18 दिसंबर 2025- जापानी ऑटोमोबाइल दिग्गज HONDA मोटर कंपनी ने एक बार फिर वैश्विक चिप संकट की चपेट में आकर अपने उत्पादन को रोका है। कंपनी ने घोषणा की है कि दिसंबर के अंत से जनवरी के प्रारंभ तक जापान और चीन में कई प्लांट्स में वाहन निर्माण पूरी तरह बंद रहेगा। यह कदम सिमीकंडक्टर (सेमीकंडक्टर) की लगातार कमी के कारण उठाया गया है, जो कोविड-19 महामारी के बाद से ऑटो इंडस्ट्री को परेशान करता आ रहा है। इस रिपोर्ट में हम इस घटना के कारणों, प्रभावों, वैश्विक संदर्भ और भविष्य की संभावनाओं पर विस्तार से चर्चा करेंगे। यह संकट न केवल HONDA बल्कि पूरी ऑटोमोबाइल चेन को प्रभावित कर रहा है, और इससे उपभोक्ताओं तक की पहुंच प्रभावित हो सकती है।
चिप संकट की पृष्ठभूमि: एक लंबा संघर्ष
सेमीकंडक्टर चिप्स आधुनिक वाहनों का हृदय हैं। ये छोटे-छोटे इलेक्ट्रॉनिक चिप्स इंजन कंट्रोल, सेफ्टी सिस्टम, इंफोटेनमेंट और इलेक्ट्रिक वाहनों (ईवी) की बैटरी मैनेजमेंट से लेकर सब कुछ संचालित करते हैं। 2020 में शुरू हुए चिप संकट ने जबरदस्त तबाही मचाई। कोविड-19 लॉकडाउन के दौरान फैक्ट्रियां बंद हो गईं, मांग में गिरावट आई, लेकिन जैसे ही अर्थव्यवस्था पटरी पर लौटी, चिप्स की मांग आसमान छूने लगी। ताइवान और दक्षिण कोरिया जैसे प्रमुख चिप निर्माता देशों में भूकंप, सूखा और भू-राजनीतिक तनाव ने आपूर्ति श्रृंखला को और कमजोर कर दिया।
2025 तक पहुंचते-पहुंचते विशेषज्ञों ने उम्मीद जताई थी कि संकट समाप्त हो जाएगा। HONDA ने नवंबर 2025 में खुद अनुमान लगाया था कि उत्पादन सामान्य हो जाएगा। लेकिन वास्तविकता कुछ और साबित हुई। ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के अनुसार, वैश्विक चिप बाजार अभी भी 10-15% की कमी से जूझ रहा है, खासकर ऑटोमोटिव ग्रेड चिप्स में। जापान जैसे देश, जो इलेक्ट्रॉनिक्स में अग्रणी हैं, को भी आयात पर निर्भरता के कारण झटका लग रहा है। चीन, दुनिया का सबसे बड़ा वाहन बाजार, अपनी घरेलू चिप इंडस्ट्री को मजबूत करने की कोशिश कर रहा है, लेकिन अभी भी विदेशी आपूर्ति पर निर्भर है।
HONDA का यह फैसला कोई पहली घटना नहीं है। 2021-2023 के दौरान कंपनी ने लाखों वाहनों का उत्पादन घटाया था। लेकिन 2025 में यह पुनरावृत्ति निराशाजनक है, क्योंकि ईवी संक्रमण के दौर में चिप्स की मांग और बढ़ गई है। होंडा, जो 2030 तक 40% बिक्री ईवी से करने का लक्ष्य रखे हुए है, इस संकट से सबसे अधिक प्रभावित हो रही है।
जापान में उत्पादन रोक: विशिष्ट प्रभाव
