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6 जनवरी 2026, Bihar में चार दिनों की बैंक हड़ताल: Bihar सहित पूरे देश में बैंक कर्मचारियों की हड़ताल की घोषणा ने आम जनता को चिंता में डाल दिया है। यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियंस (UFBU) ने 27 जनवरी 2026 को पूरे भारत में एक दिवसीय हड़ताल का ऐलान किया है, लेकिन सप्ताहांत और गणतंत्र दिवस की छुट्टियों के कारण बैंकिंग सेवाएं लगातार चार दिनों तक प्रभावित रहेंगी। 24 जनवरी (चौथा शनिवार), 25 जनवरी (रविवार), 26 जनवरी (गणतंत्र दिवस) और 27 जनवरी (हड़ताल) तक बैंक बंद रहेंगे। यह स्थिति बिहार के लाखों ग्राहकों, व्यापारियों और किसानों के लिए बड़ा झटका साबित हो सकती है, जहां बैंकिंग सिस्टम पहले से ही चुनौतियों का सामना कर रहा है। इस रिपोर्ट में हम हड़ताल के कारणों, प्रभावों और संभावित समाधानों पर विस्तार से चर्चा करेंगे।

हड़ताल का पृष्ठभूमि और कारण

बैंक यूनियंस की मुख्य मांग पांच दिवसीय कार्य सप्ताह की है। मार्च 2024 में इंडियन बैंक एसोसिएशन (IBA) के साथ हुए समझौते में यह वादा किया गया था कि शनिवार को छुट्टी घोषित की जाएगी, लेकिन अब तक इसका अमल नहीं हुआ। UFBU, जिसमें सभी प्रमुख बैंक कर्मचारी संघ शामिल हैं, का कहना है कि केंद्र सरकार, राज्य सरकारें, RBI और अन्य नियामक संस्थाएं पहले से ही पांच दिवसीय कार्य सप्ताह पर काम कर रही हैं। बैंक कर्मचारियों का तर्क है कि इससे उत्पादकता, दक्षता और वर्क-लाइफ बैलेंस में सुधार होगा, बिना ग्राहकों की सुविधा प्रभावित किए। ऑल इंडिया बैंक ऑफिसर्स कॉन्फेडरेशन (AIBOC) ने 4 जनवरी को जारी सर्कुलर में हड़ताल की घोषणा की, जिसमें कहा गया कि यदि मांगें पूरी नहीं हुईं तो आंदोलन तेज किया जाएगा।

इस मांग की जड़ें गहरी हैं। बैंक कर्मचारी लंबे समय से ओवरवर्क की शिकायत कर रहे हैं, खासकर महामारी के बाद जब डिजिटल ट्रांजेक्शन बढ़े हैं। बिहार जैसे राज्य में, जहां बैंक शाखाएं दूर-दराज के इलाकों में हैं, कर्मचारियों को अतिरिक्त चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। यूनियंस का दावा है कि पांच दिवसीय सप्ताह से कर्मचारियों की स्वास्थ्य और परिवार जीवन बेहतर होगा, जो अंततः बैंकिंग सेवाओं की गुणवत्ता बढ़ाएगा। हालांकि, बैंक प्रबंधन का कहना है कि इससे ग्राहक सेवा प्रभावित हो सकती है, लेकिन यूनियंस इससे असहमत हैं।

Bihar में बैंकिंग सेक्टर की स्थिति

Bihar में बैंकिंग सेवाएं मुख्य रूप से सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों पर निर्भर हैं, जैसे स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI), पंजाब नेशनल बैंक (PNB) और बैंक ऑफ बड़ौदा। राज्य में लगभग 10,000 बैंक शाखाएं हैं, जिनमें से अधिकांश ग्रामीण इलाकों में हैं। यहां के किसान, छोटे व्यापारी और मजदूर वर्ग बैंकिंग पर बहुत निर्भर हैं। पिछले कुछ वर्षों में डिजिटल बैंकिंग में वृद्धि हुई है, लेकिन ग्रामीण Bihar में इंटरनेट और स्मार्टफोन की पहुंच सीमित होने से पारंपरिक बैंकिंग अभी भी प्रमुख है। 2025 में बिहार की जीडीपी में कृषि और सेवा क्षेत्र का बड़ा योगदान रहा, और बैंकिंग इसमें महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। हड़ताल से पहले ही ठंड के मौसम में बैंकिंग गतिविधियां प्रभावित हो रही हैं, और अब यह चार दिवसीय बंदी स्थिति को और जटिल बना देगी।

Bihar के बैंकिंग सेक्टर में हाल के वर्षों में कई सुधार हुए हैं, जैसे स्मार्ट मीटर से जुड़ी बिजली योजनाएं और डिजिटल लोन प्रक्रियाएं, लेकिन हड़ताल जैसी घटनाएं इन प्रयासों को पीछे धकेल सकती हैं। राज्य सरकार ने बैंकिंग को बढ़ावा देने के लिए कई योजनाएं चलाई हैं, लेकिन कर्मचारियों की असंतोष से ये प्रभावित हो सकती हैं।

