7 जनवरी 2026, पूर्व IPS अमिताभ ठाकुर ICU में भर्ती: उत्तर प्रदेश के पूर्व IPS अधिकारी अमिताभ ठाकुर की तबीयत अचानक बिगड़ने के बाद उन्हें गोरखपुर के बीआरडी मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया गया है। देवरिया जिला जेल में बंद ठाकुर को सीने में तेज दर्द और बेचैनी की शिकायत के बाद अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों को दिल का दौरा पड़ने का संदेह है। आज (7 जनवरी) उनके रिमांड पर कोर्ट में फैसला होने की उम्मीद है, जो उनके मामले में एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित हो सकता है। ठाकुर की गिरफ्तारी और स्वास्थ्य स्थिति ने राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में हलचल मचा दी है।
अमिताभ ठाकुर का पृष्ठभूमि और गिरफ्तारी का मामला
अमिताभ ठाकुर 1989 बैच के IPS अधिकारी हैं, जिन्होंने उत्तर प्रदेश पुलिस में लंबे समय तक सेवा दी। वे विवादास्पद मामलों और सरकार की आलोचना के लिए जाने जाते हैं। 2021 में केंद्र सरकार ने उन्हें समय से पहले रिटायरमेंट दे दिया था। ठाकुर आजाद अधिकार सेना के अध्यक्ष भी हैं और सामाजिक कार्यकर्ता के रूप में सक्रिय रहे हैं।
उनकी गिरफ्तारी 10 दिसंबर 2025 को शाहजहांपुर में हुई, जब लखनऊ पुलिस ने उन्हें 1999 के एक भूमि धोखाधड़ी मामले में पकड़ा। आरोप है कि देवरिया में SP रहते हुए उन्होंने अपनी पत्नी नूतन ठाकुर के नाम पर फर्जी दस्तावेजों से औद्योगिक प्लॉट हासिल किया। प्लॉट का नाम ‘नूतन इंडस्ट्रीज’ था, जो तीन साल तक विकसित नहीं हुआ और बाद में संजय प्रताप सिंह को ट्रांसफर कर दिया गया। यह प्लॉट 6,000 वर्ग फुट का था और अब श्रीनाथ शांडिल्या कंस्ट्रक्शन प्राइवेट लिमिटेड का ऑफिस है। सितंबर 2025 में लखनऊ के तालकटोरा थाने में FIR दर्ज हुई, जिसमें धोखाधड़ी, जालसाजी और आपराधिक साजिश के धाराएं लगाई गईं।
ठाकुर ने गिरफ्तारी को राजनीतिक साजिश बताया है। उन्होंने दावा किया कि योगी सरकार की आलोचना, खासकर एक कफ सिरप मुद्दे पर, इसके पीछे है। उन्होंने एनकाउंटर का डर भी जताया और कहा कि धनंजय सिंह और वाराणसी के BJP नेताओं से जुड़े तथ्य उजागर करने के कारण उन्हें निशाना बनाया गया। गिरफ्तारी के बाद उन्हें 14 दिनों की न्यायिक हिरासत में भेजा गया और देवरिया जिला जेल में रखा गया।
जेल में भूख हड़ताल और विवाद
जेल में ठाकुर ने पारदर्शिता की कमी का आरोप लगाते हुए अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू की थी। उन्होंने गिरफ्तारी के रिकॉर्ड सार्वजनिक करने की मांग की, लेकिन अधिकारियों ने इनकार कर दिया। जेल अधिकारियों ने उनकी स्थिति पर नजर रखने की बात कही, लेकिन UP कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय ने चार दिन पहले दावा किया कि ठाकुर की हालत गंभीर है और जेल में दुर्व्यवहार हो रहा है। राय ने कहा कि सरकार और सिस्टम चुप हैं, जिससे ठाकुर की जान को खतरा है।
स्वास्थ्य बिगड़ने की घटना और अस्पताल में भर्ती
6 जनवरी (मंगलवार) रात करीब 11 बजे ठाकुर की तबीयत अचानक बिगड़ी। उन्हें सीने में तेज दर्द और बेचैनी हुई। जेल डॉक्टर ने प्राथमिक जांच की और उन्हें महर्षि देवराहा बाबा मेडिकल कॉलेज, देवरिया ले जाया गया। वहां से रात 2 बजे उन्हें गोरखपुर के बीआरडी मेडिकल कॉलेज में ट्रांसफर किया गया। डॉक्टरों ने दिल का दौरा पड़ने का संदेह जताया और विशेषज्ञों की निगरानी में इलाज शुरू किया।
सूत्रों के अनुसार, ठाकुर को ICU में रखा गया है, जहां उनकी स्थिति स्थिर लेकिन गंभीर बताई जा रही है। जेल अधिकारियों ने कहा कि वे उनकी सेहत पर नजर रख रहे हैं। कुछ रिपोर्ट्स में कहा गया है कि अगर हालत नहीं सुधरी तो उन्हें लखनऊ शिफ्ट किया जा सकता है। ठाकुर की पत्नी नूतन ठाकुर ने मीडिया से बातचीत में चिंता जताई और कहा कि गिरफ्तारी के तनाव से उनकी सेहत प्रभावित हुई है।
स्वास्थ्य अपडेट: क्या है वर्तमान स्थिति?
