10 दिसंबर 2025: भारत की सबसे बड़ी एयरलाइन इंडिगो पर विमानन मंत्रालय ने कड़ा रुख अपनाते हुए उसके विंटर शेड्यूल में 10 प्रतिशत उड़ानों की कटौती का आदेश जारी किया है। यह फैसला एयरलाइन के हाल के बड़े पैमाने पर उड़ान रद्दीकरणों के बाद लिया गया, जिसने हजारों यात्रियों को परेशान किया। विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम अल्पकालिक असुविधा तो बढ़ाएगा, लेकिन दीर्घकाल में स्थिरता ला सकता है।
इंडिगो, जो देश की घरेलू विमानन बाजार में 60 प्रतिशत से अधिक हिस्सेदारी रखती है, रोजाना 2,200 से अधिक उड़ानें संचालित करती है। दिसंबर के पहले सप्ताह से शुरू हुए संकट ने कंपनी की छवि को गहरा धक्का पहुंचाया। 2 दिसंबर से अब तक 3,000 से अधिक उड़ानें रद्द हो चुकी हैं, जिसमें कुछ रिपोर्ट्स में 4,600 का आंकड़ा भी सामने आया है। इसका मुख्य कारण पायलटों की रॉस्टर प्लानिंग में खामियां, क्रू मैनेजमेंट की लापरवाही और अपर्याप्त संचार व्यवस्था बताई जा रही है। दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु और हैदराबाद जैसे प्रमुख हवाई अड्डों पर यात्री घंटों इंतजार करते नजर आए, जबकि बैगेज हैंडओवर में देरी ने गुस्से को और भड़काया।
संकट की गहराई को देखते हुए नागरिक उड्डयन मंत्री राम मोहन नायडू ने 9 दिसंबर को इंडिगो के सीईओ पीटर एल्बर्स (कुछ स्रोतों में पीटर के रूप में उल्लिखित) को समन जारी किया। मंत्रालय की बैठक में एयरलाइन को उसके आंतरिक प्रबंधन पर सवाल उठाए गए। डीजीसीए ने शो-कॉज नोटिस जारी कर जांच शुरू कर दी है, और मंत्री ने चेतावनी दी कि जांच के आधार पर “कठोर और उचित कार्रवाई” की जाएगी। आदेश के तहत इंडिगो को अपने कुल रूट्स में 10 प्रतिशत कटौती करनी होगी, जो रोजाना कम से कम 220 उड़ानों के रद्द होने का मतलब रखता है। यह शुरुआती 5 प्रतिशत प्रस्ताव से दोगुना है। एयरलाइन को बुधवार तक संशोधित शेड्यूल प्रस्तुत करने, किराया कैपिंग लागू करने, रिफंड प्रक्रिया तेज करने (6 दिसंबर तक प्रभावित उड़ानों के लिए 100 प्रतिशत रिफंड पूरे हो चुके हैं) और बैगेज वितरण में तेजी लाने का निर्देश दिया गया। मंत्रालय का तर्क है कि यह कदम “इंडिगो के संचालन को स्थिर करने और भविष्य के रद्दीकरणों को कम करने” में मददगार साबित होगा।
इंडिगो की ओर से प्रतिक्रिया में कंपनी ने कहा कि उसके संचालन “पूरी तरह सामान्य हो चुके हैं” और वह सरकारी निर्देशों का पालन करेगी। सीईओ एल्बर्स ने एक्स (पूर्व ट्विटर) पर वीडियो संदेश जारी कर यात्रियों का धन्यवाद किया और दावा किया कि एयरलाइन “फिर से खड़ी हो चुकी है”। हालांकि, कंपनी ने सभी गंतव्यों पर सेवा जारी रखने का आश्वासन दिया है।
इस आदेश का असर यात्रियों और बाजार दोनों पर पड़ेगा। पीक विंटर सीजन में क्षमता में कमी से अन्य एयरलाइंस जैसे एयर इंडिया या स्पाइसजेट के पास अतिरिक्त उड़ानें उपलब्ध न होने से किराए में 10-20 प्रतिशत की बढ़ोतरी संभव है। शेयर बाजार में भी हलचल मची; इंडिगो के शेयर 1 दिसंबर से 15 प्रतिशत गिर चुके हैं, और आदेश के दिन 2 प्रतिशत की और गिरावट दर्ज की गई। ब्रोकरेज फर्म्स का कहना है कि यह अल्पकालिक झटका है, लेकिन लंबे समय में कंपनी की दक्षता सुधारने से फायदा होगा। विमानन विश्लेषक सनत कौल ने बीबीसी से कहा, “सरकार का यह कदम यात्रियों को लंबे समय में लाभ देगा, लेकिन फिलहाल उन्हें अधिक किराया चुकाना पड़ सकता है।” मार्क मार्टिन जैसे विशेषज्ञ आगे “जुर्माने की संभावना” की ओर इशारा करते हैं।
कुल मिलाकर, यह घटना भारतीय विमानन क्षेत्र की कमजोरियों को उजागर करती है, जहां एक कंपनी की एकाधिकार स्थिति संकट को बढ़ा सकती है। सरकार की सक्रियता सराहनीय है, लेकिन यात्रियों की सुविधा सुनिश्चित करने के लिए अन्य एयरलाइंस को भी क्षमता बढ़ाने की जरूरत है। यदि इंडिगो अपनी कमियों को सुधार ले, तो यह संकट एक सबक बन सकता है।