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25 दिसंबर 2025, Hajipur: बिहार के वैशाली जिले के Hajipur में सड़क पर एक मामूली विवाद ने खूनी रंग ले लिया। दो लग्जरी कारों—टोयोटा फॉर्च्यूनर और रेनॉल्ट डस्टर—के चालकों के बीच साइड देने को लेकर हुए झगड़े में चाकूबाजी हो गई। इस घटना में डस्टर कार सवार 25 वर्षीय युवक चंद्रशेखर कुमार की दर्दनाक मौत हो गई, जबकि उसका साथी मनीष कुमार गंभीर रूप से घायल है। यह घटना राज्य में बढ़ते रोड रेज (सड़क क्रोध) की विकरालता को उजागर करती है, जहां एक छोटी सी बात जानलेवा हो जाती है। पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है, लेकिन आरोपी अभी तक फरार हैं।

घटना बुधवार रात करीब 10:50 बजे Hajipur सदर थाना क्षेत्र के मलमल्ला चौर (मलमला चंवर) के पास घटी। चंद्रशेखर कुमार और उसके दो दोस्त—मनीष कुमार (22 वर्ष) व एक अन्य अज्ञात मित्र—हाजीपुर के आकाश कुमार के घर भोजन करने गए थे। भोज के बाद वे अपनी रेनॉल्ट डस्टर कार से पातेपुर थाना क्षेत्र के बरडिहा गांव की ओर लौट रहे थे। रास्ते में एक काली रंग की टोयोटा फॉर्च्यूनर उनके आगे चल रही थी। डस्टर के चालक ने ओवरटेक करने के लिए साइड मांगा, लेकिन फॉर्च्यूनर के चालक ने जगह नहीं दी। इससे दोनों गाड़ियां आपस में रगड़ खा गईं, जिसकी चिंगारी ने पूरे विवाद को भड़का दिया।

विवाद बढ़ते ही फॉर्च्यूनर से दो-तीन युवक उतरे और डस्टर पर हमला बोल दिया। उन्होंने डस्टर का शीशा तोड़ दिया और चाकू निकाल लिया। चंद्रशेखर को सीधे पेट में चाकू मार दिया गया, जबकि मनीष को भी कई वार झेलने पड़े। हमलावरों ने न केवल युवकों पर प्रहार किया, बल्कि डस्टर कार को भी बुरी तरह क्षतिग्रस्त कर दिया। लूटपाट करने के बाद आरोपी फॉर्च्यूनर में सवार होकर अंधेरे में फरार हो गए। राहगीरों ने चीख-पुकार सुनकर डायल 112 पर सूचना दी। मौके पर पहुंची पुलिस ने घायलों को तुरंत Hajipur सदर अस्पताल पहुंचाया। चंद्रशेखर की हालत गंभीर देखते हुए उसे पटना मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल (पीएमसीएच) रेफर किया गया, जहां इलाज के दौरान देर रात उसकी मौत हो गई। मनीष का इलाज पीएमसीएच में जारी है और वह खतरे से बाहर है।

पीड़ित चंद्रशेखर कुमार पातेपुर थाना क्षेत्र के बरडिहा गांव का रहने वाला था। वह दिवंगत रामकिशन राय का इकलौता पुत्र था और गांव में एक सामान्य परिवार से ताल्लुक रखता था। स्थानीय लोगों के अनुसार, चंद्रशेखर एक मेहनती युवक था, जो कभी-कभी Hajipur में दोस्तों के साथ घूमने आता था। उसके पिता की पहले ही मौत हो चुकी थी, इसलिए परिवार पर यह सदमा और भारी पड़ रहा है। मनीष कुमार बैजनाथ राय का पुत्र है और वही गांव का निवासी है। दोनों दोस्त बचपन से साथ थे और इस रात भी सामान्य भोज के बाद घर लौट रहे थे। तीसरा मित्र, जिसका नाम अभी स्पष्ट नहीं हुआ, मामूली चोटों के साथ घर लौट गया है। परिवारों का रो-रोकर बुरा हाल है। चंद्रशेखर की मां ने बताया, “बेटा तो बस दोस्तों के साथ खाना खाकर लौट रहा था। कौन सोचेगा कि सड़क पर ही जिंदगी छिन जाएगी।” यह बयान न केवल एक परिवार का दर्द बयां करता है, बल्कि पूरे समाज की चिंता को भी उजागर करता है।

आरोपियों की पहचान अभी तक नहीं हो सकी है। पुलिस के अनुसार, फॉर्च्यूनर में सवार दो-तीन युवक थे, जो शायद स्थानीय गुंडा तत्व हो सकते हैं। सदर थाना प्रभारी रणवीर कुमार झा ने बताया कि आरोपी साइड न देने पर गुस्से से पागल हो गए थे। “हम सीसीटीवी फुटेज खंगाल रहे हैं और गाड़ी का नंबर ट्रेस कर रहे हैं। जल्द ही आरोपी गिरफ्त में होंगे,” उन्होंने कहा। मामला हत्या (धारा 302), मारपीट (धारा 323) और लूट (धारा 395) के तहत दर्ज किया गया है। डायल 112 टीम की तत्परता की सराहना हो रही है, लेकिन देरी से पुलिस पहुंचने पर स्थानीय लोगों ने नाराजगी जताई। वैशाली एसपी मनीष ने कहा कि रोड रेज केसों पर विशेष निगरानी रखी जाएगी और ट्रैफिक पुलिस को सतर्क किया गया है।

यह घटना Hajipur में रोड रेज की बढ़ती प्रवृत्ति का आईना है। राज्य में पिछले एक साल में ऐसे 150 से अधिक मामले दर्ज हुए हैं, जिनमें 20 से ज्यादा मौतें हुईं। विशेषज्ञों का मानना है कि तेज रफ्तार, शराब का सेवन और सामाजिक असमानता इनके पीछे के कारण हैं। फॉर्च्यूनर जैसी महंगी कारों के मालिक अक्सर खुद को श्रेष्ठ समझते हैं, जो छोटे विवादों को हिंसक बना देते हैं। 2016 के रॉकी यादव कांड से लेकर हाल के दिल्ली-मुंबई रोड रेज केस तक, यह समस्या राष्ट्रीय स्तर पर चिंता का विषय बनी हुई है। बिहार सरकार ने रोड सेफ्टी कैंपेन चलाया है, लेकिन जमीनी स्तर पर ट्रैफिक नियमों का पालन कमजोर है। विशेषज्ञ सुझाव देते हैं कि ड्राइविंग लाइसेंस सख्ती से जारी हों और रोड रेज हेल्पलाइन मजबूत बने।

इस घटना ने वैशाली जिले में सनसनी फैला दी है। स्थानीय लोग सड़क सुरक्षा के लिए प्रदर्शन की योजना बना रहे हैं। चंद्रशेखर का शव गुरुवार सुबह पोस्टमॉर्टम के बाद गांव पहुंचा, जहां सैकड़ों ने अंतिम विदाई दी। परिवार ने न्याय की गुहार लगाई है। क्या यह मौत बेकार जाएगी या पुलिस आरोपी को सजा दिलाएगी? समय ही बताएगा। लेकिन इतना तय है कि सड़कें तेजी से युद्धक्षेत्र बन रही हैं, जहां हर चालक एक संभावित शिकार या शिकारी हो सकता है। सरकार और समाज को मिलकर इस जहर को उखाड़ फेंकना होगा, वरना ऐसे दर्दनाक किस्से रोजमर्रा की बात बन जाएंगे।

By Mohd Abdush Shahid

Mohd Abdush Shahid is Founder and content creator at www.views24.in, specializing in news analysis, feature reporting, and in-depth storytelling. With a keen eye for detail and a passion for uncovering impactful narratives, Mohd Abdush Shahid delivers trusted, engaging content that keeps readers informed and inspired.

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