आज सुबह तक मिली जानकारी के अनुसार, ठाकुर की हालत में सुधार हो रहा है, लेकिन डॉक्टर सतर्क हैं। हार्ट स्पेशलिस्ट उनकी निगरानी कर रहे हैं। जेल अधीक्षक ने पुष्टि की कि सभी जरूरी मेडिकल सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। हालांकि, ठाकुर के समर्थकों का कहना है कि जेल में अपर्याप्त देखभाल के कारण यह स्थिति बनी। यह घटना ठाकुर की भूख हड़ताल के कुछ दिनों बाद हुई, जिससे उनके स्वास्थ्य पर अतिरिक्त दबाव पड़ा होगा।
कोर्ट कार्यवाही और आज का रिमांड फैसला
अमिताभ ठाकुर के मामले में कोर्ट कार्यवाही तेज है। 6 जनवरी को देवरिया CJM कोर्ट ने उनकी जमानत याचिका खारिज कर दी। जांच अधिकारी सोभरन सिंह से गिरफ्तारी की वैधता पर रिपोर्ट मांगी गई थी। कोर्ट ने जांच पर करीबी निगरानी का आदेश दिया और कहा कि ठाकुर की गिरफ्तारी जरूरी क्यों थी, इस पर स्पष्टीकरण दें।
आज (7 जनवरी) रिमांड एप्लीकेशन पर सुनवाई होनी है। ठाकुर के वकील अभिषेक शर्मा ने गिरफ्तारी, रिमांड और हिरासत विस्तार को गलत बताया है। उन्होंने दावा किया कि शिकायतकर्ता की पत्नी की शिकायत पहले से लखनऊ में विचाराधीन थी, फिर भी गिरफ्तारी की गई। कोर्ट ने जांच अधिकारी से दस्तावेजों की समीक्षा और रिपोर्ट मांगी है। अगर रिमांड मंजूर हुई तो ठाकुर की हिरासत बढ़ सकती है, लेकिन स्वास्थ्य स्थिति को देखते हुए कोर्ट मेडिकल आधार पर राहत दे सकता है।
राजनीतिक प्रतिक्रियाएं और विवाद
इस मामले ने राजनीतिक रंग ले लिया है। ठाकुर ने वाराणसी में BJP नेताओं पर आरोप लगाए थे, जिसके बाद उनका केस वाराणसी ट्रांसफर हुआ। सोशल मीडिया पर उनके समर्थक इसे प्रतिशोध बताते हैं। कांग्रेस ने योगी सरकार पर हमला बोला है, जबकि BJP ने इसे कानूनी प्रक्रिया बताया। ठाकुर की गिरफ्तारी के समय भारी पुलिस बल तैनात था, जो विवादास्पद रहा।
निष्कर्ष: आगे क्या?
अमिताभ ठाकुर का मामला उत्तर प्रदेश की राजनीति और न्याय व्यवस्था पर सवाल उठा रहा है। उनकी सेहत और रिमांड फैसला आज के घटनाक्रम तय करेंगे। अगर रिमांड बढ़ी तो जांच तेज होगी, लेकिन स्वास्थ्य आधार पर जमानत मिल सकती है। ठाकुर जैसे पूर्व अधिकारी का यह संघर्ष पारदर्शिता और न्याय की मिसाल बन सकता है। राज्य सरकार को इस पर स्पष्ट रुख अपनाना चाहिए, ताकि विवाद न बढ़े।
Sources: टाइम्स ऑफ़ इंडिया