यक्रमों में भारत का प्रदर्शन मजबूत रहा, जहां लाखों युवा AI कोर्सेज में नामांकित हैं। रिसर्च में भारत वैश्विक AI पब्लिकेशन्स का 9.2% योगदान देता है, जो 2013 से बढ़ रहा है। हालांकि, पॉलिसी एंड गवर्नेंस में भारत पांच स्थान गिरा, जो नियामक ढांचे को मजबूत करने की आवश्यकता दर्शाता है। #India ranks 3rd globally in AI competitiveness
शीर्ष देशों के स्कोर इस प्रकार हैं: अमेरिका पहले स्थान पर है, जो प्राइवेट इन्वेस्टमेंट ($109 बिलियन), एकेडमिक रिसर्च और AI स्टार्टअप्स में अग्रणी है। चीन दूसरे स्थान पर है, जहां AI पब्लिकेशन्स (23.2%) और पेटेंट्स में नेतृत्व है, और मॉडल परफॉर्मेंस में अमेरिका के साथ अंतर कम हो रहा है (MMLU और HumanEval बेंचमार्क्स पर लगभग समानता)। भारत तीसरे स्थान पर है, उसके बाद दक्षिण कोरिया, ब्रिटेन, सिंगापुर (16.43), स्पेन (16.37), यूएई (16.06), जापान (16.04) और कनाडा (15.56)। छोटे-छोटे उच्च-आय वाले देश जैसे सिंगापुर और यूएई अपनी आकार के अनुपात में बेहतर प्रदर्शन कर रहे हैं, जहां नीतिगत समर्थन और ह्यूमन कैपिटल मजबूत है।
भारत की ताकतें: टैलेंट और इकोसिस्टम का दबदबा
भारत की रैंकिंग उसके विशाल AI टैलेंट पूल पर टिकी है। देश में 3.6 मिलियन से अधिक AI लर्नर्स हैं, जो वैश्विक स्तर पर सबसे अधिक है। बेंगलुरु, हैदराबाद और पुणे जैसे शहर AI हब बन चुके हैं, जहां गूगल, माइक्रोसॉफ्ट और ओपनएआई जैसी कंपनियां निवेश कर रही हैं। रिपोर्ट के अनुसार, भारत का डिजिटल इकोसिस्टम – जिसमें 1.2 बिलियन से अधिक इंटरनेट यूजर्स और UPI जैसी तकनीकें शामिल हैं – AI एडॉप्शन को तेज कर रहा है। 2024 में भारत ने AI जेनरेटिव टूल्स में 3.6 मिलियन नामांकन दर्ज किया, जो करियर स्किल्स को क्रांतिकारी बना रहा है। इसके अलावा, AI पब्लिकेशन्स में भारत का योगदान 9.2% है, जो यूरोप (15.2%) से कम लेकिन तेजी से बढ़ रहा है।
सरकारी पहलें भी महत्वपूर्ण हैं। भारत ने AI के लिए $1.25 बिलियन का वचन दिया है, जो वैश्विक निवेशों की होड़ में शामिल है – कनाडा ($2.4 बिलियन), चीन ($47.5 बिलियन सेमीकंडक्टर फंड), फ्रांस (€109 बिलियन) और सऊदी अरब ($100 बिलियन प्रोजेक्ट ट्रांसेंडेंस)। नेशनल AI स्ट्रैटेजी 2023 और इंडिया AI मिशन इन पहलों को मजबूत कर रहे हैं, जो AI चिप्स, डेटा सेंटर्स और स्टार्टअप्स को बढ़ावा देंगे। रिपोर्ट में उल्लेख है कि 2024 में ग्लोबल AI इन्वेस्टमेंट $33.9 बिलियन रहा, जिसमें जेनरेटिव AI को 18.7% वृद्धि मिली। भारत में AI स्टार्टअप्स की संख्या 3,000 से अधिक हो चुकी है, जो इकोनॉमी पिलर को मजबूत करती है।
चुनौतियां और वैश्विक तुलना
हालांकि, चुनौतियां बरकरार हैं। रिसर्च इंफ्रास्ट्रक्चर को स्केल करने में भारत को कठिनाई हो रही है, जहां अमेरिका और चीन के पास सुपरकंप्यूटर्स और फंडिंग का दबदबा है। पॉलिसी में गिरावट से AI एथिक्स और रेगुलेशन पर सवाल उठते हैं। वैश्विक स्तर पर, अमेरिका 40 नोटेबल AI मॉडल्स के साथ अग्रणी है, जबकि चीन 15 के साथ क्वालिटी गैप कम कर रहा है। भारत अभी मॉडल डेवलपमेंट में पीछे है, लेकिन पब्लिक ओपिनियन में सकारात्मकता ऊंची है – 77% भारतीय AI को लाभकारी मानते हैं, जो इंडोनेशिया (80%) और थाईलैंड (77%) के करीब है।
वैश्विक AI रेस में यह रैंकिंग दर्शाती है कि इनोवेशन अब केवल R&D तक सीमित नहीं, बल्कि पॉलिसी, पब्लिक अवेयरनेस और रिस्पॉन्सिबल AI एडॉप्शन पर निर्भर है। चीन का तेजी से आगे बढ़ना (पब्लिकेशन्स में 23.2%) अमेरिका के लिए चुनौती है, जबकि भारत जैसे उभरते देश गैप्स को भरने का अवसर तलाश रहे हैं।
निष्कर्ष: भविष्य की दिशा
स्टैनफोर्ड रिपोर्ट भारत के लिए एक मील का पत्थर है, जो AI को आर्थिक विकास का इंजन बना सकता है। 2030 तक AI से 1 ट्रिलियन डॉलर का योगदान अपेक्षित है, जो जॉब्स, हेल्थकेयर और एग्रीकल्चर को बदल देगा। हालांकि, इंफ्रास्ट्रक्चर और पॉलिसी में निवेश बढ़ाने की जरूरत है। भारत को ‘विकसित भारत’ के सपने में AI को केंद्रीय बनाना चाहिए। यह रैंकिंग न केवल गर्व का विषय है, बल्कि जिम्मेदारी भी – नैतिक AI सुनिश्चित कर वैश्विक नेतृत्व हासिल करने का। अधिक जानकारी के लिए स्टैनफोर्ड HAI वेबसाइट विजिट करें। भारत AI रेस में तीसरा नहीं, बल्कि भविष्य का पहला बनेगा!