23 जनवरी 2026, सोने (GOLD) की कीमतें रिकॉर्ड ऊंचाई पर: भारतीय सर्राफा बाजार में सोने और चांदी की कीमतें रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंच गई हैं। आज सोना ₹4,300 प्रति 10 ग्राम महंगा होकर ₹1,55,000 के स्तर को पार कर गया, जो अब तक का सर्वोच्च स्तर है। पिछले 23 दिनों में सोने की कीमत में करीब ₹22,000 की भारी बढ़ोतरी दर्ज की गई है। वहीं, चांदी भी रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई है और ₹95,000 प्रति किलोग्राम के करीब कारोबार कर रही है। यह तेजी वैश्विक अनिश्चितताओं, भू-राजनीतिक तनाव और घरेलू मांग के कारण आई है।
वर्तमान स्थिति: ऐतिहासिक ऊंचाई
मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) और प्रमुख सर्राफा बाजारों के अनुसार, 24 कैरेट सोना आज ₹1,55,200 प्रति 10 ग्राम पर पहुंच गया। 22 कैरेट सोना ₹1,42,000 के आसपास कारोबार कर रहा है। सिर्फ आज की तेजी ₹4,300 रही, जबकि पिछले एक महीने में कुल बढ़ोतरी ₹25,000 से अधिक हो चुकी है। जनवरी की शुरुआत में सोना ₹1,33,000 के स्तर पर था, लेकिन 23 दिनों में ही ₹22,000 की छलांग लग गई।
चांदी की बात करें तो यह भी रिकॉर्ड तोड़ रही है। चांदी ₹94,800-₹95,500 प्रति किलोग्राम पर पहुंच गई, जो पिछले सभी रिकॉर्ड ध्वस्त कर रही है। पिछले एक महीने में चांदी में ₹10,000 से अधिक की बढ़ोतरी हुई है। विशेषज्ञों का कहना है कि औद्योगिक मांग और सोने के साथ सह-संबंध के कारण चांदी भी तेजी पर सवार है।
तेजी के प्रमुख कारण
इस रिकॉर्ड तेजी के पीछे कई वैश्विक और घरेलू कारक जिम्मेदार हैं:
- भू-राजनीतिक तनाव: अमेरिका द्वारा ईरान के निकट USS अब्राहम लिंकन विमानवाहक पोत की तैनाती और मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव ने सुरक्षित निवेश (safe haven) के रूप में सोने की मांग बढ़ा दी है। यूक्रेन-रूस युद्ध और गाजा संकट भी निवेशकों को सोने की ओर खींच रहे हैं।
- ट्रंप प्रशासन की नीतियां: डोनाल्ड ट्रंप के दूसरे कार्यकाल में अमेरिका की “अमेरिका फर्स्ट” नीति, WHO से अलगाव और अन्य अंतरराष्ट्रीय संगठनों से दूरी ने वैश्विक अनिश्चितता बढ़ाई है। इससे अमेरिकी डॉलर कमजोर हुआ, जो सोने की कीमतों को सपोर्ट करता है।
- मुद्रास्फीति और ब्याज दरें: अमेरिकी फेडरल रिजर्व की ब्याज दरों में कटौती की उम्मीदें और वैश्विक मुद्रास्फीति ने सोने को आकर्षक बनाया है। कम ब्याज दरों में सोना जैसे गैर-ब्याज देने वाले एसेट्स की चमक बढ़ जाती है।
- घरेलू मांग: भारत में शादी-ब्याह का सीजन चल रहा है। बसंत पंचमी और आगामी गणतंत्र दिवस के बाद फरवरी-मार्च में वेडिंग सीजन पीक पर होगा। इसके अलावा, निवेशकों का रुझान सोने में बढ़ा है, क्योंकि शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव जारी है।
चांदी की रिकॉर्ड तेजी
चांदी की कीमतें भी सोने के साथ तालमेल बिठाते हुए रिकॉर्ड बना रही हैं। औद्योगिक उपयोग (सोलर पैनल, इलेक्ट्रॉनिक्स, इलेक्ट्रिक व्हीकल्स) में चांदी की मांग तेजी से बढ़ रही है। ग्लोबल स्तर पर ग्रीन एनर्जी ट्रांजिशन ने चांदी को बूस्ट दिया है। भारत में चांदी का उपयोग ज्वेलरी और सिक्कों में भी होता है, जिससे घरेलू मांग मजबूत है। विशेषज्ञों का अनुमान है कि चांदी ₹1 लाख प्रति किलोग्राम तक जा सकती है।
प्रभाव: उपभोक्ता और निवेशक पर असर
यह तेजी उपभोक्ताओं के लिए चिंता का विषय है। शादी-ब्याह में सोने की ज्वेलरी खरीदना अब और महंगा हो गया है। मध्यम वर्ग पर बोझ बढ़ा है, कई लोग खरीदारी टाल रहे हैं। दूसरी ओर, लंबे समय से सोने में निवेश करने वालों को भारी मुनाफा हो रहा है। गोल्ड ETF और सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड में निवेश बढ़ा है।
सर्राफा व्यापारियों का कहना है कि मांग थोड़ी कम हुई है, लेकिन निवेश खरीदारी जारी है। आयात शुल्क में कोई बदलाव नहीं होने से कीमतें और ऊपर जा सकती हैं।
विशेषज्ञों की राय: आगे क्या?
विश्लेषकों का मानना है कि यह तेजी जारी रह सकती है। कोटक सिक्योरिटीज और HDFC सिक्योरिटीज के विशेषज्ञों ने अनुमान लगाया है कि सोना ₹1,60,000 तक जा सकता है, अगर वैश्विक तनाव बढ़ा। हालांकि, कुछ का कहना है कि बजट 2026 में आयात शुल्क में कटौती या ब्याज दरों में बदलाव से करेक्शन आ सकता है।
लंबी अवधि में सोना सुरक्षित निवेश बना हुआ है, लेकिन छोटी अवधि में उतार-चढ़ाव संभव है। निवेशकों को सलाह है कि SIP के जरिए गोल्ड ETF में निवेश करें।
सतर्कता और अवसर का समय
सोने और चांदी की यह रिकॉर्ड तेजी वैश्विक अस्थिरता का आईना है। भारत जैसे सोने के बड़े उपभोक्ता देश के लिए यह चुनौती और अवसर दोनों है। उपभोक्ता सतर्क रहें, जबकि निवेशक स्मार्ट फैसले लें। आने वाला यूनियन बजट और वैश्विक घटनाएं कीमतों की दिशा तय करेंगी। फिलहाल, सोना चमकता हुआ रिकॉर्ड पर है और निवेशकों की पहली पसंद बना हुआ है।
Sources: लाइव मिंट