Goodbye Tahir FarazGoodbye Tahir Faraz

25 जनवरी 2026, अलविदा Tahir Faraz: उर्दू अदब की दुनिया में एक युग का अंत हो गया। अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त मशहूर शायर ताहिर फ़राज़ का 72 वर्ष की आयु में मुंबई में निधन हो गया। हृदयाघात से हुई इस आकस्मिक मौत ने न केवल उनके प्रशंसकों को बल्कि पूरे उर्दू साहित्य जगत को शोक में डुबो दिया। ताहिर फ़राज़ अपनी मखमली आवाज़, रूहानी अंदाज़ और दिल को छूने वाली शायरी के लिए जाने जाते थे। मुशायरों में उनकी तरन्नुम से पढ़ी गई ग़ज़लें और नज़्में करोड़ों दिलों पर राज करती थीं। उनके इंतकाल की खबर जैसे ही फैली, सोशल मीडिया से लेकर अदबी महफिलों तक शोक की लहर दौड़ गई।

जीवन परिचय और शुरुआती सफर

ताहिर फ़राज़ का जन्म 29 जून 1953 को उत्तर प्रदेश के बदायूं जिले में हुआ था। उनका ननिहाल रामपुर में था, इसलिए वे रामपुरी के नाम से मशहूर हुए। इंटरमीडिएट की पढ़ाई पूरी करने के बाद वे रामपुर आ गए और यहीं बस गए। रामपुर की अदबी मिट्टी ने उन्हें गोद लिया। यहां उन्हें मशहूर शायर डॉ. शौक़ असरी रामपुरी और गीतकार दिवाकर राही जैसे उस्तादों का सान्निध्य मिला, जिन्होंने उनकी शायरी को निखारा।

ताहिर फ़राज़ की शायरी में सादगी और गहराई का अनोखा मेल था। वे शोर-शराबे से दूर, दिल तक पहुंचने वाली बातें कहते थे। उनकी पंक्तियां आम इंसान की ज़िंदगी से सीधा संवाद करती थीं। मुशायरों में उनकी प्रस्तुति का अलग ही जादू था – मधुर आवाज़ में तरन्नुम के साथ पढ़े गए अशआर श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर देते थे। अंतरराष्ट्रीय मुशायरों में भारत का प्रतिनिधित्व करते हुए उन्होंने उर्दू शायरी को नई ऊंचाइयों पर पहुंचाया।

प्रमुख रचनाएं और योगदान

ताहिर फ़राज़ की सबसे मशहूर रचना उनकी नज़्म “बहुत ख़ूबसूरत हो तुम” है, जो मोहब्बत की ख़ूबसूरती को बयान करती है। मुशायरों में यह नज़्म तालियों की गड़गड़ाहट बटोरती थी। कुछ पंक्तियां:

बहुत ख़ूब-सूरत हो तुम बहुत ख़ूब-सूरत हो तुम कभी मैं जो कह दूँ मोहब्बत है तुम से तो मुझ को ख़ुदा रा ग़लत मत समझना कि मेरी ज़रूरत हो तुम बहुत ख़ूब-सूरत हो तुम

इसके अलावा उनकी ग़ज़लें और शेर भी बेहद लोकप्रिय हैं। जैसे:

वक़्त करता है ख़ुद-कुशी मुझ में लम्हा लम्हा है ज़िंदगी मुझ में

दर्द ख़ामोश रहा टूटती आवाज़ रही मेरी हर शाम तिरी याद की हमराज़ रही

काश ऐसा कोई मंज़र होता मेरे काँधे पे तेरा सर होता

ताहिर फ़राज़ ने मोहब्बत, ग़म, ज़िंदगी के फलसफे और इंसानी रिश्तों को अपनी शायरी में बेहद संजीदगी से उतारा। वे ‘काशिफ-ए-मोहब्बत’ कहलाते थे। उनकी रचनाएं रेख़्ता और अन्य प्लेटफॉर्म्स पर आज भी लाखों लोग पढ़ते और सुनते हैं। उर्दू अदब में उनका योगदान आने वाली पीढ़ियों को प्रेरित करता रहेगा।

आखिरी दिनों और निधन का कारण

पिछले कुछ समय से ताहिर फ़राज़ स्वास्थ्य कारणों से मुंबई में रह रहे थे। रामपुर की सर्दी उनके लिए हानिकारक थी, इसलिए वे मुंबई शिफ्ट हो गए थे। 24 जनवरी 2026 की देर रात मुंबई के एक अस्पताल में हृदयगति रुकने से उनका इंतकाल हो गया। परिवार में पत्नी, तीन बेटियां और एक बेटा शोक में डूबे हैं।

श्रद्धांजलि और प्रतिक्रियाएं

ताहिर फ़राज़ के निधन पर उर्दू साहित्य जगत में शोक की लहर है। मशहूर शायर शकील आज़मी ने पटना से पोस्ट कर लिखा कि यह खबर दिल को आहत करने वाली है। सोशल मीडिया पर हजारों प्रशंसक इन्ना लिल्लाहि वा इन्ना इलैहि राजिऊन लिखकर श्रद्धांजलि दे रहे हैं। कई लोगों ने उन्हें ‘उर्दू शायरी का ताजमहल’ और ‘तरन्नुम का जादूगर’ कहा। रामपुर और बदायूं में उनके चाहने वाले गमगीन हैं। अदबी संगठनों ने उनके योगदान को याद करते हुए कहा कि एक era का अंत हुआ है।

राजनेता, कलाकार और आम लोग भी शोक संदेश भेज रहे हैं। उनके निधन से न केवल उर्दू अदब बल्कि मुशायरा संस्कृति को बड़ा नुकसान हुआ है।

अमर रहेगा तरन्नुम

ताहिर फ़राज़ चले गए, लेकिन उनकी शायरी और आवाज़ हमेशा जिंदा रहेगी। उनकी पंक्तियां दिलों में गूंजती रहेंगी। उर्दू शायरी के इस चमकते सितारे को भावपूर्ण श्रद्धांजलि। अल्लाह उनकी मगफिरत करे और परिजनों को सब्र दे।

إِنَّا لِلَّٰهِ وَإِنَّا إِلَيْهِ رَاجِعُونَ

Sources: आज तक

By Mohd Abdush Shahid

Mohd Abdush Shahid is Founder and content creator at www.views24.in, specializing in news analysis, feature reporting, and in-depth storytelling. With a keen eye for detail and a passion for uncovering impactful narratives, Mohd Abdush Shahid delivers trusted, engaging content that keeps readers informed and inspired.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *