10 दिसंबर 2025 – भारतीय जनता पार्टी (BJP) के रणनीतिकार और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह का बिहार दौरा अब तय माना जा रहा है। 12 दिसंबर (गुरुवार) को होने वाले इस दौरे में शाह बिहार विधानसभा चुनाव 2025 की तैयारियों को अंतिम रूप देंगे। पार्टी के आंतरिक स्रोतों के अनुसार, यह यात्रा NDA गठबंधन को मजबूत करने और सीमांचल जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में विकास योजनाओं पर फोकस करने का मंच बनेगी। हाल ही में बिहार में BJP की जीत के बाद यह दौरा पार्टी के लिए उत्साह बढ़ाने वाला साबित होगा, जहां शाह की चतुराई ने 2020 के विधानसभा चुनावों में NDA को सत्ता की कुर्सी पर बिठाया था। विशेषज्ञों का मानना है कि यह यात्रा विपक्षी महागठबंधन को चुनौती देने का एक बड़ा हथियार साबित होगी।
दौरे का एजेंडा: रणनीति बैठकें और कैंपेन लॉन्च
अमित शाह का यह दौरा मुख्य रूप से पटना और सीमांचल क्षेत्रों तक सीमित रहेगा। सुबह पटना पहुंचने के बाद वे BJP प्रदेश कार्यालय में वरिष्ठ नेताओं के साथ रणनीति बैठक करेंगे, जिसमें सीट बंटवारे, उम्मीदवार चयन और प्रचार अभियान की रूपरेखा पर चर्चा होगी। दोपहर में डिप्टी सीएम सम्राट चौधरी और अन्य NDA सहयोगियों के साथ बैठक होगी, जहां चुनावी सर्वेक्षणों के आधार पर कमजोर सीटों पर फोकस किया जाएगा। शाम को शाह सीमांचल के किशनगंज या पूर्णिया में विभागीय समीक्षा बैठक करेंगे, जहां बाढ़ नियंत्रण, स्वास्थ्य सुविधाओं, शिक्षा और रोजगार सृजन जैसी योजनाओं की प्रगति की समीक्षा होगी। पार्टी ने संकेत दिया है कि इस दौरान शाह एक नया प्रचार अभियान लॉन्च करेंगे, जो ‘विकास की गति, बिहार की प्रगति’ थीम पर आधारित होगा।
यह दौरा BJP की राष्ट्रीय रणनीति का हिस्सा है, जहां शाह हाल ही में असम, पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु और केरल जैसे चुनावी राज्यों का दौरा कर चुके हैं। बिहार में NDA की हालिया जीत के बाद शाह की यह यात्रा पार्टी कार्यकर्ताओं का मनोबल बढ़ाएगी। BJP के प्रदेश अध्यक्ष संजय जायसवाल ने कहा, “अमित जी का आगमन बिहार के लिए सौगात लाएगा। हम विकास के एजेंडे पर मजबूत रहेंगे, जो विपक्ष की नकारात्मक राजनीति को बेनकाब करेगा।” विपक्षी दलों, खासकर RJD और कांग्रेस ने इसे ‘सत्ता की दिखावा’ करार दिया है, लेकिन शाह की यात्रा से पहले ही महागठबंधन में आंतरिक कलह की खबरें आ रही हैं।
राजनीतिक निहितार्थ: सीमांचल पर खास नजर
सीमांचल क्षेत्र, जो मुस्लिम बहुल है और AIMIM की हालिया सफलता से प्रभावित हुआ है, इस दौरे का फोकस पॉइंट बनेगा। शाह यहां NRC-CAA जैसे मुद्दों पर स्पष्ट संदेश दे सकते हैं, साथ ही केंद्र की योजनाओं जैसे PMAY, Ujjwala और PM-KISAN के लाभार्थियों से मुलाकात करेंगे। यह क्षेत्र 2025 चुनावों में निर्णायक साबित हो सकता है, जहां BJP 2019 लोकसभा में मजबूत प्रदर्शन कर चुकी है। राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि शाह का दौरा NDA के वोट शेयर को 5-7% बढ़ा सकता है, खासकर युवा और महिला मतदाताओं में। एक हालिया सर्वे के मुताबिक, बिहार में विकास और सुरक्षा के मुद्दे NDA के पक्ष में हैं, जबकि विपक्ष भ्रष्टाचार के आरोपों में उलझा हुआ है।
हालांकि, दौरा चुनौतियों से खाली नहीं। बिहार में बाढ़ और बेरोजगारी जैसे स्थानीय मुद्दे शाह के सामने परीक्षा लेंगे। यदि वे ठोस घोषणाएं करते हैं, तो यह NDA की लहर को मजबूत करेगा। कुल मिलाकर, अमित शाह का यह बिहार दौरा न केवल चुनावी रणनीति का हिस्सा है, बल्कि राज्य के विकास को गति देने का संकल्प भी। बिहारी मतदाता इस यात्रा से क्या उम्मीद करते हैं, यह आने वाले दिनों में साफ होगा। BJP कार्यकर्ता उत्साहित हैं, और विपक्ष सतर्क। बिहार की सियासत एक बार फिर शाह के इशारों पर नाचने को तैयार है।