जापान, HONDA का घरेलू बाजार, इस संकट से सीधे प्रभावित हो रहा है। कंपनी ने घोषणा की है कि सैतामा प्रीफेक्चर के योरिई प्लांट और मिए प्रीफेक्चर के सुजुका प्लांट में 5 और 6 जनवरी को पूर्ण बंदी रहेगी। इसके अलावा, 7 से 9 जनवरी तक उत्पादन 50% तक कम किया जाएगा। ये प्लांट्स होंडा के प्रमुख मॉडल्स जैसे सिविक, अक्रॉस और ईवी वर्जन का निर्माण करते हैं।
निप्पॉन.कॉम की रिपोर्ट के मुताबिक, यह बंदी नए साल की छुट्टियों के साथ ओवरलैप करेगी, लेकिन इससे अतिरिक्त 2-3 दिनों का नुकसान होगा। जापान में ऑटो इंडस्ट्री जीडीपी का 3% योगदान देती है, और होंडा जैसे दिग्गज लाखों नौकरियों का स्रोत हैं। उत्पादन रोक से स्थानीय आपूर्तिकर्ताओं, जैसे पार्ट्स सप्लायर्स और लॉजिस्टिक्स फर्म्स, पर दबाव पड़ेगा। अनुमान है कि इस छोटी अवधि में भी 5,000-10,000 वाहनों का उत्पादन प्रभावित होगा, जो होंडा की वार्षिक क्षमता का 0.5% के बराबर है। लेकिन चेन रिएक्शन लंबा चलेगा।
जापानी सरकार ने पहले ही सब्सिडी देकर चिप उत्पादन को बढ़ावा देने की कोशिश की है। रेनसेस इलेक्ट्रॉनिक्स और अन्य कंपनियां नई फैक्ट्रियां लगा रही हैं, लेकिन पूर्ण क्षमता हासिल करने में 2026 तक समय लगेगा। होंडा के सीईओ तोशिहिरो मिबे ने हाल ही में कहा था कि “चिप संकट अब पुराना हो चुका है, लेकिन इसका असर ताजा है।” यह बयान कंपनी की निराशा को दर्शाता है।
चीन में संकट: विशाल बाजार का झटका
चीन HONDA का दूसरा सबसे बड़ा बाजार है, जहां कंपनी की बिक्री वैश्विक कुल का 25% है। यहां गुांगक्वी HONDA ऑटोमोबाइल (GAC HONDA) के तीनों प्लांट्स—वुहान, गुआंगझोउ और फॉशन—29 दिसंबर से 2 जनवरी तक पांच दिनों के लिए बंद रहेंगे। ये प्लांट्स लोकप्रिय मॉडल्स जैसे अक्रॉस, अवेओ और ई:एनई1 ईवी का उत्पादन करते हैं।
जस्ट ऑटो की रिपोर्ट बताती है कि यह बंदी चीनी नव वर्ष से पहले हो रही है, जो बाजार की मांग को और प्रभावित करेगी। चीन में ईवी बाजार तेजी से बढ़ रहा है, लेकिन चिप कमी से बैटरी मैनेजमेंट सिस्टम प्रभावित हो रहे हैं। होंडा की जॉइंट वेंचर पार्टनर GAC मोटर भी इसी संकट से जूझ रही है। अनुमानित नुकसान: 20,000 वाहनों का उत्पादन रुकना, जो चीनी बाजार में होंडा की हिस्सेदारी को 2-3% गिरा सकता है।
चीन सरकार की “मेड इन चाइना 2025” पहल के तहत SMIC जैसी कंपनियां चिप उत्पादन बढ़ा रही हैं, लेकिन ऑटोमोटिव चिप्स में अभी भी ताइवान की TSMC पर निर्भरता है। भू-राजनीतिक तनाव, जैसे यूएस-चाइना ट्रेड वॉर, ने आयात को जटिल बना दिया है। इससे होंडा को निर्यात-आयात में अतिरिक्त लागत उठानी पड़ रही है।
वैश्विक प्रभाव: ऑटो इंडस्ट्री का डोमिनो प्रभाव
