7 फरवरी 2026, झारखंड में पांच थैलेसीमिया पीड़ित बच्चों को चढ़ा HIV संक्रमित खून: झारखंड के पश्चिम सिंहभूम जिले के चाईबासा सदर अस्पताल में थैलेसीमिया से पीड़ित पांच मासूम बच्चों को HIV संक्रमित रक्त चढ़ाए जाने का सनसनीखेज मामला सामने आया है। झारखंड हाईकोर्ट के सख्त आदेश के बाद सदर थाने में तत्कालीन लैब टेक्नीशियन समेत संबंधित अधिकारियों के खिलाफ FIR दर्ज की गई है। इस घटना से पूरे देश में हड़कंप मच गया है और केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने सभी 4153 ब्लड बैंकों की तत्काल ऑडिट करने के निर्देश जारी किए हैं।
घटना का पूरा घटनाक्रम
यह मामला चाईबासा सदर अस्पताल के ब्लड बैंक से जुड़ा है। थैलेसीमिया एक आनुवंशिक बीमारी है, जिसमें मरीजों को नियमित रूप से रक्त चढ़ाने की जरूरत पड़ती है। ये पांचों बच्चे, जिनकी उम्र 5 से 15 साल के बीच है और ज्यादातर आदिवासी समुदाय से हैं, अस्पताल में इलाज करा रहे थे। जांच में पता चला कि उन्हें चढ़ाया गया रक्त HIV पॉजिटिव था। यह लापरवाही ब्लड बैंक की स्क्रीनिंग प्रक्रिया में हुई खामी के कारण हुई।
मामला तब उजागर हुआ जब बच्चों की नियमित जांच में वे HIV पॉजिटिव पाए गए। परिजनों ने शिकायत की, लेकिन शुरुआत में कोई कार्रवाई नहीं हुई। आखिरकार मामला झारखंड हाईकोर्ट पहुंचा। कोर्ट ने पुलिस की उदासीनता पर कड़ी फटकार लगाते हुए तत्काल FIR दर्ज करने का आदेश दिया। शुक्रवार को सदर थाने में केस दर्ज हुआ, जिसमें लापरवाही, धोखाधड़ी और संबंधित धाराओं के तहत आरोप लगाए गए हैं।
केंद्र सरकार की बड़ी कार्रवाई
इस घटना के बाद केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (CDSCO) और स्वास्थ्य मंत्रालय ने सख्त कदम उठाया है। देश भर में मौजूद सभी 4153 लाइसेंस प्राप्त ब्लड बैंकों की व्यापक जांच के आदेश दिए गए हैं। जांच में NACO (नेशनल एड्स कंट्रोल ऑर्गनाइजेशन) की गाइडलाइंस का पालन, ब्लड स्क्रीनिंग प्रक्रिया, स्टोरेज और डोनर सिलेक्शन पर फोकस होगा। मंत्रालय ने कहा कि ऐसी लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी और दोषियों पर सख्त कार्रवाई होगी।
हाल ही में मध्य प्रदेश के सतना में भी थैलेसीमिया पीड़ित बच्चों को HIV संक्रमित रक्त चढ़ाने की घटना सामने आई थी, जिसके बाद यह मुद्दा राष्ट्रीय स्तर पर गर्माया हुआ है। विशेषज्ञों का कहना है कि ब्लड बैंकों में NAT (Nucleic Acid Testing) जैसी उन्नत जांच की कमी और मानवीय भूलें ऐसी घटनाओं का मुख्य कारण हैं।
राजनीतिक और सामाजिक प्रतिक्रियाएं
इस मामले ने झारखंड की सियासत में भूचाल ला दिया है। विपक्षी दल भाजपा ने हेमंत सोरेन सरकार पर हमला बोला और इसे ‘आदिवासी बच्चों के साथ अन्याय’ करार दिया। भाजपा नेताओं ने सोशल मीडिया पर पुरानी घटनाओं का जिक्र करते हुए सरकार की नाकामी पर सवाल उठाए। वहीं, सत्ताधारी गठबंधन ने इसे दुर्भाग्यपूर्ण बताया और जांच का आश्वासन दिया।
एनजीओ और स्वास्थ्य कार्यकर्ता लंबे समय से ब्लड सेफ्टी पर चिंता जता रहे हैं। थैलेसीमिया सोसाइटी ऑफ इंडिया ने मांग की है कि सभी ब्लड बैंकों में अनिवार्य रूप से NAT टेस्टिंग लागू की जाए। परिजन सदमे में हैं और बच्चों के भविष्य को लेकर चिंतित। HIV पॉजिटिव होने से बच्चों को आजीवन एंटी-रेट्रोवायरल थेरेपी (ART) लेनी पड़ेगी।
ब्लड ट्रांसफ्यूजन सेफ्टी की चुनौतियां
भारत में हर साल लाखों यूनिट ब्लड ट्रांसफ्यूजन होता है, लेकिन स्क्रीनिंग में खामियां बार-बार सामने आती हैं। NACO के अनुसार, HIV के अलावा हेपेटाइटिस B और C का खतरा भी बना रहता है। ग्रामीण क्षेत्रों में ब्लड बैंकों की कमी और प्रशिक्षित स्टाफ की कमी बड़ी समस्या है। इस घटना ने एक बार फिर रक्तदान और ब्लड बैंक प्रबंधन की पारदर्शिता पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि डिजिटल ट्रैकिंग सिस्टम, सख्त लाइसेंसिंग और नियमित ऑडिट से ऐसी घटनाओं को रोका जा सकता है। केंद्र की नई जांच से उम्मीद है कि ब्लड सेफ्टी में सुधार होगा।
यह मामला न केवल झारखंड बल्कि पूरे देश के स्वास्थ्य तंत्र की पोल खोल रहा है। बच्चों और उनके परिवारों को न्याय मिलेगा या नहीं, यह आने वाले दिनों में पता चलेगा। फिलहाल जांच जारी है और दोषियों पर कार्रवाई की मांग तेज हो गई है।
Sources: आज तक