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22 दिसंबर 2025, India-New Zealand – India और New Zealand के बीच लंबे समय से चली आ रही मुक्त व्यापार समझौता (FTA) वार्ता पर आखिरकार मुहर लग गई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनके न्यूजीलैंडी समकक्ष क्रिस्टोफर लक्सन के बीच टेलीफोनिक बातचीत के बाद दोनों देशों ने 22 दिसंबर को समझौते को अंतिम रूप दिया। यह समझौता भारतीय निर्यात को न्यूजीलैंड बाजार में शून्य टैरिफ का लाभ प्रदान करेगा, जिससे 100% भारतीय वस्तुओं को ड्यूटी-फ्री पहुंच मिलेगी। द्विपक्षीय व्यापार को अगले पांच वर्षों में दोगुना करने और 15 वर्षों में 20 अरब डॉलर के निवेश का लक्ष्य रखा गया है। यह भारत का इस वर्ष का तीसरा FTA है, जो वैश्विक व्यापार अस्थिरता के बीच दोनों देशों के आर्थिक संबंधों को मजबूत करेगा। न्यूजीलैंड के दूध उद्योग को संरक्षण देते हुए भारत ने अपनी संवेदनशील क्षेत्रों जैसे डेयरी, चीनी, कॉफी और मसालों की रक्षा की है, जिससे यह सौदा दोनों पक्षों के लिए संतुलित साबित हो रहा है।

समझौते की मुख्य विशेषताएं आकर्षक हैं। New Zealand के विदेश मामलों और व्यापार मंत्रालय (MFAT) के अनुसार, यह FTA वस्तुओं, सेवाओं, निवेश और व्यापार सुगमता पर केंद्रित है। भारतीय निर्यात पर सभी टैरिफ लाइनों को समाप्त किया जाएगा, जिससे टेक्सटाइल, चमड़ा, फुटवियर, इंजीनियरिंग गुड्स, ऑटोमोबाइल, इलेक्ट्रॉनिक्स, मशीनरी, प्लास्टिक, फार्मास्यूटिकल्स और रसायनों जैसे श्रम-गहन और विनिर्माण क्षेत्रों को फायदा होगा। New Zealand को भारत में 95% निर्यात पर टैरिफ में कमी या समाप्ति मिलेगी, जिससे उनके निर्यात में वार्षिक 1.1 से 1.3 अरब डॉलर की वृद्धि की उम्मीद है। भारत का सरल औसत MFN टैरिफ 16.2% से घटकर कार्यान्वयन पर 13.18%, पांच वर्ष बाद 10.30% और दस वर्ष बाद 9.06% हो जाएगा। कुल 70.03% टैरिफ लाइनों पर बाजार पहुंच सुनिश्चित की गई है। कृषि क्षेत्र में भारतीय फल, सब्जियां, कॉफी, मसाले, अनाज और प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थों को बेहतर पहुंच मिलेगी, साथ ही न्यूजीलैंड की कृषि प्रौद्योगिकी से ‘केंद्र ऑफ एक्सीलेंस’ और उत्पादकता साझेदारी की स्थापना होगी।

सेवा क्षेत्र में भी क्रांतिकारी बदलाव हैं। New Zealand को 118 क्षेत्रों में बाजार प्रवेश मिलेगा, जबकि भारत को 106 में। आईटी, आईटी-एनेेबल्ड सेवाएं, वित्त, शिक्षा, पर्यटन और निर्माण जैसे क्षेत्र खुलेंगे। स्वास्थ्य और पारंपरिक चिकित्सा सेवाओं पर एक विशेष अनुलग्नक है। छात्र गतिशीलता और पोस्ट-स्टडी वर्क वीजा पर अनुलग्नक से भारतीय छात्रों को लाभ होगा – कोई संख्यात्मक सीमा नहीं, सप्ताह में 20 घंटे काम की अनुमति, स्नातक (STEM) के लिए तीन वर्ष, मास्टर्स के लिए तीन और पीएचडी के लिए चार वर्ष का वर्क वीजा। वर्किंग हॉलिडे वीजा से प्रति वर्ष 1,000 युवा भारतीयों को न्यूजीलैंड में 12 महीने के लिए मल्टीपल एंट्री मिलेगी। यह युवाओं, विशेषकर महिलाओं और किसानों के लिए अवसरों के द्वार खोलेगा।