हड़ताल का प्रभाव Bihar पर

चार दिनों की बंदी से Bihar की अर्थव्यवस्था पर गहरा असर पड़ेगा। पटना, मुजफ्फरपुर, भागलपुर और गया जैसे प्रमुख शहरों में व्यापारिक गतिविधियां ठप हो सकती हैं। किसानों को कृषि ऋण, सब्सिडी और फसल बीमा से जुड़े काम रुक जाएंगे, जो पहले से ही सर्दी के कारण प्रभावित हैं। छोटे उद्यमी चेक क्लियरेंस, कैश डिपॉजिट और लोन अप्रूवल में देरी का सामना करेंगे। अनुमान है कि बिहार में रोजाना बैंकिंग ट्रांजेक्शन का मूल्य करोड़ों रुपये का होता है, और चार दिनों में यह नुकसान अरबों में पहुंच सकता है। सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों पर अधिक असर पड़ेगा, जबकि कुछ प्राइवेट बैंक सीमित सेवाएं दे सकते हैं, लेकिन यूनियंस की भागीदारी से सभी प्रभावित होंगे। ग्रामीण बिहार में जहां ATM अक्सर खाली रहते हैं, कैश की कमी से दैनिक जीवन प्रभावित होगा।

इसके अलावा, हड़ताल से सरकारी योजनाओं जैसे पीएम किसान, जन धन और अन्य वित्तीय समावेशन कार्यक्रम प्रभावित होंगे। Bihar में जहां बेरोजगारी दर ऊंची है, बैंकिंग सेवाओं की रुकावट से छोटे कारोबारियों को बड़ा नुकसान हो सकता है।

जनता की प्रतिक्रियाएं और चिंताएं

Bihar के लोग पहले से ही इस हड़ताल से चिंतित हैं। पटना के एक व्यापारी राजेश कुमार कहते हैं, “चार दिन बैंक बंद रहेंगे तो हमारा बिजनेस कैसे चलेगा? ऑनलाइन बैंकिंग सबके पास नहीं है।” वहीं, ग्रामीण इलाकों में महिलाएं जो जीविका ग्रुप से जुड़ी हैं, ऋण चुकाने में परेशानी का सामना करेंगी। सोशल मीडिया पर #BankStrike2026 ट्रेंड कर रहा है, जहां लोग सरकार से हस्तक्षेप की मांग कर रहे हैं। कुछ का मानना है कि कर्मचारियों की मांग जायज है, लेकिन टाइमिंग गलत है, क्योंकि जनवरी में टैक्स और फाइनेंशियल क्लोजिंग का समय होता है। बिहार बैंक एम्प्लॉयी एसोसिएशन के एक सदस्य ने कहा, “हमारी मांग पुरानी है, सरकार को सुनना चाहिए।”

जनता की प्रतिक्रियाएं मिश्रित हैं; कुछ कर्मचारियों का समर्थन करते हैं, जबकि अन्य असुविधा से नाराज हैं।

वैकल्पिक व्यवस्थाएं और सुझाव

हड़ताल के दौरान ग्राहक ऑनलाइन बैंकिंग, मोबाइल ऐप, UPI और ATM का इस्तेमाल कर सकते हैं। SBI और अन्य बैंक पहले से ही ATM में कैश स्टॉक बढ़ाने की तैयारी कर रहे हैं। सरकार और IBA को यूनियंस से बातचीत करनी चाहिए ताकि हड़ताल टाली जा सके। लंबे समय में, डिजिटल बैंकिंग को बढ़ावा देकर ऐसी स्थितियों से निपटा जा सकता है। बिहार सरकार राज्य स्तर पर कोऑपरेटिव बैंक को सक्रिय कर सकती है। ग्राहकों को सलाह है कि 23 जनवरी तक जरूरी काम निपटा लें।

इसके अतिरिक्त, राज्य सरकार आपातकालीन बैंकिंग सेवाओं की व्यवस्था कर सकती है, जैसे मोबाइल बैंकिंग वैन ग्रामीण इलाकों में।

निष्कर्ष

यह चार दिवसीय बैंक बंदी बिहार की अर्थव्यवस्था और जनजीवन को चुनौती देगी, लेकिन यदि मांगें पूरी हुईं तो कर्मचारियों की संतुष्टि बढ़ेगी। सरकार को तत्काल हस्तक्षेप करना चाहिए ताकि आम आदमी प्रभावित न हो। यह घटना बैंकिंग सेक्टर में सुधार की जरूरत को रेखांकित करती है।

Sources: इकनोमिक टाइम्स, टाइम्स ऑफ़ इंडिया

By Mohd Abdush Shahid

Mohd Abdush Shahid is Founder and content creator at www.views24.in, specializing in news analysis, feature reporting, and in-depth storytelling. With a keen eye for detail and a passion for uncovering impactful narratives, Mohd Abdush Shahid delivers trusted, engaging content that keeps readers informed and inspired.

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