5 फरवरी 2026, Gujrat हाईकोर्ट का ऐतिहासिक फैसला: गुजरात हाईकोर्ट ने आज एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए राज्य सरकार को आत्माराम बापू उर्फ आसाराम के मोटेरा स्थित आश्रम की करीब 45,000 वर्ग मीटर सरकारी जमीन वापस लेने की अनुमति दे दी। यह जमीन नरेंद्र मोदी स्टेडियम के पास स्थित है और इसकी बाजार कीमत लगभग 500 करोड़ रुपये आंकी जा रही है। कोर्ट ने आश्रम ट्रस्ट की याचिका खारिज कर दी, जिसके बाद अब इस जमीन पर बने निर्माणों को हटाने और विध्वंस की कार्रवाई तेज हो सकती है।
विवाद की जड़: दशकों पुराना कब्जा
यह विवाद कई दशकों पुराना है। मोटेरा क्षेत्र में यह जमीन मूल रूप से सार्वजनिक उपयोग के लिए आवंटित थी, जिस पर आसाराम ट्रस्ट ने आश्रम का निर्माण कर लिया था। राज्य सरकार ने लंबे समय से दावा किया कि यह सरकारी जमीन है और इसका दुरुपयोग हो रहा है। 2015 में ही सरकार ने आश्रम से जुड़ी कुछ जमीन वापस ले ली थी, लेकिन मुख्य हिस्सा विवादित रहा।
आसाराम ट्रस्ट ने हाईकोर्ट में अपील दायर कर जमीन पर अपना अधिकार जताया था, लेकिन जस्टिस ए.एस. सुपेहिया और जस्टिस वैभवी नानावटी की बेंच ने सरकार के पक्ष को सही ठहराया। कोर्ट ने कहा कि यह जमीन कॉमनवेल्थ गेम्स और ओलंपिक जैसे खेल विकास के लिए आवंटित थी और इसका धार्मिक या निजी उपयोग गैरकानूनी है।
आसाराम की कानूनी स्थिति
आसाराम बापू वर्तमान में बलात्कार और यौन शोषण के मामलों में आजीवन कारावास की सजा काट रहे हैं। 2013 में सूरत की एक नाबालिग लड़की से बलात्कार के मामले में गांधीनगर सेशन कोर्ट ने उन्हें उम्रकैद की सजा सुनाई थी। इसके अलावा जोधपुर में भी एक अन्य मामले में सजा हो चुकी है। उनके बेटे नारायण साईं भी इसी तरह के मामलों में जेल में हैं।
इन आपराधिक मामलों के बाद आसाराम के आश्रमों पर पूरे देश में कार्रवाई तेज हुई है। कई राज्यों में उनके आश्रमों की जमीनों पर अवैध कब्जे के आरोप लगे और सरकारें उन्हें खाली करा रही हैं। गुजरात में यह सबसे बड़ा मामला है।
जमीन का भविष्य: खेल विकास की दिशा में उपयोग
यह जमीन नरेंद्र मोदी स्टेडियम के निकट होने के कारण रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण है। सूत्रों के अनुसार, राज्य सरकार इसे सरदार पटेल स्पोर्ट्स एनक्लेव के विस्तार या 2036 ओलंपिक की तैयारियों के लिए उपयोग करना चाहती है। भारत ने 2036 समर ओलंपिक की मेजबानी के लिए दावा ठोका है और अहमदाबाद को मुख्य केंद्र बनाने की योजना है। इस जमीन पर विश्वस्तरीय खेल सुविधाएं विकसित की जा सकती हैं।
सरकार ने पहले ही आसाराम आश्रम सहित तीन अन्य आश्रमों की जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया शुरू कर दी थी। अब हाईकोर्ट के फैसले से यह प्रक्रिया तेज हो गई है। अहमदाबाद नगर निगम (AMC) ने पहले ही आश्रम में 32 अवैध निर्माणों पर नोटिस जारी किए थे और इंपैक्ट फीस की अर्जी भी खारिज कर दी थी।
आश्रम ट्रस्ट की प्रतिक्रिया
आश्रम ट्रस्ट के अधिकारियों ने फैसले पर निराशा जताई है। उनका कहना है कि यह जमीन दान में मिली थी और आश्रम यहां दशकों से धार्मिक-सामाजिक कार्य कर रहा है। वे सुप्रीम कोर्ट में अपील करने की संभावना पर विचार कर रहे हैं। हालांकि, जानकारों का मानना है कि हाईकोर्ट के स्पष्ट फैसले के बाद ऊपरी अदालत में राहत मिलना मुश्किल है।
सामाजिक और कानूनी प्रभाव
यह फैसला सरकारी जमीन पर अवैध कब्जे के खिलाफ एक मजबूत संदेश है। देश में कई धार्मिक ट्रस्ट और संस्थाएं सरकारी जमीन पर कब्जा जमाए बैठी हैं। गुजरात सरकार का यह कदम अन्य राज्यों के लिए मिसाल बन सकता है। साथ ही, आसाराम जैसे विवादित व्यक्तियों से जुड़ी संपत्तियों पर कानूनी शिकंजा कसने की दिशा में यह महत्वपूर्ण है।
विपक्षी दल कांग्रेस ने फैसले का स्वागत किया है, जबकि कुछ धार्मिक संगठनों ने इसे धार्मिक स्थलों पर हमला बताया है। लेकिन कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि कोर्ट ने सिर्फ कानून के अनुसार फैसला दिया है।
कानून की जीत
गुजरात हाईकोर्ट का यह फैसला कानून की सर्वोच्चता और सार्वजनिक संपत्ति के संरक्षण की दिशा में मील का पत्थर है। अब सरकार के हाथ में यह जिम्मेदारी है कि इस जमीन का उपयोग जनहित में किया जाए। आसाराम आश्रम का यह हिस्सा अगर खेल सुविधाओं में बदल जाता है, तो यह न केवल विकास की मिसाल बनेगा, बल्कि विवादित अतीत को पीछे छोड़कर नए भारत की तस्वीर पेश करेगा।
Sources: आज तक