Wife of Block Cooperative Officer commits suicide in PurniaWife of Block Cooperative Officer commits suicide in Purnia

30 जनवरी 2026, Purnia में ब्लॉक कोऑपरेटिव ऑफिसर की पत्नी ने की आत्महत्या: बिहार के पूर्णिया जिले में एक दुखद घटना ने पूरे क्षेत्र को स्तब्ध कर दिया है। बीकोठी प्रखंड में पदस्थापित ब्लॉक कोऑपरेटिव ऑफिसर (BCO) चंदन कुमार की पत्नी मन्नू कुमारी (उम्र 30 वर्ष) ने किराए के मकान में फांसी लगाकर अपनी जीवन लीला समाप्त कर ली। घटना के.हाट थाना क्षेत्र के हवाई अड्डा रोड स्थित एक किराए के मकान की है, जो सांसद पप्पू यादव के आवास के पास है। सुसाइड से कुछ देर पहले तक मन्नू कुमारी अपने पति के साथ बैठकर टीवी सीरियल देख रही थीं। अचानक सिर में तेज दर्द की शिकायत कर वे कमरे में चली गईं और यह खौफनाक कदम उठा लिया।

परिजनों के अनुसार, मन्नू पिछले एक साल से गहरे मानसिक अवसाद (डिप्रेशन) से गुजर रही थीं। करीब एक वर्ष पहले उनकी मां सुनंदा कुमारी का निधन हो गया था, जिसके सदमे से वे उबर नहीं पा रही थीं। परिवार वाले बताते हैं कि मां की मौत के बाद मन्नू अक्सर गुमसुम और उदास रहने लगी थीं। हालांकि, पुलिस हर पहलू से जांच कर रही है, जिसमें एक पुराना जमीन विवाद भी शामिल है, लेकिन परिजन किसी पारिवारिक कलह से इनकार कर रहे हैं।

घटना का क्रम और परिवार की व्यथा

मृतका मन्नू कुमारी मूल रूप से खगड़िया जिले के महेशखूंट की रहने वाली थीं। उनका मायका बेगूसराय जिले के बिहपुर थाना क्षेत्र के सौराही गांव में है। पति चंदन कुमार पूर्णिया में सरकारी पद पर कार्यरत हैं। दंपति किराए के मकान में रहते थे। ससुर शिवशंकर पासवान सेवानिवृत्त एएसआई हैं।

परिजनों के बयान के अनुसार, शुक्रवार सुबह घर का माहौल पूरी तरह सामान्य था। मन्नू अपने पति चंदन कुमार के साथ बैठकर टीवी पर सीरियल देख रही थीं। अचानक उन्होंने सिर में तेज दर्द की शिकायत की और आराम करने के लिए कमरे में चली गईं। कमरा अंदर से बंद कर लिया। काफी देर तक बाहर न आने पराब मकान मालकिन ने काम के सिलसिले में फोन किया, लेकिन कॉल नहीं उठा। बार-बार प्रयास के बाद भी कोई जवाब न मिलने पर पति चंदन कमरे के पास पहुंचे और दरवाजा खटखटाया।

जब अंदर से कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली, तो संदेह हुआ। स्थानीय लोगों की मदद से दरवाजा तोड़ा गया। कमरे का नजारा देखकर सभी सन्न रह गए। मन्नू कुमारी का शव पंखे से दुपट्टे के फंदे पर लटका हुआ था। आनन-फानन में रस्सी काटकर उन्हें नीचे उतारा गया और अस्पताल ले जाया गया, लेकिन डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।

पिता रामबालक पासवान और ससुर शिवशंकर पासवान ने बताया कि मन्नू बहुत संवेदनशील स्वभाव की थीं। मां की मौत के बाद वे अक्सर रोती रहती थीं और अकेले में समय बिताना पसंद करने लगी थीं। परिवार ने कई बार डॉक्टर से सलाह ली, लेकिन स्थिति में ज्यादा सुधार नहीं हुआ। घटना के बाद से परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। पति चंदन कुमार सदमे में हैं और बोल नहीं पा रहे हैं।

जमीन विवाद का एंगल, लेकिन परिजन बोले- कोई कलह नहीं

परिजनों ने एक और बात का जिक्र किया। लगभग दो वर्ष पहले चंदन कुमार ने पटना में एक कीमती जमीन मन्नू कुमारी के नाम पर खरीदी थी। हाल ही में मन्नू की सहमति से ही उस जमीन को चंदन ने अपने नाम पर हस्तांतरित करवा लिया था। ससुर शिवशंकर पासवान ने स्पष्ट कहा कि यह मन्नू के कहने पर ही किया गया था और इससे कोई विवाद नहीं था। पुलिस हालांकि इस बिंदु की भी जांच कर रही है, ताकि किसी भी संदेह को दूर किया जा सके।

पुलिस जांच और पोस्टमार्टम

घटना की सूचना मिलते ही के.हाट थाना की सब-इंस्पेक्टर नेहा कुमारी पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचीं। पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर आवश्यक कागजी कार्रवाई पूरी की और पोस्टमार्टम के लिए पूर्णिया सदर अस्पताल (GMCH) भेज दिया। प्रथम दृष्टया मामला आत्महत्या का लग रहा है, लेकिन पुलिस सभी एंगल से जांच कर रही है। एसआई नेहा कुमारी ने बताया कि परिजनों के बयान दर्ज कर लिए गए हैं और पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद मौत के सटीक कारण और समय की पुष्टि हो सकेगी। यदि कोई संदिग्ध बात सामने आई तो आगे की कार्रवाई की जाएगी।

मानसिक स्वास्थ्य पर बढ़ता संकट

यह घटना एक बार फिर मानसिक स्वास्थ्य के मुद्दे को उजागर करती है। बिहार में डिप्रेशन और पारिवारिक सदमों से जुड़ी आत्महत्याओं के मामले बढ़ रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि प्रियजन की मौत का गम लंबे समय तक डिप्रेशन का कारण बन सकता है। ऐसे में परिवार का साथ, काउंसलिंग और समय पर चिकित्सकीय मदद जरूरी है। सरकार की ओर से भी मानसिक स्वास्थ्य हेल्पलाइन और जागरूकता कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं, लेकिन ग्रामीण और छोटे शहरों में इनकी पहुंच अभी कम है।

मन्नू कुमारी की मौत ने न केवल एक परिवार को उजाड़ दिया, बल्कि समाज को यह सोचने पर मजबूर कर दिया है कि मानसिक तनाव को कितनी गंभीरता से लेना चाहिए। यदि कोई व्यक्ति उदास या तनावग्रस्त लगे तो उससे बात करें, मदद लें। हेल्पलाइन नंबर जैसे 104 या स्थानीय मानसिक स्वास्थ्य केंद्र से सहायता ली जा सकती है।

परिजन अब अंतिम संस्कार की तैयारी कर रहे हैं। पूरे क्षेत्र में शोक की लहर है। यह घटना याद दिलाती है कि जिंदगी अनमोल है और मानसिक स्वास्थ्य को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।

Sources: दैनिक भास्कर

By Mohd Abdush Shahid

Mohd Abdush Shahid is Founder and content creator at www.views24.in, specializing in news analysis, feature reporting, and in-depth storytelling. With a keen eye for detail and a passion for uncovering impactful narratives, Mohd Abdush Shahid delivers trusted, engaging content that keeps readers informed and inspired.

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