एमएसएमई और श्रमिकों के लिए यह सौदा वरदान साबित होगा। टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार, शून्य टैरिफ से एमएसएमई को New Zealand बाजार में प्रतिस्पर्धी बढ़त मिलेगी, खासकर टेक्सटाइल, चमड़ा और फुटवियर जैसे क्षेत्रों में। वर्तमान वित्तीय वर्ष में द्विपक्षीय माल व्यापार 1.3 अरब डॉलर और सेवाओं सहित कुल 2.4 अरब डॉलर रहा, जिसमें सेवाएं 1.24 अरब डॉलर की हैं। यह समझौता नई नौकरियां पैदा करेगा, विशेष रूप से श्रम-गहन क्षेत्रों में। न्यूजीलैंड का 15 वर्षों में 20 अरब डॉलर का निवेश प्रतिबद्धता – विनिर्माण, बुनियादी ढांचा, सेवाएं, नवाचार और रोजगार सृजन पर केंद्रित – भारत की ‘मेक इन इंडिया’ को गति देगा। ईएफटीए जैसे ढांचे से प्रेरित यह निवेश एमएसएमई को तकनीकी उन्नयन और निर्यात क्षमता में मदद करेगा। हालांकि, संवेदनशील क्षेत्रों जैसे डेयरी, चीनी, खाद्य तेल, कीमती धातु और रबर उत्पादों को संरक्षण दिया गया है, ताकि घरेलू उद्योग प्रभावित न हों।

प्रधानमंत्री मोदी ने टेलीफोन पर लक्सन को बधाई देते हुए कहा, “यह समझौता दोनों देशों के बीच आर्थिक साझेदारी को नई ऊंचाइयों पर ले जाएगा। भारत के किसान, एमएसएमई और युवा इसके प्रमुख लाभार्थी होंगे।” लक्सन ने जवाब में कहा, “न्यूजीलैंड के लिए 1.4 अरब भारतीय उपभोक्ताओं तक अभूतपूर्व पहुंच मिलेगी। यह वैश्विक व्यापार चुनौतियों के बीच स्थिरता का प्रतीक है।” रॉयटर्स के अनुसार, हस्ताक्षर अगले वर्ष की पहली छमाही में होंगे, और कार्यान्वयन उसके बाद शुरू होगा। ब्लूमबर्ग ने इसे भारत की तीसरी बड़ी जीत बताया, जो यूएई और ऑस्ट्रेलिया के बाद आई है।

विश्लेषकों का मानना है कि यह FTA भारत की ‘आत्मनिर्भर भारत’ और ‘विश्व गुरु’ विजन को मजबूत करेगा। फर्स्टपोस्ट के अनुसार, यह दोनों देशों के लिए विन-विन है, क्योंकि न्यूजीलैंड को कृषि और डेयरी में संरक्षण मिला, जबकि भारत को निर्यात बढ़ावा। अगले दो दशकों में New Zealand के निर्यात में 1.1-1.3 अरब डॉलर की वार्षिक वृद्धि की संभावना है। भारत के लिए, यह दक्षिण एशिया-प्रशांत क्षेत्र में रणनीतिक महत्व रखता है, जहां चीन का प्रभाव बढ़ रहा है। सीएनबीसी ने इसे ‘ड्यूटी-फ्री व्यापार का नया युग’ कहा।

कुल मिलाकर, India-New Zealand FTA आर्थिक एकीकरण का एक मजबूत कदम है। यह न केवल व्यापार को दोगुना करेगा, बल्कि सांस्कृतिक और शैक्षिक आदान-प्रदान को भी बढ़ावा देगा। लेकिन कार्यान्वयन में पारदर्शिता और संरक्षण सुनिश्चित करना जरूरी होगा। क्या यह समझौता India को वैश्विक व्यापार केंद्र बनाएगा? समय बताएगा, लेकिन शुरुआत शानदार है।

Sources: ब्लूमबर्ग, रॉयटर्स

By SHAHID

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