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8 जनवरी 2026, भारत में जनगणना 2027: भारत सरकार ने जनगणना 2027 की तैयारी में महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए पहला चरण घोषित कर दिया है। जनगणना आयुक्त ने 7 जनवरी 2026 को अधिसूचना जारी की, जिसमें बताया गया कि हाउसलिस्टिंग ऑपरेशंस (घर-सूचीकरण और आवास जनगणना) 1 अप्रैल से 30 सितंबर 2026 तक पूरे देश में चलाए जाएंगे। यह चरण सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में लागू होगा, जिसमें प्रत्येक राज्य को 30 दिनों की विंडो चुनने की छूट दी गई है। यह जनगणना 2011 के बाद पहली राष्ट्रीय स्तर की गणना होगी, जो डिजिटल रूप से आयोजित की जाएगी। इस रिपोर्ट में हम इस घोषणा के सभी पहलुओं पर विस्तार से चर्चा करेंगे, जिसमें चरणों का विवरण, नई विशेषताएं, महत्व और विलंब के कारण शामिल हैं।

घोषणा का विस्तृत विवरण

जनगणना 2027 को दो चरणों में विभाजित किया गया है। पहला चरण हाउसलिस्टिंग और आवास जनगणना है, जो 2026 में अप्रैल से सितंबर तक चलेगा। दूसरा चरण जनसंख्या गणना होगा, जो फरवरी 2027 में आयोजित किया जाएगा। अधिकांश क्षेत्रों के लिए संदर्भ तिथि 1 मार्च 2027 की मध्यरात्रि होगी, जबकि लद्दाख, जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड के बर्फीले और दूरदराज के इलाकों के लिए 1 अक्टूबर 2026 की मध्यरात्रि निर्धारित की गई है। इस समय पर जीवित व्यक्ति ही गणना में शामिल होंगे।

हाउसलिस्टिंग क्या है?

हाउसलिस्टिंग जनगणना की आधारभूत प्रक्रिया है, जिसमें हर संरचना का द्वार-द्वार सर्वेक्षण किया जाता है। इसमें भवन के उपयोग, निर्माण सामग्री, कमरों की संख्या, मालिकाना हक, पानी, बिजली, शौचालय की उपलब्धता, खाना पकाने का ईंधन और संपत्तियों जैसे फोन, वाहन, टेलीविजन आदि की जानकारी एकत्र की जाती है। यह चरण जनगणना के लिए आधार तैयार करता है, जिसमें हर घर और भवन की पहचान की जाती है। 2011 की जनगणना से पता चला था कि 58% घरों में स्नान सुविधा थी, आधे घरों में ड्रेनेज कनेक्शन था, और दो-तिहाई घरों में जलावन के रूप में लकड़ी या गोबर का उपयोग होता था। इस बार 34 कॉलम वाली अनुसूची होगी, जो जीवन स्तर और तकनीकी उपयोग में बदलाव को दर्शाएगी।

नई प्रश्न और विशेषताएं

इस जनगणना में कई नए प्रश्न जोड़े गए हैं, जैसे इंटरनेट की उपलब्धता, मोबाइल फोन और स्मार्टफोन का स्वामित्व, घर के अंदर पेयजल की पहुंच, गैस कनेक्शन का प्रकार, वाहनों की श्रेणी अनुसार स्वामित्व, जनगणना फॉलो-अप के लिए मोबाइल नंबर, और घर में उपभोग किए जाने वाले अनाज का प्रकार। यह पहली बार है जब 1931 के बाद सामान्य जाति गणना भी शामिल होगी, हालांकि इसकी विधि और दायरा अभी तय नहीं है। यह डिजिटल जनगणना होगी, जिसमें मोबाइल ऐप्स (एंड्रॉयड और आईओएस) का उपयोग होगा, जीपीएस टैगिंग, ऑफलाइन डेटा कैप्चर, और क्लाउड अपलोड की सुविधा होगी। पेपर बैकअप भी रखा जाएगा।