यह संकट केवल होंडा तक सीमित नहीं। TOYOTA, NISSAN और FORD जैसी कंपनियां भी चिप कमी से प्रभावित हैं। 2025 में वैश्विक ऑटो उत्पादन 1.5% गिरने का अनुमान है, जो 2024 की तुलना में कम है। बिजनेस टाइम्स के अनुसार, चिप संकट का लिंगरिंग प्रभाव अब ईवी संक्रमण को धीमा कर रहा है।
उपभोक्ता बाजार पर असर: वाहनों की कीमतें 5-10% बढ़ सकती हैं, और डिलीवरी में देरी होगी। भारत जैसे उभरते बाजारों में, जहां होंडा की बिक्री मजबूत है, आयातित पार्ट्स की कमी से उत्पादन प्रभावित होगा। आर्थिक रूप से, जापान का निर्यात 0.2% और चीन का विनिर्माण सूचकांक 1% गिर सकता है।
पर्यावरणीय दृष्टि से, उत्पादन रोक से कार्बन उत्सर्जन कम होगा, लेकिन लंबे समय में ईवी लक्ष्य प्रभावित होंगे। HONDA ने 2050 तक कार्बन न्यूट्रल बनने का वादा किया है, लेकिन चिप संकट इसे चुनौतीपूर्ण बना रहा है।
आर्थिक और सामाजिक प्रभाव: गहरा घाव
HONDA के 200,000 से अधिक कर्मचारी प्रभावित होंगे। जापान में ओवरटाइम कटौती और चीन में अस्थायी छुट्टियां दी जा रही हैं। योरिई प्लांट में 5,000 मजदूर हैं, जिनकी आय पर असर पड़ेगा। वैश्विक स्तर पर, ऑटो सप्लाई चेन में 10 मिलियन नौकरियां खतरे में हैं।
शेयर बाजार पर भी प्रतिक्रिया: HONDA के शेयर 18 दिसंबर को 2% गिरे, जबकि टोयोटा 1.5%। निवेशक चिंतित हैं कि यह संकट 2026 तक चलेगा। गुरुफोकस की रिपोर्ट के मुताबिक, होंडा को 2025 में 500 मिलियन डॉलर का अतिरिक्त नुकसान हो सकता है।
सामाजिक रूप से, उपभोक्ता विश्वास कम हो रहा है। सर्वे दिखाते हैं कि 40% खरीदार वाहन खरीद टाल रहे हैं।
भविष्य की राह: सुधार की उम्मीदें
विशेषज्ञों का मानना है कि 2026 के मध्य तक चिप आपूर्ति सामान्य हो जाएगी। HONDA चिप डाइवर्सिफिकेशन पर काम कर रहा है, जैसे भारत और थाईलैंड में नए प्लांट्स। कंपनी ने कहा है कि यह अस्थायी कदम है, और उत्पादन फरवरी से पटरी पर लौटेगा।
सरकारें भी सक्रिय हैं। जापान ने 10 बिलियन डॉलर का चिप फंड बनाया है, जबकि चीन ने घरेलू उत्पादन को 70% तक बढ़ाने का लक्ष्य रखा है। होंडा जैसी कंपनियों को अब रिस्क मैनेजमेंट पर फोकस करना होगा।
निष्कर्ष: संकट से सीख
HONDA का उत्पादन रोक वैश्विक सप्लाई चेन की नाजुकता को उजागर करता है। यह चिप संकट का अंतिम अध्याय नहीं, बल्कि एक चेतावनी है। ऑटो इंडस्ट्री को विविधीकरण, स्टॉकपाइलिंग और टेक्नोलॉजी इन्वेस्टमेंट पर ध्यान देना होगा। उपभोक्ताओं के लिए, धैर्य रखना जरूरी है, क्योंकि बेहतर वाहन भविष्य में ही उपलब्ध होंगे। होंडा की लचीलापन इस संकट से उबरने में मदद करेगा, लेकिन पूरी इंडस्ट्री को एकजुट होकर काम करना होगा।