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5 जनवरी 2026, बिहार राज्यसभा चुनाव: AIMIM के 5 विधायक– अप्रैल 2026 में बिहार से खाली हो रही पांच राज्यसभा सीटों के लिए राजनीतिक दलों में खींचतान तेज हो गई है। असदुद्दीन ओवैसी की अगुवाई वाली ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) के पांच विधायक अब ‘ट्रॉफी’ बन चुके हैं, जिन्हें NDA और महागठबंधन दोनों गठबंधन लुभाने की होड़ में लगे हैं। 2025 विधानसभा चुनावों में सीमांचल क्षेत्र में अप्रत्याशित सफलता हासिल करने वाले इन विधायकों के वोट अब राज्यसभा की दिशा तय कर सकते हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह स्थिति मुस्लिम वोटबैंक की ध्रुवीकरण को और गहरा करेगी, जहां AIMIM की भूमिका ‘किंगमेकर’ की तरह उभर रही है।

राज्यसभा चुनावों में बिहार विधानसभा के सदस्य ही वोट डालते हैं। वर्तमान में एनडीए के पास बहुमत (130+ विधायक) है, लेकिन क्रॉस-वोटिंग की आशंका से AIMIM के पांच विधायकों की अहमियत बढ़ गई है। इनमें जोकीहाट से विधायक मोहम्मद मुर्शिद आलम, बहादुरगंज से तौसीफ आलम, कोचाधामन से सरवर आलम, बायसी से गुलाम सरवर, अमौर से ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन प्रदेश अध्यक्ष अख्तरुल विधायक शामिल हैं। इनके समर्थन से न केवल सीटें सुरक्षित हो सकती हैं, बल्कि विपक्षी गठबंधन को झटका लग सकता है। हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, दोनों गठबंधनों ने AIMIM नेतृत्व से संपर्क साधना शुरू कर दिया है।

पृष्ठभूमि: AIMIM का बिहार में उदय और 2025 का ‘सीमांचल स्वीप’

AIMIM का बिहार में प्रवेश 2020 से तेज हुआ, लेकिन 2025 विधानसभा चुनावों ने इसे नई ऊंचाई दी। पार्टी ने 25 सीटों पर चुनाव लड़ा और पांच पर शानदार जीत हासिल की—सभी सीमांचल के मुस्लिम बहुल इलाकों से। इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, AIMIM ने कांग्रेस को पीछे छोड़ते हुए मुस्लिम वोटों का बड़ा हिस्सा कब्जा लिया। आउटलुक इंडिया के विश्लेषण में कहा गया कि मुस्लिम विधायकों की संख्या स्वतंत्रता के बाद सबसे कम (केवल 11) रह गई, जो ध्रुवीकरण का परिणाम है। AIMIM ने इसे ‘मुस्लिम प्रतिनिधित्व की संकट’ बताते हुए अपनी रणनीति को मजबूत किया।

2025 चुनाव परिणामों में एनडीए ने 130+ सीटें जीतकर सरकार बनाई, लेकिन महागठबंधन (आरजेडी-कांग्रेस) ने 100+ विधायकों के साथ मजबूत विपक्ष का रूप लिया। राज्यसभा की पांच सीटों के लिए वोटिंग में 122 वोटों की जरूरत है (प्रत्येक उम्मीदवार के लिए 55 वोट, लेकिन बहुमत के आधार पर)। AIMIM के पांच वोट क्रॉस-वोटिंग में निर्णायक साबित हो सकते हैं। यूट्यूब चैनल ‘इंसाइड AIMIM’ के ब्रेकडाउन के मुताबिक, पार्टी ने मजबूत मार्जिन से जीत हासिल की, जो ओवैसी की ‘मुस्लिम एकजुटता’ अपील का नतीजा था।

राजनीतिक हलचलें तेज हैं। एनडीए के एक वरिष्ठ नेता ने नाम न छापने की शर्त पर कहा, “AIMIM से बातचीत प्रारंभिक चरण में है। हम मुस्लिम कल्याण योजनाओं पर फोकस करेंगे।” वहीं, महागठबंधन ने AIMIM को ‘सेकुलर मोर्चा’ में शामिल करने का प्रस्ताव दिया है। ओवैसी ने हालिया ट्वीट में कहा, “बिहार के मुसलमानों का वोट बिकाऊ नहीं। हम स्वतंत्र निर्णय लेंगे।” यह बयान दोनों गठबंधनों के लिए चुनौती है, क्योंकि AIMIM ने 2025 में आरजेडी के वोट काटे थे।