आत्म-गणना की प्रक्रिया

एक महत्वपूर्ण नवाचार आत्म-गणना की सुविधा है, जो घर-घर हाउसलिस्टिंग से ठीक पहले 15 दिनों के लिए उपलब्ध होगी। परिवार ऑनलाइन डिजिटल रूप से अपनी जानकारी सबमिट कर सकते हैं और एक यूनिक आईडी प्राप्त करेंगे, जिसे गणनाकर्ता को दिखाकर सत्यापन करा सकेंगे। इससे घरेलू यात्रा का समय कम होगा और डिजिटल परिवर्तन को बढ़ावा मिलेगा। यह पिछली जनगणनाओं से अलग है, जहां सब कुछ मैनुअल था। सरकार का कहना है कि इससे डेटा की सटीकता बढ़ेगी और लोगों की भागीदारी सुनिश्चित होगी।

आत्म-गणना के लाभ

आत्म-गणना से समय की बचत होगी, खासकर शहरी क्षेत्रों में जहां लोग व्यस्त रहते हैं। यह गोपनीयता बनाए रखते हुए डेटा संग्रह को आसान बनाएगी। कम कनेक्टिविटी वाले क्षेत्रों के लिए ऑफलाइन विकल्प भी हैं, जो समावेशी बनाता है।

जनगणना का महत्व और राजनीतिक संदर्भ

जनगणना 2027 का महत्व राजनीतिक और प्रशासनिक दोनों स्तरों पर है। यह चुनावी क्षेत्रों के पुनर्निर्धारण का आधार बनेगी, जब संवैधानिक फ्रीज हटेगा। जाति गणना से सामाजिक न्याय को बढ़ावा मिलेगा, क्योंकि कई राज्य जैसे बिहार, कर्नाटक, तेलंगाना और ओडिशा ने अपनी जाति सर्वेक्षण कर लिए हैं। बिहार और तेलंगाना ने इससे आधारित कानून भी पारित किए हैं। यह विकास योजनाओं, संसाधन वितरण और नीति निर्माण के लिए महत्वपूर्ण डेटा प्रदान करेगी। 2011 की जनगणना से पता चला था कि इंटरनेट पहुंच केवल 3% थी, जबकि मोबाइल सुविधा 63% घरों में थी, जो अब बदल चुकी होगी।

विलंब के कारण

2021 की जनगणना कोविड-19 महामारी के कारण स्थगित हो गई थी। जनवरी 2020 की अधिसूचना को अब नई अधिसूचना से बदल दिया गया है। विपक्षी दलों, विशेषकर कांग्रेस नेता राहुल गांधी के नेतृत्व वाले इंडिया ब्लॉक ने जाति जनगणना की मांग की थी, जिसके बाद कैबिनेट ने दिसंबर 2025 में 11,718.24 करोड़ रुपये की मंजूरी दी।

सरकारी बयान और आगे की योजना

गृह मंत्रालय ने कहा कि यह जनगणना अधिनियम 1948 और नियम 1990 के तहत आयोजित होगी। कैबिनेट मंत्री अश्विनी वैष्णव ने घोषणा की कि प्रारंभिक जनसंख्या आंकड़े 10 दिनों में जारी होंगे, जबकि अंतिम डेटा चरणबद्ध रूप से छह महीनों में। एक सेंट्रल मैनेजमेंट सिस्टम से रीयल-टाइम निगरानी होगी। दूसरे चरण में आयु, शिक्षा, व्यवसाय, धर्म, जाति, प्रवासन और विकलांगता जैसे व्यक्तिगत डेटा एकत्र होंगे, जो 20-21 दिनों में पूरा होगा।

निष्कर्ष

जनगणना 2027 भारत के विकास के लिए मील का पत्थर साबित होगी, जो डिजिटल युग में प्रवेश कर रही है। हाउसलिस्टिंग से शुरू होकर यह प्रक्रिया समावेशी और सटीक डेटा सुनिश्चित करेगी। सरकार को चुनौतियों जैसे डेटा गोपनीयता और ग्रामीण पहुंच पर ध्यान देना होगा। कुल मिलाकर, यह घोषणा देश की जनसांख्यिकीय तस्वीर को नया रूप देगी।

Sources: इंडियन एक्सप्रेस,

By Mohd Abdush Shahid

Mohd Abdush Shahid is Founder and content creator at www.views24.in, specializing in news analysis, feature reporting, and in-depth storytelling. With a keen eye for detail and a passion for uncovering impactful narratives, Mohd Abdush Shahid delivers trusted, engaging content that keeps readers informed and inspired.

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