प्रतिक्रियाएं: ध्रुवीकरण और रणनीतिक चालें

फैसला राजनीतिक दलों में ध्रुवीकरण बढ़ा रहा है। भाजपा ने AIMIM को ‘वोट कटर’ बताते हुए सतर्कता बरतने को कहा, जबकि आरजेडी नेता तेजस्वी यादव ने कहा, “मुस्लिम हितों की रक्षा हमारी प्राथमिकता है। AIMIM से संवाद खुलेगा।” कांग्रेस, जो 2025 में AIMIM से बुरी तरह प्रभावित हुई, अब ‘गठबंधन मजबूती’ की बात कर रही है।

विश्लेषकों का मानना है कि यह ‘ट्रॉफी रेस’ 2029 लोकसभा चुनावों की रणनीति तय करेगी। आउटलुक की रिपोर्ट में कहा गया कि मुस्लिम वोटों का बंटवारा (18% आबादी) NDA को फायदा पहुंचा रहा है। AIMIM के विधायक अब ‘हॉट प्रॉपर्टी’ हैं—इनकी लॉबिंग से न केवल राज्यसभा, बल्कि विधानसभा में विश्वासमत के दौरान भी भूमिका हो सकती है। पटना में राजनीतिक कैफे में चर्चा हो रही है कि ओवैसी दिल्ली से पटना आ सकते हैं।

सामाजिक प्रभाव भी गहरा है। सीमांचल के मुस्लिम समुदाय में AIMIM की लोकप्रियता बढ़ी है, लेकिन यह ‘सांप्रदायिक विभाजन’ को बढ़ावा दे रही है। पूर्व IAS अधिकारी ए.के. उपाध्याय ने कहा, “AIMIM की रणनीति मुस्लिमों को मुख्यधारा से अलग कर रही है। दलों को एकजुटता दिखानी चाहिए।”

आर्थिक और राजनीतिक प्रभाव

राज्यसभा चुनाव बिहार की राजनीति को आकार देंगे। पांच सीटों में तीन NDA के पास हैं, लेकिन क्रॉस-वोटिंग से संतुलन बिगड़ सकता है। चुनाव आयोग की 2025 परिणाम रिपोर्ट के अनुसार, बिहार में 243 सीटों पर वोटिंग हुई, जहां AIMIM का प्रदर्शन अप्रत्याशित था। यदि AIMIM NDA के साथ गया, तो महागठबंधन कमजोर पड़ेगा; विपरीत में मुस्लिम वोट एकीकरण होगा।

आर्थिक रूप से, यह विकास योजनाओं पर असर डालेगा। राज्यसभा सदस्य केंद्र की नीतियां प्रभावित करते हैं—मुस्लिम बहुल क्षेत्रों के लिए सब्सिडी और बुनियादी ढांचा पर फोकस बढ़ सकता है। टाइम्स ऑफ इंडिया के अनुसार, 2025 चुनावों में नीतीश कुमार और पीएम मोदी विजेता बने, लेकिन AIMIM ने ‘टॉप 10 सरप्राइज’ में जगह बनाई।

भविष्य: ओवैसी का ‘मास्टरस्ट्रोक’ या राजनीतिक जोखिम?

AIMIM के विधायकों का फैसला फरवरी तक स्पष्ट हो सकता है। पार्टी ने बिहार में और विस्तार की योजना बनाई है, जिसमें 2026 नगर निगम चुनाव शामिल हैं। लेकिन ‘ट्रॉफी’ बनने से जोखिम भी है—क्रॉस-वोटिंग पर दबाव बढ़ेगा। विकिपीडिया के अनुसार, 2026 राज्यसभा चुनाव 72 सदस्यों के लिए हैं, जहां बिहार की भूमिका महत्वपूर्ण है।

संक्षेप में, AIMIM विधायक बिहार की राजनीति के नए केंद्र बने हैं। यह ‘ट्रॉफी रेस’ न केवल राज्यसभा, बल्कि राष्ट्रीय राजनीति को प्रभावित करेगी। क्या ओवैसी एनडीए से हाथ मिलाएंगे या महागठबंधन को मजबूत करेंगे? बिहार की सियासत में नया अध्याय लिखा जा रहा है।

Sources: हिंदुस्तान टाइम्स, विकिपीडिया,

By Mohd Abdush Shahid

Mohd Abdush Shahid is Founder and content creator at www.views24.in, specializing in news analysis, feature reporting, and in-depth storytelling. With a keen eye for detail and a passion for uncovering impactful narratives, Mohd Abdush Shahid delivers trusted, engaging content that keeps readers informed and inspired.

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